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उत्तर प्रदेश: असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती के साक्षात्कार पर रोक

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राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग ने प्रदेश के सहायता प्राप्त महाविद्यालयों में विज्ञापन संख्या 47 के तहत असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती के साक्षात्कार पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। भर्ती में आरक्षण की अनदेखी की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए आयोग की संयुक्त निदेशक डॉ. मधुमाला चट्टोपाध्याय ने साक्षात्कार पर रोक लगाने संबंधी पत्र उत्तर प्रदेश उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग के अध्यक्ष को बुधवार को भेजा है। इस निर्णय के बाद इंटरव्यू को लेकर संशय की स्थिति बनी हुई है।

असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती की लिखित परीक्षा परिणाम के आधार पर तैयार साक्षात्कार सूची में अन्य पिछड़ा वर्ग के उन अभ्यर्थियों को जिनके प्राप्तांक अनारक्षित वर्ग के अंतिम कटऑफ से ज्यादा था, को साक्षात्कार के लिए नहीं बुलाने की शिकायत राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग से हुई थी। आयोग ने उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग को इस संबंध में मिली शिकायतों के स्पष्टीकरण के लिए 26 जुलाई 2019 को पत्र जारी किया था। लेकिन उस पत्र का निर्धारित समय पर कोई जवाब नहीं भेजा गया।

इसलिए आयोग की सचिव वंदना त्रिपाठी को सुनवाई के लिए 6 सितंबर को स्वयं प्रस्तुत होने को निर्देशित किया गया। 6 सितंबर को शिकायतकर्ता व सचिव ने अपना पक्ष रखा लेकिन सचिव कोई भी प्रासंगिक अभिलेख प्रस्तुत नहीं कर सकी। शिकायतकर्ताओं की ओर से प्रस्तुत विधिक अभिलेखों से स्पष्ट हुआ कि इस मामले में अनियमितता हुई है। इसके बाद साक्षात्कार पर रोक लगाते हुए 11 सितंबर को सुनवाई रखी गई। बुधवार को नई दिल्ली में सुनवाई के दौरान सचिव ने 10 जून 2019 की बैठक का कार्यवृत्त प्रस्तुत किया। जिसे राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग ने आरक्षण अधिनियम का उल्लंघन माना है। आयोग ने लिखित परीक्षा का परिणाम संशोधित करते हुए साक्षात्कार की मेरिट सूची इस प्रकार जारी करने को निर्देशित किया है कि अनारक्षित वर्ग की अंतिम कटऑफ के बराबर या उससे अधिक अंक पाने वाले सभी अभ्यर्थियों (ओबीसी, एससी व एसटी को शामिल करते हुए) को साक्षात्कार के लिए बुलाया जाए। विज्ञापन संख्या 47 के जिन विषयों के अंतिम परिणाम जारी किए जा चुके है उनमें भी संशोधन कर ओबीसी, एससी व एसटी वर्ग के उन अभ्यर्थियों के लिए दोबारा से साक्षात्कार आयोजित कराया जाए जिन्होंने अनारक्षित वर्ग की लिखित परीक्षा के अंतिम कटऑफ के बराबर या अधिक अंक अर्जित किए हैं और जो पूर्व प्रक्रिया में साक्षात्कार से वंचित कर दिए गए थे। इसके बाद दोबारा नये सिरे से संशोधित अंतिम परिणाम जारी किए जाएं।

पहले ही राज्यपाल से की गई थी शिकायत
उत्तर प्रदेश उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग की विज्ञापन संख्या 47 भर्ती में आरक्षण की अनदेखी संबंधी आरोप पहले लगे थे। अभ्यर्थियों ने सहायता प्राप्त महाविद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती में आरक्षण नियमों की अनदेखी की शिकायत साक्षात्कार से पहले ही पूर्व राज्यपाल राम नाईक से की थी।

राज्यपाल ने यह मामला मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भेजा था। हालांकि बाद में आयोग ने अपने नियमों का हवाला देते हुए दावा किया था कि किसी वर्ग के साथ कोई अन्याय नहीं हुआ है। हाईकोर्ट के आदेशों और आरक्षण पर शासनादेशों का हवाला देते हुए दावा किया था चयन प्रक्रिया त्रुटिहीन है। आयोग ने 10 जून की उसी बैठक का हवाला दिया था जिसके निर्णय को राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग ने दरकिनार कर दिया है।

उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग की विज्ञापन संख्या 47 के तहत हो रही भर्ती में 35 विषयों में असिस्टेंट प्रोफेसर के 1150 पद है। 14 विषयों का साक्षात्कार हो चुका है और 138 पदों के लिए दूसरे चरण का इंटरव्यू चल रहा है। संख्या के लिहाज से सबसे बड़े चार विषयों का इंटरव्यू चौथे चरण में होगा। यह चरण 24 अक्तूबर को तीसरे चरण के इंटरव्यू की समाप्ति के बाद शुरू होगा। इन चार विषयों में ही इस भर्ती में शामिल असिस्टेंट प्रोफेसर के 1150 में से आधे से अधिक यानी 660 पद शामिल हैं। इनमें समाजशास्त्र में सर्वाधिक 273, हिन्दी में 166, राजनीति विज्ञान में 121 और शिक्षाशास्त्र में 100 पद हैं। दूसरे चरण में दो सितंबर से छह विषयों के इंटरव्यू कराए गए थे। तीसरे चरण में 11 विषयों के 264 पद थे।

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  • Web Title:Uttar Pradesh: Assistant Professor recruitment interview stopped