सक्सेस स्टोरी: पिता किसान, बेटी बिना कोचिंग लगातार 2 बार BPSC किया क्रैक; LEO से बनीं SDM
मजूबत इरादों की बदौलत ही स्मृति भारद्वाज ने ना सिर्फ एक बार बल्कि लगातार 2 बार बीपीएससी परीक्षा पास करके अपनी मेहनत का लोहा मनवाया। यानी स्मृति को पहले बीपीएससी 69वीं में सफलता मिली फिर हाल ही में घोषित BPSC 70वीं परीक्षा में उन्होंने 160वीं रैंक हासिल की है और उनका चयन SDM पद के लिए हुआ है।

हाल ही में बीपीएससी 70वीं का अंतिम परिणाम जारी हुआ है, जिसमें कुल 200 उम्मीदवार एसडीएम (SDM) बने हैं। इन्हीं में से एक हैं स्मृति भारद्वाज। कहते हैं कि अगर इरादे मजबूत हैं, तो सफलता मिल ही जाती है। मजूबत इरादों की बदौलत ही स्मृति भारद्वाज ने ना सिर्फ एक बार बल्कि लगातार 2 बार बीपीएससी परीक्षा पास करके अपनी मेहनत का लोहा मनवाया। यानी स्मृति को पहले बीपीएससी 69वीं में सफलता मिली फिर हाल ही में घोषित BPSC 70वीं परीक्षा में उन्होंने 160वीं रैंक हासिल की है और उनका चयन SDM पद के लिए हुआ है। हालांकि यहां तक पहुंचने का सफर उनका आसान नहीं था। इसके पीछे उनकी लगन और मेहनत है। चलिए इनके बारे में जानते हैं।
फैमिली बैकग्राउंड
स्मृति भारद्वाज मूल रूप से समस्तीपुर जिले के वारिसनगर प्रखंड अंतर्गत गोही गांव की निवासी हैं। वो एक साधारण परिवार से हैं। उनके पिता किसान हैं, जबकि मां शिक्षिका हैं।
पढ़ाई-लिखाई
परिवार में पढ़ाई का माहौल था, लेकिन उनकी सफलता का सबसे बड़ा आधार मेहनत, लगन और आत्मविश्वास रहा। स्मृति ने 2022 में ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय से अंग्रेजी साहित्य में ग्रेजुएशन पूरा किया। डिग्री हासिल करने के बाद उन्होंने BPSC परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी।
पहले प्रयास में मिली असफलता
स्मृति के लिए सफलता का सफर आसान नहीं था। पहले प्रयास में उन्हें असफलता मिली, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। अपनी गलतियों से सीख लेकर उन्होंने तैयारी की रणनीति में बदलाव किया और BPSC 69वीं परीक्षा में सफलता हासिल कर ली। वो अलीनगर प्रखंड में पदस्थापित श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी बनी। इसके बाद भी स्मृति नहीं रुकीं। उन्होंने और बेहतर तैयारी की और अगले प्रयास में 160वीं रैंक हासिल करते हुए SDM पद के लिए चयनित हो गईं।
बिना कोचिंग के मिली सफलता
आज के समय में ज्यादातर अभ्यर्थी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए कोचिंग का सहारा लेते हैं, लेकिन स्मृति भारद्वाज ने बिना नियमित कोचिंग के ही यह सफलता हासिल की। उन्होंने किसी बड़े कोचिंग संस्थान से तैयारी नहीं की। एक इंटरव्यू में स्मृति ने बताया कि उन्होंने केवल 10 से 15 दिन की एक वर्कशॉप में हिस्सा लिया था, जबकि बाकी पूरी तैयारी उन्होंने खुद के दम पर की।
सोशल मीडिया पर एक्टिव
स्मृति भारद्वाज सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय रहती हैं। उनके इंस्टाग्राम बायो में लिखा है कि पढ़ाई के साथ-साथ उनकी रुचि फैशन और मधुबनी पेंटिंग में भी है। वह अक्सर अपनी तैयारी, संघर्ष और सफलता से जुड़े अनुभव साझा करती हैं। अपनी कामयाबी की जानकारी भी उन्होंने इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट के जरिए दी।
लेखक के बारे में
Dheeraj Palसंक्षिप्त विवरण:
धीरज पाल को पत्रकारिता के क्षेत्र में 7 साल का अनुभव है। लाइव हिन्दुस्तान में काम करते हुए इन्हें 4 साल हो गए हैं। धीरज एजुकेशन रिपोर्टर के तौर पर काम कर चुके हैं। अपने करियर के दौरान धीरज ने राजनीति समाचार, एजुकेशन बीट के लिए ग्राउंड रिपोर्टिंग भी की है।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि
धीरज ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बीए इन मीडिया स्टडीज और राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय प्रयागराज से जनसंचार एवं पत्रकारिता से परास्नातक की पढ़ाई की। धीरज पाल ने अपने पत्रकारिता कर की शुरुआत एपीएन न्यूज चैनल से की। इसके बाद उन्होंने लोकमत न्यूज हिंदी और एनडीटीवी जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया। हिंदुस्तान लाइव में यूपी बोर्ड से लेकर उन्होंने लोकसभा चुनाव कवर करने साथ-साथ खेल जैसे बीट पर काम किया। अब इनका एकमात्र उद्देश्य करियर और एजुकेशन से जुड़ी रुचिगत, सरल, प्रमाणिक और पाठक-हितैषी रूप में प्रस्तुत करना है।
व्यक्तिगत रुचियां
उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के निवासी धीरज पाल को पत्रकारिता और ज्योतिषीय अध्ययन के साथ-साथ घूमने, किताबें पढ़ने और क्रिकेट खेलने का शौक है।
व्यक्तिगत रुचियां
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