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UP Board: एक ऐसा स्कूल, जहां खोजने पर भी नहीं मिल रहे फेल हुए स्टूडेंट्स, जानें नाम

उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (UPMSP) ने 20 अप्रैल को कक्षा 10वीं और 12वीं की परीक्षा का रिजल्ट जारी किया। वहीं आज हम आपको ऐसे स्कूल के बारे में बताएंगे, जिसमें छात्रों ने काफी अच्छे अंक प्राप्

UP Board: एक ऐसा स्कूल, जहां खोजने पर भी नहीं मिल रहे फेल हुए स्टूडेंट्स, जानें नाम
Priyanka Sharmaहिन्दुस्तान टीम,गंगापारSun, 21 Apr 2024 09:48 PM
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UP Board Result 2024: उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (UPMSP) ने 20 अप्रैल को  कक्षा 10वीं और 12वीं की परीक्षा रिजल्ट जारी किया है। जिसमें कक्षा 12वीं में  82.60% और कक्षा 10वीं में 89.55%  छात्र सफल हुए हैं।  इस साल कक्षा 10वीं में प्राची निगम और कक्षा 12वीं में शुभम वर्मा ने पहला स्थान हासिल किया है। दोनों ही स्टूडेंट्स सीतापुर के हैं।

वहीं आज हम आपको ऐसे स्कूल के बारे में बताने जा रहे हैं, जहां  उत्तर प्रदेश बोर्ड की परीक्षाफल आने के बाद अनुत्तीर्ण  यानी फेल हुए छात्र खोजने से भी नहीं मिल रहे हैं। ज्यादातर 60 प्रतिशत से अधिक अंकों से छात्रों ने यूपी बोर्ड की परीक्षा पास की हैं, लेकिन उनमें भी छात्रों को प्रतिशत कम होने का मलाल है।

हम बात कर रहे हैं, मालती देवी इंटर कॉलेज राजापुर की। जिसमें हाईस्कूल में अंजली यादव व आस्था मौर्या 94 प्रतिशत, सत्यम् बिंद 93 प्रतिशत, संध्या पाल 91 प्रतिशत व वैष्णवी वर्मा 90 प्रतिशत अंक पाकर टॉप फाइव परीक्षार्थियों में शामिल रहे।

इसी विद्यालय में इंटरमीडिएट में विकास पाल 93 प्रतिशत, जूली तिवारी 91 प्रतिशत, अवधेश 89 प्रतिशत, संदीप 85 प्रतिशत व आलोक बिंद को 82 प्रतिशत अंक मिले।

स्वतंत्रता संग्राम सेनानी राजाराम यादव इंटर कॉलेज मांडा की छात्रा सिमर यादव 90 प्रतिशत अंक प्राप्त कर हाईस्कूल में प्रथम रही। सिमर अपने मामा राहुल यादव के घर रहकर पढ़ती थी।

इसी तरह बाबू फतेह बहादुर सिंह इंटर कॉलेज बोधीपुर हाटा में हाईस्कूल में प्रदीप कुमार 89 प्रतिशत, मंजेश उपाध्याय 88 प्रतिशत, पीयूष व निशांत 87 प्रतिशत तथा ज्योति सिंह 84 प्रतिशत अंक प्राप्त कर टाप फाइव रहे। इसी विद्यालय में इंटरमीडिएट में संध्या 83 प्रतिशत, दीपा मिश्रा, दिव्या, श्रद्धा, हर्षिता ने 73 प्रतिशत अंक प्राप्त किया।

स्कूल के बारे में लोगों का कहना है कि, स्कूलों में पहले साल भर जमकर पढ़ाई होती थी। नकल से छात्र खुद परहेज करते थे, लेकिन तब बोर्ड परीक्षाफल में एक विद्यालय में मुश्किल से दो तीन छात्र प्रथम श्रेणी में पास होते थे। अब  स्कूलों में साल भर पढ़ाई, परीक्षा और उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन इतना बढ़िया होता है कि ज्यादातर स्कूलों में साठ प्रतिशत छात्र प्रथम श्रेणी और परीक्षाफल 100 प्रतिशत होता है। फिलहाल परीक्षाफल को लेकर स्कूलों के अभिभावकों में काफी खुशी है, लेकिन सत्तर प्रतिशत अंक पाने वाला छात्र भी अपने अंक को नाकाफी बताते हुए दुखी है।

 

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