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सक्सेस मंत्र : जल्दबाजी में गलतियां करने से बचना है तो सोच के घोड़ों को तसल्ली से दौड़ाएं

success mantra

कुछ लोगों में तसल्ली नहीं होती। वे बस एक काम से दूसरे काम और एक विचार से दूसरे विचार को निपटाने में ही लगे रहते हैं। नतीजा, जहां सोच की खिड़कियों को खोलकर, कुछ देर ठहरने, नया देखने व सुनने की जरूरत थी, हम अनछुए रह जाते हैं। जल्दबाजी में गड़बड़ियां कर बैठते हैं। 

कभी क्या ऐसा लगता है कि आप केवल दौड़े जा रहे हैं? कहां, क्यों और कैसे, कुछ नहीं पता। जिंदगी आपकी है, पर आपको बिन छुए ही गुजरी जा रही है। मानो किसी चीज पर आपकी कोई पकड़ ही नहीं है। ना तन साथ दे रहा, ना मन और ना ही रिश्ते। करें तो क्या करें!

सहज पके सो मीठा होवे 
कभी-कभी खुद को धीमा करना ही सबसे जरूरी होता है। तन, मन और समाज तीनों स्तर पर।  लेखक कार्ल ओनरे कहते हैं, ‘धीमी गति का दर्शन यह नहीं कहता कि आप सब कुछ कछुए की चाल से करें। यह गति से ज्यादा, जरूरी कामों को सही समय देने से जुड़ा है।’ कुछ कामों को हड़बड़ी में नहीं, ढंग से करना ही सही नतीजे देता है। जरूरत से ज्यादा तेज गति, हमें जुड़ने नहीं देती। ना खुद से, ना अपनों से और ना ही अपने आसपास से। हम जड़ तक  पहुंच ही नहीं पाते। सतह पर ही  मंडराते रह जाते हैं। नतीजा जितनी जल्दी बढ़ते दिखाई देते हैं, उतनी ही तेजी से उखड़ भी जाते हैं। डेनियल आर, स्टेल्डर सोशल साइकोलॉजिस्ट हैं। अपनी किताब ‘द पावर ऑफ कॉन्टेक्स्ट’ में वह पूर्वाग्रह को छोड़ने और दूसरों से समझ बढ़ाने पर जोर देते हैं। उनके अनुसार,‘एक तो हम हड़बड़ी में सोचते हैं और दूसरा यह कि खुले मन से नहीं सोचते। उस राह को ढंग से देखना भी जरूरी है, जहां कदम रख रहे हैं। दूसरों को सुनना और उन्हें साथ लेना भी जरूरी है।’ यानी आंखें मूंदकर चलने, सोचने और भरोसा करने से कुछ हासिल नहीं होता।’ प्रोडक्टिविटी कोच गे्रस मार्शल कहती हैं,‘व्यस्त रहने का मतलब ज्यादा और सही काम करना नहीं है। अपनी एक्टिविटी को प्रोडक्टिविटी से जोड़ना भी जरूरी है।’

तो धीमे हो जाएं 
अंत में अपनी खुशी पर ध्यान दें। खुद को तनाव के भंवरों में फंसा पाएं तो धीमे हो जाएं। थोड़ा धीरे चलें, धीरे बोले, धीरे और गहरी सांस लेने लगें। लोगों से जुड़ने और छोड़ने, दोनों में ही जल्दबाजी न करें। ध्यान रखें, ज्यादातर काम और जीवन की बेहतरी का रास्ता तेज गति नहीं, संतुलित गति से चलने पर पूरा होता है।

न धीरे, ना तेज सुकून से बढ़ें 
ध्यान और व्यायाम: दिन की शुरुआत अपने साथ, अपनी सांसों के साथ करें।  केवल अपने साथ बैठें।  कोई राय, फैसला या चिंता ना करें। जो है, उसे वही रहने दें। व्यायाम भी करें।

मौन को गले लगाएं: हम चौबीस घंटे आवाजों के बीच रहते हैं। कुछ समय के लिए खुद को आवाजों के शोर से दूर करने की कोशिश करें। कुछ समय केवल मौन के संगीत को सुनें। मन शांत होगा। विचारों में स्पष्टता भी  आएगी। 

व्यवस्थित रहें, समेटते रहें: सही चीजों को सही जगह रखें। फालतू चीजें हटाते रहें। ज्यादा  बिखराव, काम व सोच को भी बिखरा देता है। कामों के अधूरे या छूटने की आशंका बढ़ती है। 

अहं को विराम दें: जितना अहं ज्यादा होगा, उतना समाज और दूसरों की स्वीकृति पाने में लगे रहेंगे। आप अपनी ऊर्जा उन चीजों, कामों और लोगों पर खपा रहे होंगे, जो आप चाहते ही नहीं। 

अच्छा पढ़ें व लिखें: हर रोज कुछ पढ़ने व लिखने की आदत बनाएं। प्रेरक  किताबें, ब्लॉग्स या सफल लोगों की कहानियां पढ़ें। लिखें कि दिन भर में क्या अच्छा हुआ, किसने किया और क्या हो सकता था। इससे अपनी सोच पर बेहतर पकड़ बना सकेंगे।

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