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UP Board : परीक्षा में फर्जीवाड़ा रोकने को देशभर के फेलियर्स की मांगी लिस्ट

10वीं-12वीं परीक्षा में फर्जी छात्र-छात्राओं की घुसपैठ रोकने के लिए यूपी बोर्ड देशभर के फेलियर खोज रहा है। इसके लिए बोर्ड ने सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (सीबीएसई), काउंसिल फार दि इंडियन स्कूल...

UP Board : परीक्षा में फर्जीवाड़ा रोकने को देशभर के फेलियर्स की मांगी लिस्ट
संजोग मिश्र,प्रयागराज Mon, 29 Jul 2019 04:27 PM
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10वीं-12वीं परीक्षा में फर्जी छात्र-छात्राओं की घुसपैठ रोकने के लिए यूपी बोर्ड देशभर के फेलियर खोज रहा है। इसके लिए बोर्ड ने सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (सीबीएसई), काउंसिल फार दि इंडियन स्कूल सर्टिफिकेट एग्जामिनेशन (सीआईएससीई), नेशनल ओपन स्कूल नई दिल्ली समेत 15 बोर्ड को पत्र लिखकर पिछले पांच साल में 10वीं-12वीं की परीक्षा में फेल छात्र-छात्राओं का नाम मांगा है।

साथ ही इन पांच सालों में कक्षा 9 व 11 पास करने वाले छात्र-छात्राओं की लिस्ट भी मांगी है। ऐसा इसलिए किया गया है, ताकि दूसरे बोर्ड से 10वीं-12वीं फेल या 9वीं-11वीं पास की फर्जी मार्कशीट लगाकर कोई छात्र यूपी बोर्ड की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा 2020 में प्राइवेट परीक्षार्थी के रूप में सम्मिलित न हो सकें। 

बोर्ड की नियमावली के अनुसार मान्यता प्राप्त किसी भी अन्य बोर्ड से कक्षा 10 या कक्षा 12 की परीक्षा में फेल या कक्षा 9 व 11 में पास के अंकपत्र, रजिस्ट्रेशन कार्ड, ट्रांसफर सर्टिफिकेट के आधार पर यूपी बोर्ड की 10वीं-12वीं परीक्षा में सम्मिलित हो सकता है।

पिछले सालों में ऐसे मामले पकड़ में आए हैं, जिसमें छात्र-छात्राओं ने दूसरे बोर्ड के फर्जी अंकपत्र/प्रमाणपत्र के आधार पर यूपी बोर्ड की हाईस्कूल-इंटर परीक्षा में शामिल होने का प्रयास किया है। 2018 की बोर्ड परीक्षा में लगभग 83 हजार ऐसे छात्र-छात्राओं का रजिस्ट्रेशन निरस्त कर दिया गया था, जिन्होंने दूसरे बोर्ड के जाली अंकपत्र व प्रमाणपत्र लगाए थे।

इसी के साथ यह भी देखा गया है कि दूसरे बोर्ड से एक बार 10वीं या 12वीं स्तर की परीक्षा पास किए हुए छात्र-छात्रा अपने नंबर बढ़ाने या जन्म का साल  बदलने के उद्देश्य से जाली दस्तावेजों के आधार पर यूपी बोर्ड की हाईस्कूल-इंटर परीक्षा में शामिल होने का प्रयास करते हैं। इसलिए ऐसे छात्र-छात्राओं को चिह्नित करने के लिए दूसरे बोर्डों से पांच साल का डाटा मांगा गया है।

एक मार्कशीट पर दर्जनों छात्रों को दिला देते थे परीक्षा
नकल माफिया दूसरे बोर्ड की एक मार्कशीट पर सैकड़ों छात्रों को यूपी बोर्ड की परीक्षा में सम्मिलित करा देते थे। 2018 में ही फतेहपुर के एक स्कूल का मामला पकड़ में आया था, जब वहां सीबीएसई की एक ही मार्कशीट पर सिर्फ नाम बदल-बदल कर कई छात्रों का पंजीकरण करा दिया गया था।

पहले यूपी बोर्ड की ही मार्कशीट से करते थे खेल
फर्जी तरीके से 10वीं-12वीं की परीक्षा दिलाने का खेल सालों से चल रहा है। पहले यूपी बोर्ड के फेल छात्र-छात्राओं की मार्कशीट में ही हेरफेर करके बड़ी संख्या में छात्रों को परीक्षा में शामिल करा दिया जाता था। लेकिन, तकरीबन 20 साल से बोर्ड का डाटा ऑनलाइन होने के बाद ये खेल आसानी से पकड़ में आने लगा। इसके बाद नकल माफियाओं ने दूसरे बोर्ड के फर्जी अंकपत्र का सहारा लेना शुरू कर दिया।

इन बोर्ड से मांगी सूचना
यूपी बोर्ड ने सीबीएसई, सीआईएससीई, नेशनल ओपन स्कूल, उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा परिषद, उत्तर प्रदेश माध्यमिक संस्कृत शिक्षा परिषद, बोर्ड ऑफ स्कूल एजूकेशन उत्तराखंड, बिहार स्कूल एग्जामिनेशन बोर्ड, बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजूकेशन मध्य प्रदेश, बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजूकेशन राजस्थान, पंजाब स्कूल एजूकेशन बोर्ड मोहाली, बोर्ड ऑफ स्कूल एजुकेशन हरियाणा, हिमाचल प्रदेश बोर्ड ऑफ स्कूल एजूकेशन धर्मशाला, झारखंड एकेडमी काउंसिल, वेस्ट बंगाल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजूकेशन, वेस्ट बंगाल काउंसिल ऑफ सेकेंडरी एजूकेशन से सूचनाएं मांगी है।

सख्ती के बाद कम हो गई प्राइवेट छात्रों की संख्या
यूपी बोर्ड ने दो साल पहले फर्जी छात्रों के खिलाफ सख्ती शुरू की, तो प्राइवेट छात्रों की संख्या कम होने लगी है। सख्ती से पहले 2015 में हाईस्कूल के 117729, 2016 में 102952 और 2017 में 173398 परीक्षार्थी प्राइवेट रूप से पंजीकृत थे जिनकी संख्या 2018 में घटकर 63100 और 2019 में 23004 तक सिमट गई थी। इसी प्रकार इंटर में 2019 में 66737, जबकि 2018 में 118739 छात्र थे।

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