Success Story: लाखों की छोड़ी नौकरी, 4 बार UPSC में फेल होने पर नहीं मानी हार; फिर बनीं IAS
एक कहानी है काजल जावला की, जिनके लिए आईएएस बनना आसान नहीं था। इसके लिए उन्होंने कई साल मेहनत की, नौकरी के साथ पढ़ाई की और कई बार असफलताओं का सामना किया। चलिए जानते हैं कि कौन है काजल जावला।

आईएएस बनने के सपने को साकार करने के लिए हर साल लाखों उम्मीदवार यूपीएससी की परीक्षा देते हैं। हालांकि इनमें से कुछ ही लोग आईएएस के लिए चुना जाता है। आईएएस बनना आसान नहीं होता है। हालांकि कोई पहले ही प्रयास में बन जाता है और किसी को 5 से 6 या उससे ज्यादा प्रयास करने पड़ते हैं। लेकिन अगर मजबूत इरादा हो और ईमानदारी से पूरी तरह से मेहनत की जाए, तो कुछ भी आसान नहीं होता है। एक ऐसी ही कहानी है काजल जावला की, जिनके लिए आईएएस बनना आसान नहीं था। इसके लिए उन्होंने कई साल मेहनत की, नौकरी के साथ पढ़ाई की और कई बार असफलताओं का सामना किया। चलिए जानते हैं कि कौन है काजल जावला।
मेरठ की रहने वाली हैं काजल जावला
काजल मूल रूप से मेरठ की रहने वाली हैं। बचपन में उनका सपना डॉक्टर बनने का था, लेकिन बाद में उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। ग्रेजुएशन के बाद काजल ने गुरुग्राम की कई मल्टीनेशनल कंपनियों में नौकरी की और अच्छा वेतन भी कमाया। देखने में उनकी जिंदगी पूरी तरह से सेट थी, लेकिन उन्हें महसूस हुआ कि वह कुछ बड़ा और समाज के लिए बेहतर करना चाहती हैं। अपने पिता से प्रेरित होकर काजल ने फुल-टाइम नौकरी करते हुए ही UPSC सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी।
23 लाख की छोड़ी नौकरी
काजल ने पढ़ाई पूरी होने के बाद एक कंपनी में अच्छे सैलरी पैकेज पर नौकरी मिल गई थी। एक मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि उनकी सैलरी करीब 23 लाख रुपये सालाना थी। हालांकि, उनके पिता चाहते थे कि बेटी सिविल सर्विस एग्जाम की तैयारी करे और देश की सेवा करे। पिता के इस सपने को पूरा करने के लिए 2014 में यूपीएससी की तैयारी शुरू कर दी।
जॉब के साथ-साथ यूपीएससी की तैयारी
नौकरी करने के दौरान ही काजल की शादी भी हो गई थी लेकिन वह यूपीएससी के लक्ष्य के लिए आगे बढ़ती रहीं। शादी के बाद उन्हें अपने पति का भी साथ मिला। 9 घंटे की जॉब की के साथ उन्होंने तैयारी बैलेंस की। उनके घर से ऑफिस (दिल्ली से गुरुग्राम) तक जाने में लगभग 2 घंटा लग जाता था। ऐसे में समय बचाने के लिए वह कैब से आते-जाते समय रास्ते में पढ़ाई करती थीं। वीकेंड पर पढ़ाई के लिए ज्यादा समय देती थीं और इस दौरान पति और उनके पिता मोटिवेट करते थे।
शुरुआती प्रयासों में मिली असफलता
काजल जावला अपने शुरुआती प्रयासों में UPSC परीक्षा पास नहीं कर सकीं। उन्हें लगातार चार बार असफलता मिली। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। हर प्रयास के बाद अपनी प्लानिंग में सुधार किया, उत्तर लेखन (Answer Writing) पर काम किया, सिलेबस को बेहतर तरीके से समझा और अपनी गलतियों से सीख ली।
5वें प्रयास में मेहनत लाई रंग
आखिरकार उनकी मेहनत आखिरकार रंग लाई। पांचवें प्रयास में उन्होंने UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2018 में ऑल इंडिया रैंक (AIR) 28 हासिल की। आज काजल जावला मध्य प्रदेश कैडर की IAS अधिकारी हैं। उनका सफर सिर्फ सफलता की कहानी नहीं है, बल्कि यह बताता है कि मंजिल तक पहुंचने के लिए लगातार मेहनत, धैर्य और हार न मानने का जज्बा कितना जरूरी होता है। काजल की कहानी यह सिखाती है कि सफलता का मतलब कभी असफल न होना नहीं है, बल्कि बार-बार असफल होने के बाद भी अपने लक्ष्य के लिए डटे रहना है।
लेखक के बारे में
Dheeraj Palसंक्षिप्त विवरण:
धीरज पाल को पत्रकारिता के क्षेत्र में 7 साल का अनुभव है। लाइव हिन्दुस्तान में काम करते हुए इन्हें 4 साल हो गए हैं। धीरज एजुकेशन रिपोर्टर के तौर पर काम कर चुके हैं। अपने करियर के दौरान धीरज ने राजनीति समाचार, एजुकेशन बीट के लिए ग्राउंड रिपोर्टिंग भी की है।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि
धीरज ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बीए इन मीडिया स्टडीज और राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय प्रयागराज से जनसंचार एवं पत्रकारिता से परास्नातक की पढ़ाई की। धीरज पाल ने अपने पत्रकारिता कर की शुरुआत एपीएन न्यूज चैनल से की। इसके बाद उन्होंने लोकमत न्यूज हिंदी और एनडीटीवी जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया। हिंदुस्तान लाइव में यूपी बोर्ड से लेकर उन्होंने लोकसभा चुनाव कवर करने साथ-साथ खेल जैसे बीट पर काम किया। अब इनका एकमात्र उद्देश्य करियर और एजुकेशन से जुड़ी रुचिगत, सरल, प्रमाणिक और पाठक-हितैषी रूप में प्रस्तुत करना है।
व्यक्तिगत रुचियां
उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के निवासी धीरज पाल को पत्रकारिता और ज्योतिषीय अध्ययन के साथ-साथ घूमने, किताबें पढ़ने और क्रिकेट खेलने का शौक है।
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