UPSC में 2 अटेंम्प्ट में फेल, फिर BPSC की तैयारी में की दिन-रात मेहनत; तीसरे प्रयास में बनीं SDM
सुधा सिंह बिहार के रोहतास जिले के गांव धरहरा के दिनारा ब्लॉक की रहने वाली हैं। उनके पिता का नाम जगनारायण सिंह है। बेटी की इस उपलब्धि से बेहद खुश हैं। सुधा सिंह की शुरुआती पढ़ाई रांची के सरकारी स्कूल से हुई।

मंजिल उन्हीं को मिलती है, जो दिन-रात अपने लक्ष्य पर मेहनत करते हैं। कुछ ऐसा ही कर दिखाया है बिहार की रोहतास की रहने वाली सुधा सिंह ने। सफर तो यूपीएससी से शुरू किया था, लेकिन बीपीएससी में कमाल कर दिया। हाल ही में जब BPSC 70वीं CCE परीक्षा का परिणाम आया तो सुधा सिंह और उनके परिवार में खुशी का ठिकाना नहीं था। इसके लिए उन्होंने खूब मेहनत की। हालांकि यहां तक का सफर बिल्कुल आसान नहीं था। चलिए सुधा सिंह से मिलवाते हैं।
कौन है सुधा सिंह
सुधा सिंह बिहार के रोहतास जिले के गांव धरहरा के दिनारा ब्लॉक की रहने वाली हैं। उनके पिता का नाम जगनारायण सिंह है। बेटी की इस उपलब्धि से बेहद खुश हैं। सुधा सिंह की शुरुआती पढ़ाई रांची के सरकारी स्कूल से हुई। उनके पिता रांची में रहकर जॉब करते थे। सुधा ने हायर बिहार में रहकर ही उच्च शिक्षा हासिल की है। इंटर की पढ़ाई के बाद उन्होंने वीर कुंवर सिंह यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन किया।
2018 से कर रही हैं सिविल सेवा की तैयारी
मीडिया रिपोर्ट्स की मानें, तो सुधा सिंह ने 2018 में ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की थी। इसके बाद वो दिल्ली आ गईं, जहां उन्होंने यूपीएससी की तैयारी शुरू कर दी। एक खबर के मुताबिक, सुधा सिंह ने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के दो अटेंप्ट दिए। हालांकि दोनों प्रयासों में वो असफल रहीं। इसके बाद उन्होंने बीपीएससी की परीक्षा की तैयारी का मन बना लिया। इसके बाद उन्होंने पूरी ताकत बीपीएससी क्रैक करने में लगा दी।
भाई ने किया प्रेरित
सुधा सिंह ने बताया कि सिविल सेवा में आने की प्रेरणा उन्हें अपने बड़े भाई से मिली। उन्होंने कहा कि उनके भाई का सपना था कि वह एक दिन सिविल सेवा में जाएं। इसी सपने को साकार करने के लिए भाई ने हर मोड़ पर उनका साथ दिया, लगातार प्रेरित किया और मुश्किल दौर में भी उनका हौसला कभी टूटने नहीं दिया। सुधा ने कहा कि भाई के विश्वास और सहयोग ने ही उन्हें अपने लक्ष्य तक पहुंचने की ताकत दी।
बीपीएससी के लिए संघर्ष
बीपीएससी में सफल होने के लिए सुधा को काफी मशक्कत करनी पड़ी। करीब 4 सालों के संघर्ष के बाद बीपीएससी की सफलता की सीढ़ी चढ़ीं। प्रभात खबर में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक BPSC की परीक्षा में उनको पहले 2 अटेंम्प्ट में सफलता मिली। तीसरे अटेंप्ट में जाकर उनका सेलेक्शन हुआ है। दूसरे अटेंप्ट में वे इंटरव्यू राउंड तक पहुंचीं थीं, लेकिन फाइनल सेलेक्शन नहीं हो पाया। 70वीं CCE परीक्षा का जब रिजल्ट आया तो पहले उन्हें लग रहा था कि बस किसी तरह हो जाए। लेकिन जब उन्होंने देखा कि उन्हें SDM पद मिला है तो वो इमोशनल हो गईं और आंखों में आंसू भर आए। तीसरे अटेंम्प्ट में सुधा ने 167वीं रैंक हासिल की।
गांव से एसडीएम तक का सफर
सुधा सिंह ने बताया कि उनकी सफलता का सफर आसान नहीं था। उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई गांव से की। बाद में बड़े भाई की सलाह पर वह तैयारी के लिए दिल्ली चली गईं, जहां उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा और घर से दूर रहकर संघर्ष करना पड़ा। उन्होंने कहा कि BPSC 70वीं संयुक्त प्रतियोगी परीक्षा में चयन के बाद वह अपने गांव की पहली लड़की बन गई हैं, जिसने SDM जैसी बड़ी जिम्मेदारी हासिल की है। सुधा ने आखिकार लाखों लड़कियों के लिए प्रेरणास्रोत है। सीमित सुविधाओं के बीच उन्होंने जो मुकाम हासिल किया, वह हर उस लड़की के लिए उम्मीद की किरण है जो बड़े सपने देखने की हिम्मत रखती है।
लेखक के बारे में
Dheeraj Palसंक्षिप्त विवरण:
धीरज पाल को पत्रकारिता के क्षेत्र में 7 साल का अनुभव है। लाइव हिन्दुस्तान में काम करते हुए इन्हें 4 साल हो गए हैं। धीरज एजुकेशन रिपोर्टर के तौर पर काम कर चुके हैं। अपने करियर के दौरान धीरज ने राजनीति समाचार, एजुकेशन बीट के लिए ग्राउंड रिपोर्टिंग भी की है।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि
धीरज ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बीए इन मीडिया स्टडीज और राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय प्रयागराज से जनसंचार एवं पत्रकारिता से परास्नातक की पढ़ाई की। धीरज पाल ने अपने पत्रकारिता कर की शुरुआत एपीएन न्यूज चैनल से की। इसके बाद उन्होंने लोकमत न्यूज हिंदी और एनडीटीवी जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया। हिंदुस्तान लाइव में यूपी बोर्ड से लेकर उन्होंने लोकसभा चुनाव कवर करने साथ-साथ खेल जैसे बीट पर काम किया। अब इनका एकमात्र उद्देश्य करियर और एजुकेशन से जुड़ी रुचिगत, सरल, प्रमाणिक और पाठक-हितैषी रूप में प्रस्तुत करना है।
व्यक्तिगत रुचियां
उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के निवासी धीरज पाल को पत्रकारिता और ज्योतिषीय अध्ययन के साथ-साथ घूमने, किताबें पढ़ने और क्रिकेट खेलने का शौक है।
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