Success Story: 105 की उम्र में फिर उठाईं किताबें, मैथ में आए 100 अंक; प्रेरणादायक है भागीरथी अम्मा की कहानी

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उम्र के जिस पड़ाव पर ज्यादातर लोग अपनी पढ़ाई और किताबों या फिर जीवन को भी पीछे छोड़ चुके होते हैं, उसी उम्र में भागीरथी अम्मा ने एक बार फिर स्कूल की किताबें उठा लीं।

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भागीरथी अम्मा की सक्सेस स्टोरी

Bhageerathi Amma Success Story: उम्र के जिस पड़ाव पर ज्यादातर लोग अपनी पढ़ाई और किताबों या फिर जीवन को भी पीछे छोड़ चुके होते हैं, उसी उम्र में भागीरथी अम्मा ने एक बार फिर स्कूल की किताबें उठा लीं। उम्र थी 105 साल और वो उन्होंने पढ़ाई का पूरा मन बना लिया था। क्योंकि उनकी पढ़ाई करने की काफी तमन्ना थी। फिर क्या था इसी उम्र में उन्होंने न सिर्फ पढ़ाई शुरू की, बल्कि कक्षा 4 की समकक्ष परीक्षा भी पास की। उन्होंने कुल 75 प्रतिशत अंक हासिल किए और गणित में पूरे 100 अंक प्राप्त किए। उनकी यह उपलब्धि उन लाखों लोगों के लिए प्रेरणा बन गई, जिनकी पढ़ाई या सपने किसी वजह से बीच में छूट जाते हैं। आज सक्सेस स्टोरी में बात भागीरथी अम्मा की।

कौन हैं भागीरथी अम्मा

केरल के कोल्लम स्थित प्रक्कुलम की रहने वाली भागीरथी अम्मा की पढ़ाई बचपन में ही छूट गई थी। उनकी मां के निधन के बाद छोटे भाई-बहनों की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई। कम उम्र में ही उन्हें परिवार संभालना पड़ा। इसके बाद उनकी शादी भी जल्दी हो गई। 30 की उम्र में पति के निधन के बाद उनके सामने छह बच्चों की परवरिश की जिम्मेदारी आ गई। ऐसे में पढ़ाई का सपना कहीं पीछे छूट गया। कई दशकों तक शिक्षा उनके लिए एक ऐसी इच्छा बनी रही, जिसे वह चाहकर भी पूरा नहीं कर सकीं।

105 साल की उम्र में दोबारा शुरू की पढ़ाई

लेकिन समय बीतता गया, लेकिन पढ़ने की इच्छा उनके मन में बनी रही। आखिरकार केरल राज्य साक्षरता मिशन के कार्यक्रम ने उन्हें दोबारा पढ़ाई करने का मौका दिया। साल 2019 में 105 साल की उम्र में भागीरथी अम्मा ने कक्षा 4 की समकक्ष परीक्षा देने का फैसला किया। उन्होंने एक नजवान स्टूडेंट की तरह पूरी लगन और गंभीरता से परीक्षा दी। नतीजा आया तो उन्होंने 75 प्रतिशत अंक हासिल किए। सबसे खास बात यह रही कि गणित में उन्हें पूरे 100 अंक मिले।

प्रधानमंत्री मोदी ने भी किया जिक्र

भागीरथी अम्मा की कहानी तब चर्चा में खूब आई, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फरवरी 2020 में अपने रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में उनकी उपलब्धि का जिक्र किया। प्रधानमंत्री ने बताया कि परिवार की जिम्मेदारियों के कारण भागीरथी अम्मा को बचपन में पढ़ाई छोड़नी पड़ी थी। इसके बावजूद 105 साल की उम्र में उन्होंने दोबारा पढ़ाई शुरू की और परीक्षा पास की। उन्होंने भागीरथी अम्मा को प्रेरणा बताते हुए सीखने की इच्छा को हमेशा जिंदा रखने की बात कही।

हालांकि, परीक्षा पास करना उनके लिए मंजिल नहीं था। वह आगे भी पढ़ाई जारी रखना चाहती थीं। उनकी इच्छा सातवीं कक्षा के स्तर की समकक्ष परीक्षा पास करने और आगे चलकर 10वीं की परीक्षा देने की थी।

2020 में मिला नारी शक्ति पुरस्कार

भागीरथी अम्मा की उपलब्धि को देखते हुए साल 2020 में उन्हें ‘नारी शक्ति पुरस्कार’ के लिए चुना गया। यह सम्मान अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर दिया जाना था। लेकिन अधिक उम्र की वजह से वो दिल्ली नहीं जा सकीं। इसलिए उनकी ओर से किसी अन्य व्यक्ति को पुरस्कार लेने की अनुमति दी गई।

107 साल की उम्र में हुआ निधन

भागीरथी अम्मा का जुलाई 2021 में 107 साल की उम्र में उनके कोल्लम स्थित घर पर निधन हो गया। उनके निधन के साथ उनकी पढ़ाई की आगे की जर्नी भले ही पूरी नहीं हो सकी, लेकिन उनकी कहानी अधूरी नहीं रही।

Dheeraj Pal

लेखक के बारे में

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संक्षिप्त विवरण: धीरज पाल को पत्रकारिता के क्षेत्र में 7 साल का अनुभव है। लाइव हिन्दुस्तान में काम करते हुए इन्हें 4 साल हो गए हैं। धीरज एजुकेशन रिपोर्टर के तौर पर काम कर चुके हैं। अपने करियर के दौरान धीरज ने राजनीति समाचार, एजुकेशन बीट के लिए ग्राउंड रिपोर्टिंग भी की है।

शैक्षणिक पृष्ठभूमि
धीरज ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बीए इन मीडिया स्टडीज और राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय प्रयागराज से जनसंचार एवं पत्रकारिता से परास्नातक की पढ़ाई की। धीरज पाल ने अपने पत्रकारिता कर की शुरुआत एपीएन न्यूज चैनल से की। इसके बाद उन्होंने लोकमत न्यूज हिंदी और एनडीटीवी जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया। हिंदुस्तान लाइव में यूपी बोर्ड से लेकर उन्होंने लोकसभा चुनाव कवर करने साथ-साथ खेल जैसे बीट पर काम किया। अब इनका एकमात्र उद्देश्य करियर और एजुकेशन से जुड़ी रुचिगत, सरल, प्रमाणिक और पाठक-हितैषी रूप में प्रस्तुत करना है।

व्यक्तिगत रुचियां
उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के निवासी धीरज पाल को पत्रकारिता और ज्योतिषीय अध्ययन के साथ-साथ घूमने, किताबें पढ़ने और क्रिकेट खेलने का शौक है।

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