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लखनऊ विवि में शुरू हुआ तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय ई-सम्मेलन

इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस्ड मॉलिक्यूलर जेनेटिक्स एंड इंफेक्शियस डिजीज, ओएनजीसी सेंटर फॉर एडवांस स्टडीज (ओसीएएस) व आणविक और मानव आनुवंशिकी प्रयोगशाला, प्राणी विज्ञान विभाग, लखनऊ विश्वविद्यालय द्वारा,...

लखनऊ विवि में शुरू हुआ तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय ई-सम्मेलन
Yogesh Joshiवरिष्ठ संवाददाता,लखनऊWed, 19 Jan 2022 09:58 PM

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इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस्ड मॉलिक्यूलर जेनेटिक्स एंड इंफेक्शियस डिजीज, ओएनजीसी सेंटर फॉर एडवांस स्टडीज (ओसीएएस) व आणविक और मानव आनुवंशिकी प्रयोगशाला, प्राणी विज्ञान विभाग, लखनऊ विश्वविद्यालय द्वारा, अनुसंधान एवं विकास योजना, उच्च शिक्षा के सहयोग से 'हाल ही में स्वास्थ्य और रोगों की नई प्रवृत्तियां (रीसेंट ट्रेंड्स इन हेल्थ एंड डिजीज)' विषय पर तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय ई-सम्मेलन की शुरुआत बुधवार को की गई। यह सम्मेलन 21 जनवरी तक चलेगा। इसमें 400 से अधिक शोधार्थियों और विद्यार्थियों ने पंजीकरण कराया है, जो 21 जनवरी 2022 को ई-पोस्टर के माध्यम से अपना शोधकार्य प्रस्तुत करेंगे।

सम्मेलन में भारत सहित पांच देशों फ्रांस, यूएसए, आयरलैंड, ऑस्ट्रेलिया से कई प्रतिष्ठित राष्ट्रीय वक्ता शोधकार्य प्रस्तुत करेंगे। बुधवार को ई-सम्मेलन के मुख्य अतिथि प्रो. आलोक धवन (निदेशक, बायोमेडिकल रिसर्च सेंटर, लखनऊ) थे। उन्होंने 'नैनोमैटेरियल टॉक्सिकोलॉजी: ए जर्नी फ्रॉम लेबोरेटरी टू पॉलिसी' विषय पर उद्घाटन भाषण दिया। सम्मेलन की संयोजक और आयोजक, प्रो. मोनिशा बनर्जी, निदेशक, आईएएमजीआईडी ने अतिथियों और प्रतिभागियों का स्वागत किया। प्रो. राजीव पांडे डीन रिसर्च, लविवि, प्रो. राकेश चंद्रा डीन अकादमिक और प्रो. सुधीर मेहरोत्रा प्रमुख, जैव रसायन विभाग ने उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता की। इन लोगों ने स्वास्थ्य सम्बंधी पहलुओं पर ज्ञान की महत्ता को समझाते हुए महामारी के समय में इस तरह के सम्मेलनों की आवश्यकता पर जोर दिया।

बाल रोग विशेषज्ञ और नैदानिक आनुवंशिकीविद्, प्रो. शुभा आर फड़के, प्रमुख, चिकित्सा आनुवंशिकी, एसजीपीजीआई ने मोनोजेनिक विकारों में अगली पीढ़ी के अनुक्रमण की भूमिका के बारे में बताया। डॉ. गीता राय, बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय ने कोविड-19 में संभावित चिकित्सीय लक्ष्यों के रूप में न्यूट्रोफिल की भूमिका के बारे में बात की। प्रो. एमके दत्ता, एकेटीयू ने नैदानिक निदान में कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर एक शानदार व्याख्यान दिया।

डॉ. शैलेश श्रीवास्तव, शिया पीजी कॉलेज ने रोग प्रबंधन की वैकल्पिक प्रणाली के महत्व पर बात की। शाम का सत्र संयुक्त राज्य अमेरिका के दो वक्ताओं, प्रो. बीबी अग्रवाल, कैलिफोर्निया और डॉ. बिलाल हफीज, टेक्सास के साथ रहा। गुरुवार को बीएचयू के प्रतिष्ठित साइटोजेनेटिकिस्ट प्रो. एससी लखोटिया, दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रो. एमएम चतुर्वेदी, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के डॉ. अरशद, लखनऊ विश्वविद्यालय के डॉ. सुचित स्वरूप, फ्रांस से प्रो. नईम खान, एरा मेडिकल यूनिवर्सिटी से प्रो. फरजाना, ऑस्ट्रेलिया से डॉ. मनीष पांडे, सीडीआरआई लखनऊ से डॉ. एसके रथ और आयरलैंड से डॉ. शेरोन ग्लिन स्वास्थ्य और रोगों की नई प्रवृत्तियों पर व्याख्यान देंगे।

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