Success Story: सिक्योरिटी गार्ड से सॉफ्टवेयर इंजीनियर बने अब्दुल अलीम, बिना डिग्री ऐसे बनाया करियर

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भारत में लाखों छात्रों का सपना होता है कि वे 12वीं में अच्छे अंक लाएं, प्रवेश परीक्षा पास करें, बीटेक करें और सॉफ्टवेयर इंजीनियर बनें। छात्र इंजीनियरिंग कॉलेज में दाखिला पाने के लिए कड़ी मेहनत भी करते हैं। लेकिन कभी-कभी कुछ कहानियां यह दिखाती हैं कि सफलता पाने का सिर्फ एक ही रास्ता नहीं होता

सिक्योरिटी गार्ड से सॉफ्टवेयर इंजीनियर बने अब्दुल अलीम की कहानी

भारत में लाखों छात्रों का सपना होता है कि वे 12वीं में अच्छे अंक लाएं, प्रवेश परीक्षा पास करें, बीटेक करें और सॉफ्टवेयर इंजीनियर बनें। छात्र इंजीनियरिंग कॉलेज में दाखिला पाने के लिए कड़ी मेहनत भी करते हैं। लेकिन कभी-कभी कुछ कहानियां यह दिखाती हैं कि सफलता पाने का सिर्फ एक ही रास्ता नहीं होता। अब्दुल अलीम की कहानी भी ऐसी ही प्रेरणादायक मिसाल है। उन्होंने कॉलेज की पढ़ाई नहीं की और केवल 10वीं तक ही पढ़ें। इसके बावजूद आज वह Zoho Corporation में 12 साल से अधिक समय से मेंबर ऑफ टेक्निकल स्टाफ के पद पर काम कर रहे हैं। उनकी सफलता यह साबित करती है कि सही गाइडेंस, सीखने की इच्छा और हुनर कई बार डिग्री से भी ज्यादा मायने रखते हैं। हालांकि, जब उन्होंने 2013 में Zoho जॉइन किया था, तब वह इंजीनियर नहीं थे। उनकी पहली नौकरी सिक्योरिटी गार्ड की थी और वह कंपनी के गेट पर ड्यूटी करते थे। सिक्योरिटी गार्ड से सॉफ्टवेयर इंजीनियर तक सफर अब्दुल अलीम के लिए आसान नहं था।

10वीं के बाद घर छोड़ा

अब्दुल अलीम तमिलनाडु के रहने वाले हैं। 10वीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद अब्दुल अलीम ने काम की तलाश शुरू की। वो महज 1000 रुपये लेकर घर से बाहर निकल गए। कुछ साल पहले अलीम की सोशल मीडिया पर एक पोस्ट वायरल हुई, जिसमें उन्होंने अपनी जर्नी का जिक्र भी किया था। उनके मुताबिक 20213 में जब वो घर से 1000 रुपये लेकर निकले थे, तब चेन्नई पहुंचने पर उसमें 800 रुपये खर्च हो गए। नौकरी न होने के कारण दो माह सड़क पर बिताए। इसके बाद उसे जोहो कॉर्पोरेशन में सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी मिली।

कैसे बने सॉफ्टवेयर इंजीनियर

अलिम ने अपनी पोस्ट में बताया था कि स्कूली दिनों में उन्होंने थोड़ा बहुत एचटीएमएल सीखा था लेकिन कोई कॉलेज डिग्री न होने से अवसरों की संख्या सीमित थी। एक दिन जोहो में काम करने वाले वरिष्ठ अधिकारी शिबू की उन पर नजर पड़ी और उन्होंने कहा कि अलिम तुम में कुछ खास है। इसी दौरान मैंने अपनी पढ़ाई और कंप्यूटर की जानकारी उनके साथ साझा की। इसके बाद उन्होंने उससे पूछा कि क्या और सीखना चाहते हो? मैंने हां कर दी और उनके साथ आठ माह की ट्रेनिंग की और एक ऐप बनाने में सफल रहा। इससे वह बहुत खुश हुए। उन्होंने ने इसे अपने मैनेजर को दिखाया, उसे ऐप पसंद आया और मुझे तकनीकी कौशल के आधार पर वहां नौकरी मिल गई।

12 घंटे की ड्यूटी के बाद सीखी कोडिंग

अब्दुल अलीम के लिए यह सफर बिल्कुल आसान नहीं था। वह रोज 12 घंटे सिक्योरिटी गार्ड की ड्यूटी करने के बाद भी रुककर कोडिंग सीखते थे। उन्होंने न किसी इंजीनियरिंग कॉलेज में पढ़ाई की और न ही किसी कोचिंग या डिग्री प्रोग्राम का सहारा लिया। उनके पास सिर्फ सीखने की लगन, लगातार मेहनत और एक ऐसे मेंटर का साथ था, जिसने उन्हें सीखने का मौका दिया। कई महीनों की मेहनत के बाद उनका आत्मविश्वास बढ़ने लगा।

इंटरव्यू का मौका जिसने बदल दी जिंदगी

अब्दुल अलीम का बनाया हुआ एप्लिकेशन देखकर उनके सीनियर कर्मचारी काफी प्रभावित हुए। उन्होंने इसे अपने मैनेजर को दिखाया और अलीम को टेक्निकल पद के लिए इंटरव्यू देने का मौका दिलाया। अलीम ने बाद में बताया कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि उन्हें ऐसा मौका मिलेगा। उन्होंने कॉलेज की पढ़ाई नहीं की थी और उनके पास इंजीनियरिंग की डिग्री भी नहीं थी। उन्हें लगता था कि बिना डिग्री वह कभी सॉफ्टवेयर इंजीनियर नहीं बन पाएंगे।

सिक्योरिटी गार्ड से सॉफ्टवेयर इंजीनियर तक का सफर

साल 2014 में अब्दुल अलीम ने Zoho की तकनीकी टीम में इंजीनियरिंग ट्रेनी के रूप में काम शुरू किया। इसके बाद उन्होंने लगातार नई चीजें सीखीं, अपने कौशल को बेहतर बनाया और कंपनी के कई प्रोडक्ट्स के विकास में योगदान दिया। आज वह मेंबर ऑफ टेक्निकल स्टाफ के पद पर कार्यरत हैं और 10 साल से अधिक समय से उसी कंपनी में सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट का काम कर रहे हैं, जहां कभी वह सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी करते थे।

Dheeraj Pal

लेखक के बारे में

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संक्षिप्त विवरण: धीरज पाल को पत्रकारिता के क्षेत्र में 7 साल का अनुभव है। लाइव हिन्दुस्तान में काम करते हुए इन्हें 4 साल हो गए हैं। धीरज एजुकेशन रिपोर्टर के तौर पर काम कर चुके हैं। अपने करियर के दौरान धीरज ने राजनीति समाचार, एजुकेशन बीट के लिए ग्राउंड रिपोर्टिंग भी की है।

शैक्षणिक पृष्ठभूमि
धीरज ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बीए इन मीडिया स्टडीज और राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय प्रयागराज से जनसंचार एवं पत्रकारिता से परास्नातक की पढ़ाई की। धीरज पाल ने अपने पत्रकारिता कर की शुरुआत एपीएन न्यूज चैनल से की। इसके बाद उन्होंने लोकमत न्यूज हिंदी और एनडीटीवी जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया। हिंदुस्तान लाइव में यूपी बोर्ड से लेकर उन्होंने लोकसभा चुनाव कवर करने साथ-साथ खेल जैसे बीट पर काम किया। अब इनका एकमात्र उद्देश्य करियर और एजुकेशन से जुड़ी रुचिगत, सरल, प्रमाणिक और पाठक-हितैषी रूप में प्रस्तुत करना है।

व्यक्तिगत रुचियां
उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के निवासी धीरज पाल को पत्रकारिता और ज्योतिषीय अध्ययन के साथ-साथ घूमने, किताबें पढ़ने और क्रिकेट खेलने का शौक है।

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