UP DElEd 2019: 1 lakh seats of uttar pradesh d el ed still vacant - UP DElEd : डीएलएड की 1 लाख से अधिक सीटें अब भी खाली DA Image

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UP DElEd : डीएलएड की 1 लाख से अधिक सीटें अब भी खाली

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UP DElEd : डीएलएड 2019-20 सत्र में दूसरे चरण का सीट आवंटन पूरा होने के बाद एक लाख से अधिक सीटें खाली रह गईं। प्रदेश में 67 जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) की 10600 और 3087 निजी कॉलेजों की 218550 को मिलाकर कुल 229150 सीटों के सापेक्ष 123823 सीटें ही भरी जा सकी हैँ। 105327 सीटें खाली रह गई है जो अधिकांश निजी कॉलेजों की है।

परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय एलनगंज से मिली जानकारी के मुताबिक दूसरे चरण में 53149 अभ्यर्थियों ने संस्थान का विकल्प दिया था। इनमें से 41997 को सीट आवंटन हुआ और 11152 के आवेदन निरस्त कर दिए गए। पहले राउंड में 138442 अभ्यर्थियों को सीटें आवंटित की गई थी लेकिन इनमें से 81826 ने ही दाखिला लिया। 

इस प्रकार दूसरे चक्र में जितने अभ्यर्थियों को सीट एलॉट हुई है जरूरी नहीं है की सभी प्रवेश लें। प्रवेश लेने की अंतिम तिथि 29 अगस्त है। उसके बाद ही दाखिला लेने वाले अभ्यर्थियों की वास्तविक संख्या का पता चल सकेगा। प्रशिक्षण संस्थान प्रवेश लेने वाले अभ्यर्थियों की सूचना 30 अगस्त तक परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय एलनगंज को भेजेंगे। 
30 अगस्त तक सूचना नहीं भेजने पर प्रवेश लिए जाने वाले अभ्यर्थियों का प्रवेश मान्य नहीं होगा। चूंकि डीएलएड 2019 का प्रशिक्षण 6 अगस्त से ही शुरू हो चुका है इसलिए दूसरे चरण में प्रवेश लेने वाले अभ्यर्थियों के लिए अतिरिक्त कक्षाएं चलाकर प्रशिक्षण संस्थान कोर्स पूरा कराएंगे। 

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बीएड के कारण नहीं रह गया डीएलएड का क्रेज
परिषदीय प्राथमिक स्कूलों में सहायक अध्यापक पद पर नियुक्ति के लिए बीएड मान्य होने के बाद से डीएलएड का क्रेज घट गया है। राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद ने जून 2018 में बीएड डिग्रीधारियों को भी प्राथमिक स्कूलों की शिक्षक भर्ती के योग्य मान लिया था। उसके बाद से डीएलएड करने वालों की संख्या कम हो गई है। क्योंकि बीएड करने के बाद अभ्यर्थी प्राथमिक, उच्च प्राथमिक एवं माध्यमिक स्कूलों में भर्ती के लिए आवेदन कर सकते हैं। जबकि डीएलएड करने के बाद सिर्फ प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक स्कूलों में ही शिक्षक बन सकते हैं। सरकार ने उच्च प्राथमिक स्कूलों की सीधी भर्ती पर रोक लगा रखी हैद्ध इसलिए उनके अवसर प्राथमिक स्कूलों की सहायक अध्यापक भर्ती तक सीमित रह गए हैं। 

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