DA Image
1 मार्च, 2021|1:52|IST

अगली स्टोरी

इंतजार खत्म: AMU में गणतंत्र दिवस पर दफन होगा टाइम कैप्सूल

amu exam 2020 updates

एएमयू में शताब्दी समारोह में वह ऐतिहासिक पल आने वाला है, जिसका बिरादरी लंबे समय से इंतजार कर रही थी। विश्वविद्यालय प्रशासन ने निर्णय लिया है कि टाइम कैप्सूल गणतंत्र दिवस पर दफन किया जाएगा। इसके लिए सभी तैयारियां पूर्ण कर ली गई हैं।

विश्वविद्यालय ने निर्णय लिया था कि शताब्दी वर्ष समारोह में टाइम कैप्सूल का दफन किया जाएगा। कैप्सूल में वर्ष 1877 में कॉलेज की स्थापना के बाद विश्वविद्यालय बनने से लेकर वर्ष 2020 तक का पूर्ण इतिहास डिजीटल व प्रिंटिंग दोनों रूप में रखा गया है। कैप्सूल पूरी तरह स्टील का है और इसे कैमिकल से सुरक्षित किया गया है। इसमें अब तक विश्वविद्यालय में आने वाली सेलेब्रिटी, कुलपति, विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों की उपलब्धियों समेत अन्य बिंदुओं को शामिल किया गया है। विश्वविद्यालय को ऊंचाई प्रदान करने में किस-किस का योगदान रहा, यह भी शामिल है।

स्ट्रेची हॉल के सामने दफन होगा कैप्सूल
टाइम कैप्सूल को विवि में स्ट्रेची हॉल के सामने दफन किया जाएगा। पहला कैप्सूल स्ट्रेची हॉल के अंदर दफन किया गया था। कैप्सूल के अंदर प्रिंटिंग मैटीरियल भरा गया है। वहीं डिजीटल मैटीरियल को क्लाउड के रूप में सुरक्षित रखा गया है। टाइम कैप्सूल का वजन करीब पौने दो टन है और इसे 30 फीट की गहराई में दफन किया जाएगा।

नाइट्रोजन गैस से किया गया सुरक्षित
कैप्सूल को नाइट्रोजन गैस से सुरक्षित किया गया है ताकि वह सालों तक खराब न हो सके। अन्य कई गैस का इस्तेमाल भी कैप्सूल तैयार करने में किया गया है। कैप्सूल में किताबों को एसिड फ्री किया गया है। इसमें सबसे ज्यादा एएमयू संस्थापक सर सैयद अहमद खां द्वारा लिखी गई किताबों को सुरक्षित करके रखा गया है। इसमें 100 साल से पहले की किताबें भी शामिल है।

कैप्सूल दफन करने वाली वेस्ट यूपी की एकमात्र यूनिवर्सिटी
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में टाइम कैप्सूल दफन करने वाली एएमयू एक मात्र यूनिवर्सिटी है। यूपी में आईआईटी कानपुर पहले इस तरह का कैप्सूल दफन कर चुकी है। गणतंत्र दिवस पर टाइम कैप्सूल दफन करने के लिए एएमयू की ओर से कार्यक्रम वर्चुअल आयोजित किया जाएगा। लिंक व पासवर्ड जारी किया जाएगा।

पहले भी दफन हो चुका कैप्सूल, जल्द निकाला जाएगा
विवि में टाइम कैप्सूल करीब 140 साल पहले भी दफन किया जा चुका है। उस कैप्सूल को बाहर निकालने पर विवि विचार कर रहा है। नई पीढ़ी को इतिहास रूबरू कराने का प्रस्ताव पिछले दिनों कमेटी के समक्ष रखा गया था। अभी इस पर ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। अगली बैठक में पुन: इस पर विचार किया जाएगा।

12 जनवरी 1877 के अंक में मिला है अधिकांश जिक्र
-विश्वविद्यालय उर्दू एकेडमी के डायरेक्टर एवं पीआरओ सैल के एसोसिएट मेंबर इंचार्ज डॉ. राहत अबरार का कहना है कि आठ जनवरी 1877 को मोहम्मद एंग्लो कॉलेज की स्थापना के समय बड़ा समारोह हुआ था। उद्घाटन वायसराय लार्ड लिटिन ने किया। बनारस के नरेश शंभू नारायण भी शामिल हुए थे करीबअ 140 वर्ष पहले भी सर सैयद ने वायसराय व नरेश की मौजूदगी में टाइम कैप्सूल जमीन में रखा था। इसका जिक्र अलीगढ़ इंस्टीट्यूट गजट के 12 जनवरी 1877 को प्रकाशित अंक में मिलता है। कैप्सूल में सोने, चांदी व तांबे के सिक्कों के साथ मदरसा व कॉलेज की स्थापना के लिए किए संघर्ष आदि की दास्तां शामिल है। कैप्सूल में सामान को रखने के लिए कांच की बोतलों का इस्तेमाल किया गया था।

जज बनकर अलीगढ़ आए तो सर सैयद ने संजोया था सपना
एएमयू के संस्थापक सर सैयद अहमद खां पहली बार वर्ष 1864 में ब्रिटिशकाल में अलीगढ़ न्यायालय में जज बनकर आए थे। 1869 तक यहां नौकरी की। इसके बाद बनारस ट्रांसफर हो गया। अलीगढ़ में रहते हुए ही उन्होंने मुसलमानों की हालत को देखते हुए शिक्षण संस्था खोलने का निर्णय लिया था।

एएमयू प्रवक्ता राहत अबरार ने कहा, विवि में शताब्दी वर्ष समारोह के अंतर्गत टाइम कैप्सूल गणतंत्र दिवस को दफन किया जा रहा है। इसकी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। कैप्सूल स्टील धातु में करीब पौने दो टन वजन का है। कार्यक्रम को वर्चुअल आयोजित करने की तैयारी की जा रही है। ताकि कोरोना नियमों का पालन हो सके। 
 

  • Hindi News से जुड़े ताजा अपडेट के लिए हमें पर लाइक और पर फॉलो करें।
  • Web Title:The wait is over: Time capsule to be buried on Republic Day in AMU