Success Story: 12 साल की उम्र में मां को खोया, 3 बार फेल होने पर नहीं मानी हार; BPSC क्रैक कर बनीं SDM
बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) ने हाल ही में 70वीं संयुक्त प्रतियोगी परीक्षा का रिजल्ट जारी किया था। इसमें कई ऐसे उम्मीदवार थे जो एसडीएम बने हैं। इन्हीं में एक है अंकिता कुमारी। उन्होंने 70वीं BPSC परीक्षा में 272वीं रैंक हासिल की और SDM बनीं

बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) ने हाल ही में 70वीं संयुक्त प्रतियोगी परीक्षा का रिजल्ट जारी किया था। इसमें कई ऐसे उम्मीदवार थे जो एसडीएम बने हैं। इन्हीं में एक है अंकिता कुमारी। उन्होंने 70वीं BPSC परीक्षा में 272वीं रैंक हासिल की और SDM बनीं। यह सफलता सिर्फ एक परीक्षा पास करने की नहीं, बल्कि अपनी मां का सपना पूरा करने की थी, जो उन्होंने देखा था। यहां तक पहुंचना आसान नहीं था। चलिए उनकी कहानी जानते हैं।
कौन है अंकिता कुमारी
बिहार के छपरा की रहने वाली अंकिता कुमारी की सफलता की कहानी संघर्ष, धैर्य और दृढ़ संकल्प की मिसाल है। उनकी मां का सपना था कि बेटी एक दिन अफसर बने। लेकिन जब अंकिता महज 12 साल की थीं, तभी उनकी मां का निधन हो गया। इस गहरे सदमे और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बावजूद उन्होंने अपने सपने को टूटने नहीं दिया। BPSC परीक्षा में लगातार तीन बार असफल होने के बाद भी अंकिता ने हार नहीं मानी। चौथे प्रयास में उन्होंने सफलता हासिल की और SDM बनकर अपनी मां का सपना साकार कर दिखाया। उनकी यह कहानी उन सभी लोगों के लिए प्रेरणा है, जो जीवन की कठिन परिस्थितियों के बावजूद अपने लक्ष्य को पाने के लिए लगातार संघर्ष कर रहे हैं।
कहां से की है पढ़ाई
बिहार के सारण जिले से आने वाली अंकिता ने अपनी स्कूल की शिक्षा सरस्वती शिशु विद्या मंदिर, छपरा से पूरी की है। वह एक साधारण परिवार से आती हैं। उनकी मां हमेशा चाहती थीं कि उनकी बेटी अधिकारी बने। एनबीटी में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक अंकिता की शुरुआती पढ़ाई राजेंद्र कॉज से इंटर की पढ़ाई और पटना विमेंस कॉलेज से ग्रेजुएशन किया, जहां वह यूनिवर्सिटी टॉपर रहीं। इसके बाद उन्होंने पटना यूनिवर्सिटी से मास्टर्स की डिग्री हासिल की।
3 बार यूजीसी नेट क्वालिफाई किया
खबरों के मुताबिक अंकिता कुमारी ने 3 बार UGC नेट एग्जाम भी पास किया। इसके बाद उन्होंने अपने अधिकारी बनने के लक्ष्य की ओर बढ़ना शुरू कर दिया।
3 बार रहीं असफल
अंकिता ने साल 2022 में बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) परीक्षा की तैयारी शुरू की। अफसर बनने का उनका सफर आसान नहीं था। शुरुआती तीन प्रयासों में वह प्रारंभिक परीक्षा (Prelims) भी पास नहीं कर सकीं। लगातार मिली असफलताओं ने उन्हें मानसिक रूप से काफी परेशान किया और कई बार उन्हें लगा कि शायद वह अपनी मां का सपना कभी पूरा नहीं कर पाएंगी। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। परिवार ने हर मुश्किल दौर में उनका साथ दिया, उनका हौसला बढ़ाया और आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। परिवार के इसी समर्थन और अपने दृढ़ संकल्प के दम पर अंकिता ने तैयारी जारी रखी और आखिरकार अपने लक्ष्य को हासिल कर लिया।
चौथे प्रयास में बनीं एसडीएम
BPSC के अपने चौथे प्रयास में उन्होंने खूब मेहनत की थी। आत्मविश्वास और लगन के साथ तैयारी करके उन्होंने पहले प्रीलिम्स परीक्षा पास की। इसके बाद मेन्स और इंटरव्यू दिया। लगातार मेहनत और असफलताओं से सीखकर उन्होंने 70वीं BPSC परीक्षा में 272वीं रैंक हासिल की और SDM बनीं। यह सफलता सिर्फ एक परीक्षा पास करने की नहीं, बल्कि अपनी मां का सपना पूरा करने की थी, जो उन्होंने देखा था।
लेखक के बारे में
Dheeraj Palसंक्षिप्त विवरण:
धीरज पाल को पत्रकारिता के क्षेत्र में 7 साल का अनुभव है। लाइव हिन्दुस्तान में काम करते हुए इन्हें 4 साल हो गए हैं। धीरज एजुकेशन रिपोर्टर के तौर पर काम कर चुके हैं। अपने करियर के दौरान धीरज ने राजनीति समाचार, एजुकेशन बीट के लिए ग्राउंड रिपोर्टिंग भी की है।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि
धीरज ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बीए इन मीडिया स्टडीज और राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय प्रयागराज से जनसंचार एवं पत्रकारिता से परास्नातक की पढ़ाई की। धीरज पाल ने अपने पत्रकारिता कर की शुरुआत एपीएन न्यूज चैनल से की। इसके बाद उन्होंने लोकमत न्यूज हिंदी और एनडीटीवी जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया। हिंदुस्तान लाइव में यूपी बोर्ड से लेकर उन्होंने लोकसभा चुनाव कवर करने साथ-साथ खेल जैसे बीट पर काम किया। अब इनका एकमात्र उद्देश्य करियर और एजुकेशन से जुड़ी रुचिगत, सरल, प्रमाणिक और पाठक-हितैषी रूप में प्रस्तुत करना है।
व्यक्तिगत रुचियां
उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के निवासी धीरज पाल को पत्रकारिता और ज्योतिषीय अध्ययन के साथ-साथ घूमने, किताबें पढ़ने और क्रिकेट खेलने का शौक है।
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