Success Story: पिता टैक्सी ड्राइवर, बचपन में चराई भैंस; UPSC में 125 रैंक हासिल कर बन गई IAS
UPSC Success Story: वनमथी वर्तमान में महाराष्ट्र के वर्धा जिले की जिला कलेक्टर के रूप में अपनी सेवाएं दे रही हैं। हालांकि वनमति के लिए यहां तक का सफर बिल्कुल भी आसान नहीं था। आइए इनके संघर्ष की कहानी के बारे में जानते हैं।

भारत के गांवों में आज भी कई लड़कियों के लिए आर्थिक तंगी और सामाजित चुनौतियों के कारण उच्च शिक्षा प्राप्त करना आसान नहीं होता है। लेकिन इन्हीं चुनौतियों को पार कर वनमति यूपीएससी सिविल सर्विस की परीक्षा पास करके आईएएस अधिकारी बनी हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक, वनमथी वर्तमान में महाराष्ट्र के वर्धा जिले की जिला कलेक्टर के रूप में अपनी सेवाएं दे रही हैं। हालांकि वनमति के लिए यहां तक का सफर बिल्कुल भी आसान नहीं था। आइए इनके संघर्ष की कहानी के बारे में जानते हैं।
कौन है आईएएस वनमति
तमिलनाडु के इरोड जिले की रहने वाली सी. वनमति बेहद ही साधारण परिवार से ताल्लुक रखती हैं। उनके पिता एक टैक्सी ड्राइवर है। उनकी फैमिली की आर्थिक स्थित ज्यादा अच्छी नहीं थी। उनके परिवार में पशुपालन का काम होता था और वनमति भी पशुओं को चारा खिलाती थीं। इसके अलावा बचपन में वो स्कूल आने के बाद भैंस चराने भी जाया करती थीं। आर्थिक रूप से कमजोर होने के बाद भी माता-पिता चाहते थे कि उनकी बेटी पढ़ लिखकर अधिकारी बने। इसके बाद बेटी वनमती ने माता-पिता का सपना पूरा किया।
शादी का दबाव
ग्रामीण इलाकों की कई लड़कियों की तरह वनमति पर भी स्कूल की पढ़ाई पूरी करने के बाद शादी करने का दबाव था। लेकिन उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखने का फैसला किया। आर्थिक तंगी के बावजूद उनके माता-पिता ने उनका पूरा साथ दिया और हर कदम पर उनका हौसला बढ़ाया। उन्होंने ने ग्रेजुएशन के साथ-साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी शुरू कर दी थी।
एमसीए की डिग्री
वनमति ने कंप्यूटर एप्लीकेशंस (MCA) में पोस्टग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की। यही शिक्षा आगे चलकर उनकी सिविल सेवा की तैयारी और IAS बनने की राह की मजबूत नींव बनी।
आईएएस बनने की प्रेरणा
वनमथी के मन में IAS अधिकारी बनने का सपना तब जगा, जब उन्होंने अपने गांव में एक महिला जिला कलेक्टर को दौरे पर आते देखा। एक महिला को पूरे जिले का प्रशासन संभालते देख उन्हें एहसास हुआ कि वह भी एक दिन इस पद तक पहुंच सकती हैं। यही पल उनकी जिंदगी का टर्निंग प्वाइंट बना और उन्होंने UPSC सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करने का फैसला कर लिया। इसके अलावा यह भी कहा जाता है कि वनमति को आईएएस बनने की प्रेरणा एक धारावाहिक से प्राप्त हुई।‘गंगा यमुना सरस्वती’ नामक इस धारावाहिक की आईएएस नायिका के किरदार से प्रभावित होकर उन्होंने अपने मन में आईएएस ऑफिसर बनने का दृढ़निश्चय कर लिया।
चार प्रयास के बाद मिली सफलता
वनमथी का IAS बनने का सफर भी आसान नहीं था। तैयारी के दौरान आर्थिक जरूरतों को पूरा करने के लिए उन्होंने नौकरी भी की। बैंकिंग भर्ती परीक्षा पास करने के बाद उन्हें इंडियन ओवरसीज बैंक में असिस्टेंट मैनेजर की नौकरी मिली। नौकरी मिलने के बाद भी उन्होंने IAS बनने का सपना नहीं छोड़ा।
उनके पहले UPSC प्रयास में वह इंटरव्यू तक पहुंचीं, लेकिन अंतिम चयन नहीं हो सका। इसके बाद अगले प्रयासों में भी वह परीक्षा के अलग-अलग चरणों में असफल रहीं। आखिरकार साल 2015 में उनकी मेहनत रंग लाई। उन्होंने UPSC सिविल सेवा परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक (AIR) 152 हासिल की और उन्हें महाराष्ट्र कैडर आवंटित किया गया।
इंटरव्यू के दो दिन पहले पिता को करना हॉस्पिटल में एडमिट
IAS इंटरव्यू से ठीक दो दिन पहले वनमति के पिता की तबीयत अचानक बिगड़ गई, जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। उस समय पिता की देखभाल की पूरी जिम्मेदारी वनमति पर थी। ऐसे कठिन हालात में भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। अस्पताल में पिता की सेवा करने के साथ-साथ उन्होंने UPSC का इंटरव्यू दिया और आखिरकार सफलता हासिल कर अपने सपने को साकार किया। उनका यह संघर्ष आज लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुका है।
लेखक के बारे में
Dheeraj Palसंक्षिप्त विवरण:
धीरज पाल को पत्रकारिता के क्षेत्र में 7 साल का अनुभव है। लाइव हिन्दुस्तान में काम करते हुए इन्हें 4 साल हो गए हैं। धीरज एजुकेशन रिपोर्टर के तौर पर काम कर चुके हैं। अपने करियर के दौरान धीरज ने राजनीति समाचार, एजुकेशन बीट के लिए ग्राउंड रिपोर्टिंग भी की है।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि
धीरज ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बीए इन मीडिया स्टडीज और राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय प्रयागराज से जनसंचार एवं पत्रकारिता से परास्नातक की पढ़ाई की। धीरज पाल ने अपने पत्रकारिता कर की शुरुआत एपीएन न्यूज चैनल से की। इसके बाद उन्होंने लोकमत न्यूज हिंदी और एनडीटीवी जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया। हिंदुस्तान लाइव में यूपी बोर्ड से लेकर उन्होंने लोकसभा चुनाव कवर करने साथ-साथ खेल जैसे बीट पर काम किया। अब इनका एकमात्र उद्देश्य करियर और एजुकेशन से जुड़ी रुचिगत, सरल, प्रमाणिक और पाठक-हितैषी रूप में प्रस्तुत करना है।
व्यक्तिगत रुचियां
उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के निवासी धीरज पाल को पत्रकारिता और ज्योतिषीय अध्ययन के साथ-साथ घूमने, किताबें पढ़ने और क्रिकेट खेलने का शौक है।
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