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11 जुलाई, 2020|12:28|IST

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बायोकेयर योजना से विज्ञान में महिलाओं की हिस्सेदारी बढ़ेगी

केंद्र सरकार के नौ महकमे पूरी तरह से विज्ञान से संबंधित हैं। हालांकि, इनमें से सिर्फ एक ‘जैव प्रौद्यौगिकी विभाग’ की कमान महिला वैज्ञानिक के हाथों में है। बतौर सचिव जैव प्रौद्यौगिकी विभाग की बागडोर संभाल रही हैं डॉ. रेनु स्वरूप। शुक्रवार को राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के मौके पर विज्ञान में महिलाओं की मौजूदा हिस्सेदारी और भावी चुनौतियों को लेकर उनसे मदन जैड़ा की बातचीत-

- महिलाएं आज लड़ाकू विमान उड़ा रही हैं, सेना में स्थाई कमीशन दिया जा रहा है लेकिन वे विज्ञान में पीछे क्यों हैं?
विज्ञान में महिलाएं कम हैं, यह सही बात है लेकिन स्थिति बहुत खराब नहीं है। आंकड़े बता रहे हैं कि महिलाओं की हिस्सेदारी लगातार बढ़ रही है। यह जरूर है कि विज्ञान की किसी विधा में वे ज्यादा संख्या में हैं तो किसी में कम। जैसे जैव प्रौद्यौगिकी विभाग की बात करें तो इसमें महिलाओं की हिस्सेदारी 35 से 40 फीसदी तक है लेकिन इंजीनियरिंग एवं टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में उनकी संख्या कम है। मेरे विचार से इसकी मुख्य वजह पारिवारिक कारणों से महिलाओं के करियर में अवरोध आ जाना है। वे फिर से करियर शुरू करती हैं लेकिन अक्सर छोड़ भी देती हैं।

- जो महिला वैज्ञानिक विवाह-बच्चों के चलते करियर बीच में छोड़ती हैं, उनके लिए आपके पास क्या योजना है?
ऐसी महिलाओं के लिए कुछ योजनाएं शुरू की गई हैं। हमने बायोकेयर योजना का आगाज किया है तो दूसरे विभाग डीएसटी ने किरण योजना लॉन्च की है। बायोकेयर योजना के तहत हम शादी-बच्चों के चलते बीच में करियर छोड़ने वाली महिलाओं को शोध प्रोजेक्ट देते हैं, ताकि वे विज्ञान की दुनिया में फिर से सक्रिय हो सकें। इससे उन महिला वैज्ञानिकों को फिर से शोध कार्य में आने के मौके मिले हैं, जो पारिवारिक कारणों से पिछड़ चुकी थीं। उनके करियर में सात-आठ साल का ब्रेक लग चुका था। अकेले हमारे विभाग के प्रयासों से 400 से भी ज्यादा महिलाएं विज्ञान क्षेत्र में फिर आगे आई हैं।

- विकसित देशों में और हमारे देश में विज्ञान में महिलाओं की हिस्सेदारी में क्या फर्क दिखता है?
देखिए, कुछ देशों को छोड़ दिया जाए तो करीब-करीब एक जैसी स्थिति है। हमारे पास अभी सटीक आंकड़े नहीं हैं क्योंकि विज्ञान में महिलाओं की हिस्सेदारी के आंकड़े पांच-छह साल पहले इकट्ठे किए गए थे। मोटे तौर पर भारत में विज्ञान में महिलाओं की हिस्सेदारी 20 फीसदी के करीब होने का अनुमान है। वैश्विक औसत करीब 30 फीसदी है लेकिन यदि नेतृत्व भूमिका की बात करें तो हमारे देश में यह सात से दस फीसदी है, जबकि विश्व में इसके दस से 15 फीसदी के बीच होने का अनुमान है।

- लेकिन महिलाओं की आबादी के हिसाब से यह संख्या बेहद कम है, इसमें सुधार कब आएगा?
हम चाहते हैं कि विज्ञान में महिलाओं को उनकी आबादी के हिसाब से नेतृत्व मिले। प्रयास हो रहे हैं लेकिन यह लक्ष्य कब हासिल होगा, कहना मुश्किल है। हमने विज्ञान में महिलाओं के लिए इंटरप्रिन्योरशिप कार्यक्रम भी शुरू किया है। इसमें महिलाओं की हिस्सेदारी पहले एकल संख्या में हुआ करती थी लेकिन अब 20 फीसदी पार कर चुकी है।

- विज्ञान की शिक्षा को कैसे बेहतर किया जा सकता है?
इसके लिए कई प्रयास हो रहे हैं। डीएसटी, सीएसआईआर ने स्कूल स्तर पर कई योजनाएं शुरू की हैं। सीएसआईआर बच्चों को अपनी प्रयोगशालाओं में भी ले जाता है। अंतरराष्ट्रीय विज्ञान मेले का आयोजन भी अहम है, जिसमें ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों के बच्चों को आमंत्रित किया जाता है। इसी प्रकार साइंस ओलंपियाड, डीएनए क्लब जैसी योजनाएं भी बच्चों को प्रत्सोहित कर रही हैं। अब हाईस्कूल स्तर पर लड़कियों को प्रोत्साहित करने के लिए विज्ञान ज्योति योजना शुरू की जा रही है।
 

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  • Web Title:women participation increased with the help of biocare policy