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UPSC CSE टॉपर : संगमनगरी की वरदाह खान को 18वीं रैंक, दूसरे प्रयास में मिली सफलता

UPSC CSE topper: ​​​​​​​ संघ लोक सेवा आयोग ने सिविल सेवा परीक्षा 2023 का अंतिम परिणाम मंगलवार को जारी कर दिया। इसमें संगमनगरी के होनहारों ने अपनी मेधा की चमक बिखेरी है। संगमनगरी से चयनित अभ्यर्थियों क

UPSC CSE टॉपर : संगमनगरी की वरदाह खान को 18वीं रैंक, दूसरे प्रयास में मिली सफलता
Anuradha Pandeyप्रमुख संवाददाता,​​​​​​​प्रयागराजWed, 17 Apr 2024 09:39 AM
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 संघ लोक सेवा आयोग ने सिविल सेवा परीक्षा 2023 का अंतिम परिणाम मंगलवार को जारी कर दिया। इसमें संगमनगरी के होनहारों ने अपनी मेधा की चमक बिखेरी है। संगमनगरी से चयनित अभ्यर्थियों की संख्या तकरीबन एक दर्जन के आसपास है। कटघर मुट्ठीगंज की रहने वाली वरदाह खान ने 18वीं रैंक हासिल कर संगमनगरी का सिर एक बार फिर गर्व से ऊंचा कर दिया है।

वरदाह खान ने 10वीं की पढ़ाई 2015 में (91 प्रतिशत अंक) सेंट मेरीज कॉन्वेंट स्कूल से पूरी करने के बाद 12वीं की परीक्षा केंद्रीय विद्यालय ओल्ड कैंट से 95 प्रतिशत अंकों के साथ 2017 में पास की थी। इसके बाद खालसा कॉलेज दिल्ली विश्वविद्यालय से बीकॉम ऑनर्स करने के बाद वह संघ लोक सेवा आयोग की तैयारी भी करती रहीं। उनके पिता अब्दुल रहमान का नौ वर्ष पहले निधन हो गया था। वर्तमान में वह अपनी मां अफसर जहां के साथ नोएडा के सेक्टर-82 विवेक विहार में रह रहीं हैं। उनकी मां केंद्रीय विद्यालय ओल्ड कैंट में टीजीटी गणित की शिक्षिका थीं और 2018 में गोल मार्केट दिल्ली ट्रांसफर हुआ था। वरदाह इकलौती बेटी हैं।

पहले नौकरी, फिर तैयारी और दूसरे प्रयास में मिली सफलता

वरदाह ने दूसरे प्रयास में 18वीं रैंक हासिल की है। उन्होंने बीकॉम के बाद आठ महीने तक एक कंपनी में नौकरी की। उसके बाद सबकुछ छोड़कर तैयारी में जुट गईं। उन्होंने सलाह दी है कि सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी के लिए एनसीईआरटी किताबों को बार-बार पढ़कर विषय को अच्छी तरह से समझ लें। मुख्य परीक्षा के लिए वैकल्पिक विषय के नोट्स तैयार रखें। समसामयिक घटनाचक्र के लिए समाचार पत्र और मासिक पत्रिका जरूर पढ़ें।

बेटियों का कीर्तिमान

संगमनगरी की बेटी वरदाह खान ने संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा में 18वां स्थान पाकर संगमनगरी का मान फिर से बढ़ाया है। इससे पहले भी बेटियों ने देश की सबसे बड़ी परीक्षा में शानदार सफलता हासिल कर शहर को गौरवान्वित किया है। सौम्या पांडेय को 2016 के परिणाम में अखिल भारतीय स्तर चौथी रैंक मिली थी। ईवा सहाय ने 2009 में तीसरी रैंक हासिल कर पूरे देश में नाम रोशन किया था। पिछले साल धनैचा-मलखानपुर हनुमानगंज की प्रतीक्षा सिंह को तीसरे प्रयास में 52वीं रैंक मिली थी।

 

घर पर ऑनलाइन पढ़ाई कर पाया मुकाम, आईएफएस का सपना

वरदाह बताती हैं कि उन्होंने घर पर रहकर ही पढ़ाई की है। वह प्रतियोगी परीक्षा से जुड़ी किताबें, अंग्रेजी व हिंदी के समाचार पत्र पढ़ने के साथ ऑनलाइन कोचिंग के जरिए तैयारी कर रहीं थीं। उन्होंने यूपीएससी परीक्षा के लिए दिन में पांच से अधिक घंटे पढ़ाई की। यह उनका दूसरा प्रयास था। वरदाह बताती है कि उनकी रूचि विदेश सेवा में है। वह आईएफएस बनना चाहती हैं।

 

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