नौकरी, शादी और चार बार की नाकामी… फिर भी नहीं मानी हार, समीक्षा ने कैसे UPSC में पाया AIR 56
पांच बार असफल होने के बाद भी समीक्षा द्विवेदी ने हार नहीं मानी और यूपीएससी 2025 में ऑल इंडिया रैंक 56 हासिल कर मिसाल कायम की।

मध्य प्रदेश के मऊगंज जिले के एक छोटे से गांव दगडुआ में एक लड़की के सपनों में सिविल सेवा की वर्दी नहीं बल्कि जज्बा था। उसे नहीं पता था कि यह सपना उससे पांच साल की मेहनत, बार-बार की नाकामी और एक बार तो महज अठारह नंबर की दूरी मांगेगा। आज वही लड़की, देश की सबसे कठिन परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 56 लेकर खड़ी है और उसकी कहानी हर उस अभ्यर्थी के लिए एक सबक है जो बार-बार गिरकर भी उठने की हिम्मत रखता है। जी हां हम बात कर रहे हैं समीक्षा द्विवेदी की जिन्होंने कठिन परिस्थितियों में कड़ी महेनत करते हुए इस मुकाम को हासिल किया है।
घर से मिली पढ़ाई की तमीज
समीक्षा का परिवार शुरू से पढ़ाई-लिखाई को अहमियत देने वाला रहा है। उनके पिता श्रीनिवास द्विवेदी भोपाल में मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में क्षेत्रीय अधिकारी के पद पर कार्यरत हैं, जबकि मां सुनीता द्विवेदी ने हमेशा उनकी हौसला-अफजाई की। इंदौर में हुई स्कूली पढ़ाई के दौरान ही समीक्षा की मेधा साफ झलकने लगी थी मगर सिर्फ अच्छे नंबर लाना उनका मकसद नहीं था। लोक सेवा की तरफ उनका रुझान धीरे-धीरे मगर मजबूती से बढ़ता गया।
इंजीनियरिंग से बैंकिंग तक का सफर
समीक्षा ने चेन्नई के एसआरएम इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी से कंप्यूटर साइंस में बीटेक किया। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने कुछ समय सॉफ्टवेयर इंजीनियर की नौकरी भी की। लेकिन सिविल सेवा की चाहत उनके भीतर से गई नहीं। इसी बीच उन्होंने आईआईटी कानपुर से एमबीए भी किया, जिसने उनकी सोच को और तराशा। इंजीनियरिंग और मैनेजमेंट, दोनों की पढ़ाई ने उनके विश्लेषणात्मक सोच और जवाब लिखने की कला को धार दी। इसके अलावा उन्होंने आईबीपीएस पीओ परीक्षा पास कर केनरा बैंक में प्रोबेशनरी ऑफिसर की नौकरी भी हासिल की। एक तरफ नौकरी की जिम्मेदारियां और दूसरी तरफ यूपीएससी की तैयारी यह आसान राह नहीं थी। मगर समीक्षा ने वक्त का सही बंटवारा कर दोनों मोर्चों को साधे रखा।
पांच कोशिशों में मिला पांच अलग सबक
समीक्षा का यूपीएससी सफर सीधी लकीर में नहीं चला। 2021 में पहली कोशिश में वे प्रीलिम्स भी पार नहीं कर सकीं। 2022 में प्रीलिम्स निकाला मगर मेन्स में अटक गईं। असली मोड़ आया 2023 में, जब वे इंटरव्यू तक पहुंचीं मगर अंतिम सूची में नाम नहीं आया, वजह सिर्फ अठारह नंबर की कमी। यह आंकड़ा भले ही छोटा लगे, मगर इसने उनके धैर्य की गहरी परीक्षा ली। 2024 में भी वे इंटरव्यू तक गईं, और फिर एक बार नतीजा उनके पक्ष में नहीं गया। इतनी बार की मायूसी के बाद ज्यादातर लोग रास्ता बदल लेते, मगर समीक्षा ने एक और मौका चुना।
शादी के बाद भी नहीं थमी तैयारी
इन्हीं सालों के बीच समीक्षा की शादी भी हुई। उनके पति बैंक ऑफ इंडिया में कार्यरत हैं और उनकी तैयारी के दौरान एक मजबूत सहारा बने रहे। नौकरी, परीक्षा की तैयारी और अब पारिवारिक जिम्मेदारियां इन सबको साथ लेकर चलना किसी चुनौती से कम नहीं था, मगर समीक्षा ने भावनात्मक संतुलन बनाए रखा।
पांचवीं कोशिश में बदली किस्मत
पांचवें प्रयास तक आते-आते समीक्षा प्रयोग नहीं कर रही थीं बल्कि अपनी रणनीति को निखार रही थीं। उन्होंने उत्तर लेखन पर खास ध्यान दिया और अपने जवाबों को स्पष्टता के साथ बेहतर ढंग से पेश करना सीखा। वैकल्पिक विषय के तौर पर इतिहास चुना और इसमें करीब 299 अंक हासिल किए। आखिरकार 2025 में उनकी मेहनत रंग लाई और उन्होंने ऑल इंडिया रैंक 56 हासिल कर ली।


