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चौथे प्रयास में IAS बने ये शख्स, UPSC की तैयारी के दौरान बेचते थे अखबार

मध्य प्रदेश के मूल निवासी निरीश का पालन-पोषण एक ऐसे घर में हुआ, जिसमें आर्थिक कठिनाइयां थीं। उनके पिता पेशे से एक दर्जी थे।आइए जानते हैं निरीश ने कौन से प्रयास में यूपीएससी की परीक्षा पास की और क्या

चौथे प्रयास में IAS बने ये शख्स, UPSC की तैयारी के दौरान बेचते थे अखबार
Priyanka Sharmaलाइव हिन्दुस्तान,नई दिल्लीTue, 14 Nov 2023 08:46 PM
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UPSC IAS success stories: सबसे कठिन परीक्षा मानी जाने वाली यूपीएससी को पास करने के लिए हर लाखों उम्मीदवार सीविल सर्विसेज परीक्षा में शामिल होते हैं। कम ही उम्मीदवार इस परीक्षा को पास कर पाते हैं और कुछ ऐसे उम्मीदवार भी होते हैं जो तमाम बाधाओं का सामना करते हुए IAS अधिकारी बनने का सपना पूरा कर लेते हैं। आज हम बात कर जा रहे हैं,IAS अधिकारी निरीश राजपूत के सफर के बारे में, जिनकी जिंदगी संघर्षों से भरी है।

आईएएस निरीश राजपूत मध्य प्रदेश के रहने वाले हैं। वह ऐसे परिवार से ताल्लुक रखते हैं, जिनकी आर्थिक स्थिति इतनी अच्छी नहीं थी। पैसों की कमी होने के कारण उनकी शिक्षा में काफी बाधाएं आई थी।

घर खर्च चलाने के लिए निरीश के पिता दर्जी  का काम किया करते थे। हालांकि उनके कमाए हुए पैसे पूरे परिवार के लिए काफी नहीं होते थे, ऐसे में निरीश को अपनी आजीविका के लिए पैसे उधार लेने के लिए मजबूर होना पड़ता था। निरिश जानते थे कि एक शिक्षित व्यक्ति को ही समाज इज्जत की नजर से देखता है और शिक्षा ही घर की आर्थिक स्थिति ठीक कर सकती है। ऐसे में उन्होंने गरीबी को अपनी शिक्षा के आड़े कभी नहीं आने दिया।

उन्होंने अपनी प्राथमिक शिक्षा गांव के सरकारी स्कूल से की और बाद वह ग्वालियर चले गए। जहां उन्होंने बीएससी और एमएससी की डिग्री के लिए पढ़ाई की।  हालांकि  कॉलेज की फीस भरने के लिए वह पार्ट टाइम काम भी किया करते थे। उन दिनों उन्होंने अखबार बेचने का काम किया था। कुछ समय बाद उन्होंने यूपीएससी की परीक्षा की तैयारी शुरू करने का फैसला किया। हालांकि उनके लिए ये सफर आसान नहीं था। ऐसे में उन्होंने सोचा कि वह काम के साथ यूपीएससी की तैयारी करेंगे।

जिसके बाद उन्होंने एक दोस्त के कोचिंग सेंटर में फैकल्टी के पद पर काम किया था, लेकिन किन्हीं कारणों से दो साल के बाद, उनके दोस्त ने उन्हें कोचिंग सेंटर से निकाल दिया था। उस समय निरीश मानों टूट से गए हों, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और अपनी किस्मत बदलने का फैसला लिया और दिल्ली चले आए।

हालांकि उनके पास पैसे नहीं थे, ऐसे में उन्होंने अपनी पढ़ाई के लिए पैसे उधार लिए और दिल्ली में बस गए। तीन बार UPSC 2013  में असफल हुए लेकिन अपने चौथे प्रयास में 370वीं रैंक हासिल कर IAS अधिकारी बन गए।

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