Success Story: 20 साल तक मां ने धोई पुलिसवालों की वर्दी, बेटा BPSC क्रैक कर बना अधिकारी

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धोबी परिवार से आने वाले धर्मेंद्र ने 70वीं बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) संयुक्त प्रतियोगी परीक्षा पास कर राजस्व अधिकारी (Revenue Officer) का पद हासिल किया। उन्होंने साबित कर दिया कि मजबूत इरादों के सामने कोई भी मुश्किल बड़ी नहीं होती। हालांकि धर्मेंद्र कुमार के लिए यहां पहुंचा आसान नहीं था।

Success Story of Dharmendra Kumar Mother washed police uniforms for 20 years son cracked the BPSC exam and became an off

सफलता किसी की परिस्थितियों की मोहताज नहीं होती है। जो लोग अपने लक्ष्य के लिए पूरी मेहनत, धैर्य और लगन से काम करते हैं, उन्हें एक न एक दिन सफलता जरूर मिलती है। ठीक, यह बात प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों पर भी लागू होती है। क्योंकि किसी भी प्रतियोगी सरकारी परीक्षा को पास करना आसान नहीं होता। इसके लिए सालों की मेहनत, अनुशासन और लगातार प्रयास की जरूरत होती है। जो लोग हार नहीं मानते, आखिरकार वही अपनी मंजिल तक पहुंचते हैं। इस सफलता के पीछे परिवार, दोस्तों और मां-बाप का पूरा सहयोग रहता है। ऐसी ही एक कहानी है धर्मेंद्र कुमार की। मां पुलिस थाने में स्टाफ के वर्दियां धोने का काम करती थीं। लेकिन कभी नहीं सोचा था कि एक दिन उनका बेटा अधिकारी बनकर उसी थाने में सम्मानित किया जाएगा।

राजस्व अधिकारी का पद किया हासिल

जी हां, धोबी परिवार से आने वाले धर्मेंद्र ने 70वीं बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) संयुक्त प्रतियोगी परीक्षा पास कर राजस्व अधिकारी (Revenue Officer) का पद हासिल किया। उन्होंने साबित कर दिया कि मजबूत इरादों के सामने कोई भी मुश्किल बड़ी नहीं होती। हालांकि धर्मेंद्र कुमार के लिए यहां पहुंचा आसान नहीं था।

कौन है धर्मेंद्र कुमार

धर्मेंद्र कुमार वैशाली जिले के जंदाहा बाजार के रहने वाले हैं। उनके पिता दिहाड़ी मजदूरी करके परिवार का खर्च चलाते थे। वहीं उनकी मां रेखा देवी पिछले 20 सालों से जंदाहा थाना में पुलिसकर्मियों की वर्दियां धोने का काम कर रही हैं। उन्होंने अपनी मेहनत से कमाए हर पैसे को बेटे की पढ़ाई पर खर्च किया, ताकि वह अपना सपना पूरा कर सके।

धर्मेंद्र कुमार ने अपनी सफलता का श्रेय अपनी मां के त्याग और जंदाहा थाने के पुलिसकर्मियों से मिले लगातार सहयोग और हौसले को दिया। उन्होंने कहा कि उनकी तैयारी के दौरान पुलिसकर्मियों का प्रोत्साहन उन्हें हमेशा आगे बढ़ने की प्रेरणा देता रहा।

20 सालों से धो रही हैं थाने में वर्दियां

एनडीटीवी के मुताबिक भावुक हुईं उनकी मां रेखा देवी ने बताया कि जंदाहा थाने के पुलिसकर्मियों ने हमेशा उनका साथ दिया और उनका हौसला बढ़ाया। उन्होंने कहा कि 20 साल तक पुलिस की वर्दियां धोने के दौरान उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि एक दिन उनके संघर्ष का फल बेटे की इतनी बड़ी सफलता के रूप में मिलेगा।

धर्मेंद्र की सफलता के बाद पूरे इलाके में जश्न का माहौल बन गया। सर्किल इंस्पेक्टर विजय कुमार सिंह और थाना प्रभारी अनामिका कुमारी ने उन्हें थाने बुलाकर फूल-मालाएं पहनाईं और मिठाई खिलाकर सम्मानित किया। पुलिस अधिकारियों ने कहा कि धर्मेंद्र की उपलब्धि सिर्फ उनके परिवार ही नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए गर्व की बात है। उनकी सफलता प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा बनेगी।

डीएसपी बनना है अगला लक्ष्य

गांव के लोगों ने भी ढोल-नगाड़ों और बैंड-बाजे के साथ जुलूस निकालकर धर्मेंद्र की सफलता का जश्न मनाया। यह पूरे गांव के लिए गर्व का पल बन गया। राजस्व अधिकारी बनने के बाद भी धर्मेंद्र का सपना यहीं खत्म नहीं हुआ है। उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि अब उनका अगला लक्ष्य BPSC की परीक्षा पास कर डीएसपी (Deputy Superintendent of Police) बनना है।

Dheeraj Pal

लेखक के बारे में

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संक्षिप्त विवरण: धीरज पाल को पत्रकारिता के क्षेत्र में 7 साल का अनुभव है। लाइव हिन्दुस्तान में काम करते हुए इन्हें 4 साल हो गए हैं। धीरज एजुकेशन रिपोर्टर के तौर पर काम कर चुके हैं। अपने करियर के दौरान धीरज ने राजनीति समाचार, एजुकेशन बीट के लिए ग्राउंड रिपोर्टिंग भी की है।

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धीरज ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बीए इन मीडिया स्टडीज और राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय प्रयागराज से जनसंचार एवं पत्रकारिता से परास्नातक की पढ़ाई की। धीरज पाल ने अपने पत्रकारिता कर की शुरुआत एपीएन न्यूज चैनल से की। इसके बाद उन्होंने लोकमत न्यूज हिंदी और एनडीटीवी जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया। हिंदुस्तान लाइव में यूपी बोर्ड से लेकर उन्होंने लोकसभा चुनाव कवर करने साथ-साथ खेल जैसे बीट पर काम किया। अब इनका एकमात्र उद्देश्य करियर और एजुकेशन से जुड़ी रुचिगत, सरल, प्रमाणिक और पाठक-हितैषी रूप में प्रस्तुत करना है।

व्यक्तिगत रुचियां
उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के निवासी धीरज पाल को पत्रकारिता और ज्योतिषीय अध्ययन के साथ-साथ घूमने, किताबें पढ़ने और क्रिकेट खेलने का शौक है।

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