
बिहार के 5000 छात्रों का कॉलेज से नाम कटने का खतरा, क्या है वजह
बिहार के 5000 छात्रों का कॉलेज से नाम कटने का खतरा है। 4 माह से विद्यार्थियों का शिक्षा ऋण अटका है। राज्य और राज्य के बाहर स्थित शिक्षण संस्थानों में ये विद्यार्थी पढ़ रहे हैं।
बिहार के पांच हजार से अधिक छात्र-छात्राओं की शिक्षा ऋण की राशि पिछले चार-पांच महीनों से लंबित है। इसके कारण राज्य तथा राज्य के बाहर स्थित शिक्षण संस्थानों में समय पर शुल्क जमा नहीं हो पा रहा है, जिससे इन विद्यार्थियों का नाम कटने का खतरा मंडरा रहा है। इन छात्र-छात्राओं को स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना के तहत चार लाख रुपये तक की शिक्षा ऋण राशि स्वीकृत की गई है। कुछ विद्यार्थियों की द्वितीय वर्ष तो कुछ की तृतीय वर्ष की फीस संबंधित शिक्षण संस्थानों को भेजी जानी है। यह राशि सरकार द्वारा राज्य शिक्षा वित्त निगम के माध्यम से स्वीकृत शिक्षण संस्थानों को भेजी जाती है। छात्र-छात्राओं की शिक्षा ऋण की राशि संस्थानों को नहीं जाने का कारण आवश्यक राशि का अभाव बताया जा रहा है।
शिक्षा विभाग ने इस मद में वित्त विभाग से मांगी राशि : शिक्षा विभाग के अनुसार इस मद में वित्त विभाग से राशि मांगी गई है। राशि मिलते ही संस्थानों को शिक्षा ऋण की राशि चली जाएगी। द्वितीय अनुपूरक बजट के तहत शिक्षा विभाग की विभिन्न योजनाओं के लिए 10 हजार करोड़ की राशि स्वीकृत है, पर वित्त विभाग ने अभी तक राशि जारी नहीं हो सकी है।
क्या है योजना
मान्यता प्राप्त सरकारी और निजी संस्थानों में नामांकित बिहार के छात्र-छात्राओं को कॉलेज फीस के लिए शिक्षा ऋण दिया जाता है। शिक्षण शुल्क, लैपटॉप और हॉस्टल में रहने का खर्च सहित अधिकतम चार लाख रुपये ऋण देने का प्रावधान है। पहले छात्रों को चार प्रतिशत ब्याज और छात्राओं, ट्रांसजेंडर और दिव्यांग छात्र-छात्राओं को एक प्रतिशत ब्याज पर ऋण देने का प्रावधान था। लेकिन विधानसभा चुनाव के पहले सरकार ने शिक्षा ऋण को ब्याजमुक्त कर दिया है।
अभिभावक को कर्ज लेकर भरनी पड़ी संस्थान की फीस
बिरला प्रौद्योगिकी संस्थान मेसरा (बीआईटी) पटना में बीटेक छठे सेमेस्टर की छात्रा इलिका की भी राशि संस्थान को नहीं मिली है। संस्थान से लगातार नोटिस के बाद इनके अभिभावक को मंहगे कर्ज पर राशि लेकर फीस जमा करना पड़ा। राशि मिलने के लिए ये लगातार चक्कर लगा रहे हैं, ताकि कर्ज लौटाया जा सके।
कागजी प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी नहीं भेजी राशि
प्रगति सिन्हा मणिपाल डीम्ड विश्वविद्यालय में आईटी अंतिम वर्ष की छात्रा हैं। स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना से चार लाख रुपये एक साथ ही संस्थान की फीस राशि भेजी जानी है। सारी कागजी प्रक्रिया पूरी भी हो चुकी है। लेकिन अभी तक संस्थान को राशि नहीं भेजी जा सकी है। संस्थान से इन्हें लगातार नोटिस भी मिल रही है।
चार लाख से अधिक छात्रों को 8 हजार करोड़ से अधिक शिक्षा ऋण
राज्य के छात्र-छात्राओं को उच्च शिक्षा की पढ़ाई के लिए शिक्षा ऋण देने की योजना 2 अक्टूबर 2016 में शुरू हुई थी। शुरुआत में राज्य सरकार गारंटर बन कर बैंकों के माध्यम से छात्र-छात्राओं को शिक्षा ऋण दिलाती थी। लेकिन बैंकों से शिक्षा ऋण मिलने में आनाकानी और परेशानी के बाद राज्य सरकार ने शिक्षा वित्त निगम बना कर शिक्षा ऋण देना तय किया। 27 मार्च 2018 के बाद शिक्षा वित्त निगम से छात्र-छात्राओं को शिक्षा ऋण दिया जा रहा है। अब तक चार लाख चार हजार 167 छात्र-छात्राओं को आठ हजार 149 करोड़ 56 लाख रुपए की राशि दी गई है।





