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कानून में बदलावः अब 5वीं और 8वीं में भी फेल हो सकते हैं बच्चे

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राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद केंद्र सरकार ने शिक्षा से जुड़े दो कानूनों को लागू करने की अधिसूचना जारी कर दी है। इन कानूनों को संसद में पिछले दिनों पारित किया गया था। इसमें एक शिक्षा के अधिकार कानून के तहत कक्षा पांच एवं आठ में बच्चों को फेल करने से संबंधित है। जबकि दूसरा शिक्षक प्रशिक्षण संस्थानों को पिछली तिथि से मान्यता देने को लेकर है।

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शिक्षा के अधिकार कानून में संशोधन के तहत अब यह प्रावधान किया गया है कि कक्षा पांच एवं आठ में बच्चों को फेल किया जा सकता है। जबकि पहले आठवीं तक किसी भी विद्यार्थी को फेल नहीं करने का कानून बना हुआ था। लेकिन फेल नहीं करने के कानून से यह पाया गया कि बच्चों पर इसका नकारात्मक असर हो रहा है। इसलिए नए कानून के तहत कक्षा पांच एवं आठ में अब परीक्षा ली जाएगी। यदि छात्र-छात्राएं इसमें फेल होते हैं, तो उन्हें दो महीने के भीतर एक और मौका दिया जाएगा। नए कानून में कहा गया है कि फेल करने के नियमों को लागू करने या नहीं करने का विकल्प राज्यों के पास होगा। 

हजारों शिक्षकों को भी राहत
दूसरा कानून राष्ट्रीय शिक्षण प्रशिक्षण परिषद (एनसीटीई) से जुड़ा है। एनसीटीई कानून में संशोधन करके शिक्षण प्रशिक्षण संस्थानों को तय शर्तों के तहत पिछली तिथि से मान्यता देने का प्रावधान किया गया है। दरअसल, सेवारत शिक्षकों ने बड़े पैमाने पर ऐसे संस्थानों से प्रशिक्षण प्राप्त किया था, जो उस समय मान्यता प्राप्त नहीं थे। लेकिन आरटीई के प्रावधानों के तहत उनका मान्यता प्राप्त होना जरूरी है। इसलिए हजारों शिक्षकों को राहत देते हुए उन्हें पिछली तिथि से मान्यता को मंजूरी दी है। इस कानून के लागू होने से सबसे ज्यादा फायदा उत्तराखंड में सेवारत शिक्षकों को हो रहा है।

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  • Web Title:students from 5th and 8th class can also be failed but implementation is in state governments hand