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स्कूल कैलेंडर में शामिल हुई माहवारी, जुलाई से होगी कक्षा, इन बातों की दी जायेगी जानकारी

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अब स्कूल स्तर पर ही छात्राओं को माहवारी की जानकारी मिलेगी। अब न उन्हें शरमाने की जरूरत होगी न ही परेशान होने की जरूरत है। माध्यमिक स्कूलों के कैलेंडर में माहवारी पर भी अब कक्षाएं संचालित होंगी। इसकी तैयारी की जा रही है। जुलाई के पहले सप्ताह से ये कक्षाएं शुरू की जायेंगी। बिहार शिक्षा परियोजना परिषद की मानें तो जुलाई के पहले सप्ताह से हर शनिवार को 45 मिनट की कक्षा चलेगी। 

आठ हजार शिक्षिकाएं तैयार होंगी

छात्राओं की झिझक को खत्म करने के लिए आठ हजार शिक्षिकाएं इसके लिए तैयार की जायेंगी। प्रदेशभर में 152 शिक्षिकाओं को मास्टर ट्रेनर बनाया गया है। अब ये ट्रेनर अपने-अपने जिलों के हर स्कूल में दो ट्रेनर तैयार करेंगी। ये ट्रेनर छात्राओं के साथ हर शनिवार को रू-ब-रू होंगी। इसके तहत महीने में एक शनिवार को अम्मा जी कहती हैं वीडियो दिखाना और कहानी सुनाकर इस मसले पर चर्चा की जाएगी।

नैपकिन के लिए छात्राओं की बनेगी टीम 

सरकार के सैनिटरी नैपकिन की योजना का लाभ हर छात्रा तक मिले, इसके लिए कई स्कूलों की छात्राओं की टीम तैयार की जा रही है। इसके तहत हर कक्षा की सभी छात्राओं की सूची तैयार होगी। जब भी छात्राओं को जरूरत होगी, उसे सेनेटरी नैपकिन दी जायेगी। अब तक आशा कार्यकर्ता के माध्यम से ग्रामीण इलाकों में किशोरियों को सैनेटरी नैपकिन देने की व्यवस्था है लेकिन यह व्यवस्था प्रत्येक किशोरियों तक नहीं पहुंचती। 


ये गलत धारणाएं हैं प्रदेश में

छात्राएं राख, बालू, लकड़ी का बुरादा, गोइठा आदि का इस्तेमाल करती हैं

उन्हें अछूत की तरह रखा जाता है 

कपड़े की जगह कागज का इस्तेमाल करती हैं 

इस दौरान एक कमरे में बंद रहती हैं। बात करने, पूजा के कमरे आदि में नहीं जाती हैं 

इन बातों की दी जायेगी जानकारी

1 माहवारी के दौरान इस्तेमाल किये जाने वाले कपड़े, सेनेटरी नैपकिन के इस्तेमाल करने के तरीके बताए जाएंगे 

2 माहवारी क्यों होती है, इसकी पूरी जानकारी 

3 माहवारी में स्वच्छता के महत्व के प्रति संवेदनशील बनाना 

4 अंधविश्वास के प्रति जागरूक करना 

5 माहवारी से संबंधित गलत धारणाएं और भ्रांतियां बताना 

6 अम्मा जी कहती हैं कार्यक्रम चलेगा

छात्राओं को माहवारी पर जागरूक करने के लिए पहले माध्यमिक स्कूलों में यह शुरू किया जायेगा। अभी इसके लिए शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। हर स्कूल में दो शिक्षिकाएं इसके लिए ट्रेंड की जा रही हैं। हर शनिवार को बालिका विद्यालय में यह शुरू होगा। -किरण कुमारी, राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी 

(नोट - ये जानकारी बिहार शिक्षा परियोजना और यूनिसेफ द्वारा ट्रेनिंग के दौरान विभिन्न जिलों से आयीं शिक्षिकाओं से मिली जानकारी के अनुसार है )

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  • Web Title:The menstrual cycle will be included in the school calendar from July to class these information will be given