Success Story: UPSC के 4 अटेंम्प्ट में फेल, नहीं छोड़ी जिद; फिर तीसरे प्रयास में BPSC में लाई 2nd रैंक
बिहार में छपरा के रहने वाले शशांक गौरव ने, जिन्होंने हाल ही में आई बीपीएससी की परीक्षा में दूसरी रैंक हासिल की है। शशांक गौरव के लिए यहां तक पहुंचना आसान नहीं था। उन्होंने कई बार असफलता का सामना किया।

हिंदी के जाने माने साहित्यकार हरिवंश राय बच्चन एक कविता की 2 पंक्तियां काफी फेमस है। वो है- लहरों से डरकर नौका पार नहीं होती, कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती। इस कविता को सही साबित किया है बिहार में छपरा के रहने वाले शशांक गौरव ने, जिन्होंने हाल ही में आई बीपीएससी की परीक्षा में दूसरी रैंक हासिल की है। शशांक गौरव के लिए यहां तक पहुंचना आसान नहीं था। उन्होंने यूपीएससी की सिविल सर्विसेस परीक्षा में 4 बार असफलताओं का सामना किया। इतना ही नहीं बीपीएससी की परीक्षा में 2 बार असफलता मिली है। ऐसे में समझा जा सकता है कि उन्होंने किस तरह अपने सपनों को जगाए रखा और आखिर में मुकाम हासिल किया। चलिए उनकी जर्नी के बारे में बताते हैं।
कौन हैं शंशाक गौरव
शशांक गौरव बनियापुर प्रखंड के पंचमहला सहाजितपुर पंचायत के रहने वाले हैं। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के रामजस कॉलेज से जूलॉजी ऑनर्स में ग्रेजुएशन किया। एनडीटीवी में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक बचपन से उनका सपना सिविल सेवा में जाने का नहीं था। वह बताते हैं कि कॉलेज के दिनों में कार्यक्रमों के दौरान कई IAS और IPS अधिकारियों से मिलने का अवसर मिला। उन्हीं मुलाकातों ने उनके सोचने का नजरिया बदल दिया। उन्हें महसूस हुआ कि सिविल सेवा ऐसा मंच है जहां एक व्यक्ति अपने जीवन से कहीं अधिक लोगों के जीवन में बदलाव ला सकता है। वहीं से इस सपने ने आकार लेना शुरू किया।
तीसरे प्रयास में बीपीएससी क्रैक
शशांक दो बार बीपीएससी की परीक्षा क्रैक करने में असफल रहे। उन्होंने पहला प्रयास बिना गंभीर तैयारी के दिया था। दूसरे प्रयास में पूरी मेहनत की, लेकिन प्रीलिम्स में महज कुछ ही नंबर से बाहर हो गए। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। उन्होंने अपनी कमजोरियों पर काम किया और तीसरे प्रयास में प्रीलिम्स, मेंस और इंटरव्यू तीनों चरण पार करते हुए BPSC में दूसरी रैंक हासिल कर ली।
पढ़ाई के लिए समर्पित
उनके अनुसार वास्तविक तैयारी सितंबर 2023 के बाद शुरू हुई। उसके बाद उन्होंने 2024 और 2025 में पूरी तरह खुद को पढ़ाई के लिए समर्पित कर दिया। उनका मानना है कि BPSC में सबसे कठिन चरण प्रीलिम्स है क्योंकि यहीं सबसे अधिक अभ्यर्थी बाहर हो जाते हैं। इसलिए उन्होंने सबसे ज्यादा जोर प्रीलिम्स की तैयारी और लगातार रिवीजन पर दिया। इससे पहले शशांक ने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) द्वारा आयोजित केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) की असिस्टेंट कमांडेंट परीक्षा में देशभर में 57वीं रैंक हासिल की थी।
बीपीएससी से पहले यूपीएससी
BPSC से पहले शशांक ने UPSC के 4 प्रयास दिए। कई बार मेंस तक पहुंचे, कुछ बार उससे पहले ही बाहर हो गए। CAPF में भी फिजिकल में असफल रहे. लगातार असफलताओं के बीच कई बार उन्हें खुद पर संदेह हुआ कि क्या वे सचमुच इस परीक्षा के लिए बने हैं। ऐसे समय में उनके पिता और बड़े भाई उनका सबसे बड़ा सहारा बने और उनका मनोबल बढ़ाते रहे।
कितने घंटे करते थे पढ़ाई
मीडिया रिपोर्टस के मुताबिक शशांक रोजाना 8 से 9 घंटे पढ़ाई करते थेष सुबह 9 बजे पढ़ाई शुरू होती। तीन से चार अलग-अलग स्लॉट में पढ़ते, शाम को रोज टहलने जाते और फिर रात में दोबारा पढ़ाई करते। उनका मानना है कि लगातार 12-14 घंटे एक जगह बैठने से अधिक जरूरी है कि पढ़ाई छोटे-छोटे हिस्सों में की जाए ताकि एकाग्रता बनी रहे और शरीर भी स्वस्थ रहे।
लेखक के बारे में
Dheeraj Palसंक्षिप्त विवरण:
धीरज पाल को पत्रकारिता के क्षेत्र में 7 साल का अनुभव है। लाइव हिन्दुस्तान में काम करते हुए इन्हें 4 साल हो गए हैं। धीरज एजुकेशन रिपोर्टर के तौर पर काम कर चुके हैं। अपने करियर के दौरान धीरज ने राजनीति समाचार, एजुकेशन बीट के लिए ग्राउंड रिपोर्टिंग भी की है।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि
धीरज ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बीए इन मीडिया स्टडीज और राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय प्रयागराज से जनसंचार एवं पत्रकारिता से परास्नातक की पढ़ाई की। धीरज पाल ने अपने पत्रकारिता कर की शुरुआत एपीएन न्यूज चैनल से की। इसके बाद उन्होंने लोकमत न्यूज हिंदी और एनडीटीवी जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया। हिंदुस्तान लाइव में यूपी बोर्ड से लेकर उन्होंने लोकसभा चुनाव कवर करने साथ-साथ खेल जैसे बीट पर काम किया। अब इनका एकमात्र उद्देश्य करियर और एजुकेशन से जुड़ी रुचिगत, सरल, प्रमाणिक और पाठक-हितैषी रूप में प्रस्तुत करना है।
व्यक्तिगत रुचियां
उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के निवासी धीरज पाल को पत्रकारिता और ज्योतिषीय अध्ययन के साथ-साथ घूमने, किताबें पढ़ने और क्रिकेट खेलने का शौक है।
व्यक्तिगत रुचियां
उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के निवासी धीरज पाल को पत्रकारिता के साथ-साथ घूमने, किताबें पढ़ने और क्रिकेट खेलने का शौक है।


