Success Story: 2 बार फेल होने पर भी नहीं मानी हार; पिता का अधूरा सपना पूरा करने के लिए DSP बनीं सुनिधि!
BPSC Success Story: बिहार के नवादा की सुनिधि कुमारी ने लगातार दो असफलताओं के बाद भी हार नहीं मानी। अपने पिता के सपने को पूरा करने के लिए तीसरे प्रयास में वह डीएसपी बन गईं।

Sunidhi Kumari BPSC Success Story: कहा जाता है कि अगर आपके इरादे मजबूत हों, तो रास्ते की रुकावटें भी आपका रास्ता नहीं रोक सकतीं। कुछ ऐसा ही कर दिखाया है बिहार के नवादा जिले की रहने वाली सुनिधि कुमारी ने। सुनिधि ने बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की 70वीं संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा में 800वीं रैंक हासिल कर उप पुलिस अधीक्षक (DSP) का प्रतिष्ठित पद हासिल किया है। सुनिधि की यह सफलता उन सभी छात्रों के लिए एक बहुत बड़ी सीख है जो एक या दो बार असफल होने के बाद निराश होकर अपने कदम पीछे खींच लेते हैं।
प्रोफेसर बनने की थी चाहत, पर पिता के सपने को बनाया अपना लक्ष्य
सुनिधि कुमारी बताती हैं कि शुरुआत में उनका सपना सिविल सेवा में आने का नहीं था। वह हमेशा से पढ़ाई और रिसर्च के क्षेत्र में आगे बढ़ना चाहती थीं और एक प्रोफेसर बनना उनका लक्ष्य था। लेकिन उनके पिता का एक अधूरा सपना था कि उनकी बेटी एक बड़ी प्रशासनिक अधिकारी बनकर समाज की सेवा करे। पिता के अचानक गुजर जाने के बाद, सुनिधि ने अपने व्यक्तिगत सपने को पीछे छोड़ दिया और अपने पिता के अधूरे सपने को ही अपने जीवन का सबसे बड़ा लक्ष्य बना लिया।
दो बार टूटी उम्मीद, पर नहीं खोया धैर्य
बीपीएससी जैसी कठिन परीक्षा में सुनिधि को यह कामयाबी इतनी आसानी से नहीं मिली। उन्हें इस मुकाम तक पहुंचने के लिए कड़े संघर्ष और धैर्य की परीक्षा से गुजरना पड़ा। यह उनका तीसरा प्रयास था। इससे पहले के प्रयासों में वे इंटरव्यू के अंतिम राउंड तक पहुंची थीं, लेकिन बहुत ही कम अंतर से उनका फाइनल सिलेक्शन रुक गया था। इस असफलता ने उन्हें अंदर से झकझोर दिया, लेकिन उन्होंने हिम्मत हारने के बजाय अपनी कमियों को पहचाना और दोबारा दोगुनी मेहनत के साथ तैयारी में जुट गईं।
बचपन से ही मेधावी और यूनिवर्सिटी टॉपर रही हैं सुनिधि
सुनिधि कुमारी बचपन से ही पढ़ाई में काफी तेज रही हैं। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा मानस भारती स्कूल और राजेंद्र मेमोरियल महिला कॉलेज, नवादा से पूरी की। इसके बाद उन्होंने विमेंस कॉलेज, पटना से ग्रेजुएशन किया और एएन कॉलेज, पटना से पोस्ट-ग्रेजुएशन की पढ़ाई की। पीजी के दौरान उन्होंने मगध विश्वविद्यालय में पूरी यूनिवर्सिटी में प्रथम स्थान हासिल कर गोल्ड मेडल जीता था और वर्तमान में वह पटना विश्वविद्यालय से पीएचडी (PhD) की पढ़ाई कर रही हैं।
सुनिधि की मां, जो खुद एक पंचायत समिति सदस्य रह चुकी हैं, बताती हैं कि एक अकेली बेटी को पढ़ाई के लिए पटना भेजना उनके लिए आसान नहीं था। लेकिन सुनिधि ने सिर्फ सेल्फ स्टडी, नियमित रूप से उत्तर लिखने के अभ्यास और एनसीईआरटी (NCERT) की किताबों के दम पर यह बड़ी सफलता हासिल की है। आज उनकी इस कामयाबी से न सिर्फ उनका परिवार, बल्कि पूरे गांव के लोग गर्व से फूले नहीं समा रहे हैं।
लेखक के बारे में
Prachiशॉर्ट बायो: प्राची लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में कंटेंट प्रोड्यूसर हैं। पिछले 2 वर्षों से वे करियर, शिक्षा और सरकारी नौकरियों से जुड़े विषयों पर लिख रही हैं। मुश्किल खबरों को आसान भाषा में पाठकों तक पहुंचाना उनकी विशेषता है। वे 2024 से लाइव हिन्दुस्तान की करियर टीम का हिस्सा हैं।
अनुभव और करियर का सफर
प्राची ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत 'नन्ही खबर' से की थी, जहां उन्होंने जमीनी स्तर पर खबरों के महत्व को समझा। इसके बाद, उन्होंने 'सी.वाई. फ्यूचर लिमिटेड' और 'कुटुंब' जैसे प्लेटफॉर्म्स पर बतौर कंटेंट राइटर काम करते हुए अपनी लेखनी और रिसर्च स्किल्स को निखारा। लाइव हिन्दुस्तान से जुड़ने के बाद, वे करियर डेस्क पर सक्रिय हैं और छात्रों के लिए करियर विकल्पों, बोर्ड परीक्षाओं, जॉब और प्रतियोगी परीक्षाओं की बारीकियों को कवर कर रही हैं।
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