Summer Vacation 2026: मोबाइल चलाने में बर्बाद न करें समय, ऐसे करें छुट्टियों का इस्तेमाल; आगे होगा फायदा

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गर्मियों की छुट्टियों का ऐलान होते है घर परिवार में इस बात की चर्चा होती है कि आखिर बच्चे छुट्टियों का सही इस्तेमाल कैसे करें? इसके लिए कई विकल्प मौजूद हैं जिसमें बच्चे कोडिंग, वीडियो एडिटिंग, पेन्टिंग जैसे अन्य स्किल्स को सीख सकते हैं।

Summer Vacation 2026: मोबाइल चलाने में बर्बाद न करें समय, ऐसे करें छुट्टियों का इस्तेमाल; आगे होगा फायदा

हर साल जैसे ही स्कूलों में गर्मी की छुट्टियां शुरू होती हैं बच्चों के चेहरे खिल उठते हैं। सुबह जल्दी उठने की टेंशन खत्म, होमवर्क का दबाव कम और खेलने-कूदने का खुला समय। लेकिन समर वेकेशन 2026 को सिर्फ आराम और मोबाइल स्क्रीन तक सीमित रखना बच्चों के लिए नुकसानदायक भी हो सकता है। यही वो समय है जब छात्र खुद को नई चीजों में आजमा सकते हैं और अपनी छिपी हुई प्रतिभा को पहचान सकते हैं। गौरतलब है कि लगातार पढ़ाई और तयशुदा दिनचर्या के बाद बच्चों को मानसिक आराम की जरूरत होती है। लेकिन इसका मतलब पूरा दिन बेवजह समय गंवाना नहीं है। छुट्टियां बच्चों के दिमाग को तरोताजा करती हैं और उन्हें नई सोच के साथ वापस स्कूल लौटने में मदद करती हैं।

नई खूबियां सीखने का सबसे सही समय

गर्मी की छुट्टियों में बच्चे ऐसी खूबियां सीख सकते हैं जो स्कूल की किताबों में नहीं मिलतीं। आज के दौर में सिर्फ पढ़ाई काफी नहीं मानी जाती। कोडिंग, पेन्टिंग करना, तस्वीर खींचना और वीडियो एडिटिंग जैसी खूबियां बच्चों के भविष्य में काफी काम आ सकती हैं। कई ऑनलाइन मंच गर्मियों में छोटे-छोटे पाठ्यक्रम भी चला रहे हैं, जहां बच्चे घर बैठे नई चीजें सीख सकते हैं। इससे उनका आत्मविश्वास भी बढ़ता है और समय का सही इस्तेमाल भी होता है।

पढ़ने की आदत बच्चों की सोच बदल सकती है

देशभर की कई लाइब्रेरी इस बार समर लर्निंग प्रोग्राम चला रही हैं ताकि बच्चे किताबों से जुड़ें। मोबाइल और सामाजिक माध्यमों के दौर में पढ़ने की आदत धीरे-धीरे कम होती जा रही है, लेकिन छुट्टियां इसे दोबारा शुरू करने का अच्छा मौका हो सकती हैं। बच्चे कहानी की किताबें, अखबार, जीवनियां, विज्ञान की किताबें या अपनी पसंद के उपन्यास पढ़ सकते हैं। पढ़ने से भाषा बेहतर होती है, सोचने की क्षमता बढ़ती है और दिमाग ज्यादा रचनात्मक बनता है।

खेलकूद और सेहत भी जरूरी

गर्मी की छुट्टियों में बच्चे अगर सिर्फ कमरे में बंद रहेंगे तो उनका शरीर और दिमाग दोनों थक सकते हैं। इसलिए शारीरिक गतिविधियां बेहद जरूरी हैं। तैराकी, दौड़, साइकिल चलाना, योग और खुले मैदान के खेल बच्चों को तंदुरुस्त रखने के साथ-साथ तनाव भी कम करते हैं। मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि बाहर खेलना और प्रकृति के बीच समय बिताना बच्चों के मानसिक विकास के लिए बहुत जरूरी है। इससे उनका मूड बेहतर होता है और दिमाग ज्यादा सक्रिय रहता है।

घूमना-फिरना भी सिखाता है जिंदगी के सबक

पारिवारिक यात्राएं सिर्फ मौज-मस्ती नहीं होतीं, बल्कि सीखने का जरिया भी बन सकती हैं। ऐतिहासिक जगहों, पहाड़ों, गांवों या सांस्कृतिक शहरों की यात्रा बच्चों को भारत की विविधता समझने में मदद करती है। नई जगहों पर जाने से बच्चे अलग-अलग खानपान, भाषा और परंपराओं को करीब से देखते हैं। इससे उनकी सोच खुलती है और दुनिया को देखने का नजरिया बदलता है।

प्रशिक्षण और समाज सेवा से मिलेगा असली अनुभव

बड़े छात्रों के लिए ग्रीष्मकालीन प्रशिक्षण काफी फायदेमंद साबित हो सकता है। इससे उन्हें करियर की शुरुआती समझ मिलती है और जिम्मेदारी संभालने का अनुभव भी होता है। इसके अलावा बच्चे किसी समाजसेवी संस्था, पुस्तकालय, पशु आश्रय या सफाई अभियान में समाज सेवा भी कर सकते हैं। इससे उनमें मिलकर काम करने की भावना, अनुशासन और दूसरों की मदद करने की आदत विकसित होती है।

शौक बच्चों को तनाव से दूर रखते हैं

हर बच्चा पढ़ाई में ही अच्छा हो, ऐसा जरूरी नहीं। किसी को चित्रकारी पसंद होती है, किसी को संगीत, तो किसी को मिट्टी के बर्तन बनाना या लिखना। छुट्टियां बच्चों को अपनी पसंद पहचानने का मौका देती हैं। कई बच्चे डायरी लिखना भी शुरू कर सकते हैं। रोज के अनुभव लिखने से उनकी सोच साफ होती है और लिखने की क्षमता मजबूत होती है।

आराम करना भी उतना ही जरूरी

छुट्टियों का असली मतलब खुद को तरोताजा करना भी है। लगातार पढ़ाई और स्क्रीन पर ज्यादा समय बिताने से बच्चे मानसिक रूप से थक जाते हैं। इसलिए पूरी नींद लेना, परिवार के साथ समय बिताना और तनाव से दूर रहना भी जरूरी है। गौरतलब है कि छोटी छुट्टियां भी बच्चों की रचनात्मक सोच को बेहतर बना सकती हैं। जब दिमाग को आराम मिलता है तो बच्चे ज्यादा अच्छे तरीके से सीख पाते हैं।

छुट्टियों के बाद बच्चे बन सकते हैं ज्यादा आत्मविश्वासी

अगर बच्चे समर वेकेशन 2026 का सही इस्तेमाल करते हैं, तो वे सिर्फ तरोताजा होकर नहीं बल्कि नई खूबियां, नए अनुभव और बेहतर आत्मविश्वास के साथ स्कूल लौट सकते हैं। यही छोटी-छोटी गतिविधियां भविष्य में उनके व्यक्तित्व और करियर दोनों को मजबूत बनाने में मदद करती हैं।

Himanshu Tiwari

लेखक के बारे में

Himanshu Tiwari

शॉर्ट बायो: हिमांशु तिवारी पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और मौजूदा वक्त में लाइव हिन्दुस्तान के करियर टीम से जुड़े हुए हैं।

परिचय एवं अनुभव
हिमांशु तिवारी डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया का एक जाना-पहचाना नाम हैं। बीते 10 सालों से वह लगातार पत्रकारिता में सक्रिय हैं और इस वक्त लाइव हिन्दुस्तान में चीफ सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं और बीते 3 साल से वह इस संस्थान से जुड़े हैं। शिक्षा, करियर, नौकरियों, नीट, जेईई, बैंकिंग, एसएससी और यूपीएससी, यूपीपीएससी, बीपीएससी और आरपीएससी जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर उनकी खास पकड़ मानी जाती है। हिमांशु ने साल 2016 में पत्रकारिता की शुरुआत एबीपी न्यूज के डिजिटल प्लेटफॉर्म से किया। इसके बाद वह इंडिया टीवी और जी न्यूज (डीएनए) जैसे बड़े न्यूज चैनलों के डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी हिस्सा रह चुके हैं। हिमांशु तिवारी सिर्फ पत्रकार नहीं, बल्कि एक सजग पाठक और आजीवन विद्यार्थी हैं, उनकी यही खूबी उनके कार्य में परिलक्षित होती है। उनका मानना है कि इन परीक्षाओं से जुड़ी सही और समय पर जानकारी लाखों युवाओं के भविष्य को दिशा दे सकती है, इसलिए वह इस बीट को सिर्फ खबर नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी की तरह देखते हैं।

लेखन की सोच और मकसद
हिमांशु के लिए पत्रकारिता का मतलब सिर्फ सूचना देना नहीं है, बल्कि पाठक को सोचने की जगह देना भी है। खासकर करियर और शिक्षा के क्षेत्र में वह यह मानते हैं कि एक गलत या अधूरी खबर किसी छात्र की पूरी तैयारी को भटका सकती है। इसलिए उनके लेखन में सरल भाषा, ठोस तथ्य और व्यावहारिक नजरिया हमेशा प्राथमिकता में रहता है। उनकी कोशिश रहती है कि पाठक को सिर्फ खबर की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी समझ आए कि उस खबर का उसके जीवन और भविष्य से क्या रिश्ता है।

शिक्षा और अकादमिक पृष्ठभूमि
हिमांशु मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की और फिर जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से पत्रकारिता के गुर सीखे। जामिया में मिली ट्रेनिंग ने उन्हें यह समझ दी कि पत्रकारिता सिर्फ तेज खबर लिखने का नाम नहीं, बल्कि तथ्यों की जांच, संदर्भ की समझ और संतुलित नजरिए से बात रखने की कला है।

रुचियां और निजी झुकाव
काम से इतर हिमांशु की गहरी रुचि समकालीन इतिहास, समानांतर सिनेमा और दर्शन में रही है। राजनीति और विदेश नीति पर पढ़ना-लिखना उन्हें विशेष रूप से पसंद है। इसी रुचि के चलते उन्होंने दो लोकसभा चुनावों और दर्जनों विधानसभा चुनावों की कवरेज की, जहां राजनीति को उन्होंने बेहद नजदीक से देखा और समझा। चुनावी आंकड़ों की बारीकियां, नेताओं के भाषण, जमीनी मुद्दे और जनता की प्रतिक्रियाएं, इन सभी पहलुओं को समेटते हुए उन्होंने सैकड़ों खबरें और विश्लेषण तैयार किए, जो राजनीतिक प्रक्रिया की गहरी समझ को दर्शाते हैं।

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