Success Story: दिन में चलाया ई-रिक्शा, रात में तैयारी कर क्रैक किया NEET; मिले थे इतने अंक
उत्तर प्रदेश के मुजफ्फर नगर के एक छोटे से कस्बे के रहने वाले मोहम्मद सुहेल की कहानी किसी फिल्म से कम नहीं है। सुहेल के परिवार की माली हालत बेहद कमजोर थी।

हाल ही में नीट यूजी री-एग्जाम आयोजित हुआ, जिसमें दुनियाभर से लाखों बच्चों ने एग्जाम दिए और अब रिजल्ट का इंतजार कर रहे हैं। नीट दुनिया की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक मानी जाती है। इसे क्रैक करने के लिए छात्र दिन-रात पढ़ाई करते हैं। ज्यादातर छात्र इसे क्रैक करने के लिए टॉप कोचिंग इंस्टीट्यूट, महंगी किताबों का सहारा लेते हैं। लेकिन कुछ छात्र ऐसे होते हैं, जिनके लिए ये सब अफोर्ड कर पाना मुमकिन नहीं हो पाता है। इन्हीं में से कुछ छात्र ऐसे होते हैं, जो अपनी मेहनत और जुनून के दम पर इन सुविधाओं के बिना ही नीट जैसी परीक्षा क्रैक कर लेते हैं। ऐसे छात्रों के सामने गरीबी और तंगहाली भी घुटने टेक देती हैं। ऐसी है एक कहानी है मोहम्मद सुहेल की।
कौन है मोहम्मद सुहैल
उत्तर प्रदेश के मुजफ्फर नगर के एक छोटे से कस्बे के रहने वाले मोहम्मद सुहेल की कहानी किसी फिल्म से कम नहीं है। सुहेल के परिवार की माली हालत बेहद कमजोर थी। शाम का चूल्हा जलाने के लिए सुहेल के पिता रिक्शा चलाया करते थे। वहीं, सुहेल ने पिता का हाथ बंटाने के लिए नोएडा और मुजफ्फरनगर की सड़कों पर ई-रिक्शा चलाया, जिससे घर में रोजाना 300-500 रुपये की मदद हो सके।
यूपी बोर्ड से पढ़ाई
सुहेल ने यूपी बोर्ड के सरकारी स्कूल से 12वीं तक पढ़ाई की। उनकी मां चाहती थीं कि उनका बेटा पढ़-लिखकर डॉक्टर बने। हालांकि लाखों रुपये की कोचिंग फीस दे पाना आसान नहीं था।
शुरुआत में उन्हें NEET परीक्षा के बारे में जानकारी नहीं थी। एक दोस्त ने बताया कि इस परीक्षा के जरिए कम खर्च में सरकारी मेडिकल कॉलेज में MBBS की पढ़ाई की जा सकती है। इसके बाद उन्होंने पूरी मेहनत से तैयारी शुरू कर दी।
सस्ती कोचिंग और स्कॉलरशिप से मिली मदद
सुहैल ने PhysicsWallah के ऑनलाइन बैच से तैयारी की, जिसकी फीस करीब 3000 से 4000 रुपये थी। इंडिया टूडे में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक पहले प्रयास में उन्हें 369 अंक मिले। तीसरे प्रयास में उनका स्कोर बढ़कर 609 अंक हो गया। जब वह उम्मीद छोड़ने वाले थे, तब मेरठ के PW विद्यापीठ ने उन्हें फ्री एडमिशन, पढ़ाई और पूरी गाइडेंस दी। यहां नियमित टेस्ट और विशेष बैचों ने उनकी तैयारी को मजबूत बनाया।
पढ़ाई के लिए अलग कमरा भी नहीं था
सुहैल के घर में पढ़ाई के लिए अलग जगह नहीं थी। उनके एक शिक्षक हाशिर सर ने उन्हें शांत माहौल में पढ़ाई करने के लिए अपना कमरा भी दिया। एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि "मैं समय नहीं, अपने लक्ष्य पर ध्यान देता था। काम पूरा करना ही मेरी प्राथमिकता थी।" उनके भाई ने भी अपनी पढ़ाई छोड़कर नौकरी शुरू कर दी, ताकि सुहैल की पढ़ाई जारी रह सके। परिवार के इस त्याग ने उन्हें और मेहनत करने के लिए प्रेरित किया।
रिजल्ट आने पर पूरे परिवार में खुशी
रिजल्ट के समय सुहैल अपनी दादी के घर पर थे। जैसे ही 609 अंक मिलने की खबर मिली, पूरा परिवार खुशी से झूम उठा। लोग उन्हें गले लगाने लगे और जश्न मनाने लगे।
सरकारी मेडिकल कॉलेज में MBBS की तैयारी
सुहैल की NEET रैंक करीब 11,000 है। उनका कहना है कि इससे उन्हें एक अच्छे सरकारी मेडिकल कॉलेज में सीट मिलने की उम्मीद है। आगे चलकर वह सर्जन बनना चाहते हैं और चिकित्सा के क्षेत्र में अपना करियर बनाना चाहते हैं।
लेखक के बारे में
Dheeraj Palसंक्षिप्त विवरण:
धीरज पाल को पत्रकारिता के क्षेत्र में 7 साल का अनुभव है। लाइव हिन्दुस्तान में काम करते हुए इन्हें 4 साल हो गए हैं। धीरज एजुकेशन रिपोर्टर के तौर पर काम कर चुके हैं। अपने करियर के दौरान धीरज ने राजनीति समाचार, एजुकेशन बीट के लिए ग्राउंड रिपोर्टिंग भी की है।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि
धीरज ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बीए इन मीडिया स्टडीज और राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय प्रयागराज से जनसंचार एवं पत्रकारिता से परास्नातक की पढ़ाई की। धीरज पाल ने अपने पत्रकारिता कर की शुरुआत एपीएन न्यूज चैनल से की। इसके बाद उन्होंने लोकमत न्यूज हिंदी और एनडीटीवी जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया। हिंदुस्तान लाइव में यूपी बोर्ड से लेकर उन्होंने लोकसभा चुनाव कवर करने साथ-साथ खेल जैसे बीट पर काम किया। अब इनका एकमात्र उद्देश्य करियर और एजुकेशन से जुड़ी रुचिगत, सरल, प्रमाणिक और पाठक-हितैषी रूप में प्रस्तुत करना है।
व्यक्तिगत रुचियां
उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के निवासी धीरज पाल को पत्रकारिता और ज्योतिषीय अध्ययन के साथ-साथ घूमने, किताबें पढ़ने और क्रिकेट खेलने का शौक है।
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