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स्कूलों ने किया सीबीएसई सिलेबस कम करने के फैसले का स्वागत

एजेंसी,नई दिल्लीPublished By: Pankaj Vijay
Thu, 09 Jul 2020 10:16 AM
स्कूलों ने किया सीबीएसई सिलेबस कम करने के फैसले का स्वागत

सीबीएसई द्वारा कोरोना महामारी को देखते हुए पाठ्यक्रम का बोझ कम करने के फैसले का विभिन्न स्कूलों के प्रतिनिधियों ने स्वागत किया है। हालांकि शिक्षाविदों के एक वर्ग ने आरोप लगाया कि यह कदम वैचारिक रूप से प्रेरित प्रतीत होता है। सीबीएसएई के अद्यदन पाठ्यक्रम के अनुसार धर्मनिरपेक्षता, राष्ट्रवाद, नागरिकता, नोटबंदी और लोकतांत्रिक अधिकारों से संबंधित कुछ पाठों एवं अन्य पाठों को पाठ्यक्रम से हटा दिया है। जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय (जेएनयू) के सामाजिक विज्ञान स्कूल में प्रोफेसर सुरजीत मजूमदार ने कहा, जो हटाया गया है, उसे देखते हुए ऐसा प्रतीत होता है इसमें कुछ वैचारिक तत्व हैं। 
    
दिल्ली विश्वविद्यालय में राजनीति विज्ञान के प्रोफेसर राजेश झा ने कहा कि जब पसंद आधारित क्रेडिट प्रणाली को विश्वविद्यालय में शुरू किया गया था तब राष्ट्रवाद और उपनिवेशवाद पर प्रश्नपत्र जो पहले अनिवार्य था उसे 2017 में वैकल्पिक बनाया गया था। दुर्भाग्य से राजनीतिक विचार शिक्षण पर हावी हो गए हैं। इससे अकादमिक गुणवत्ता प्रभावित होगी।

‘केवल एक बार के लिए किया गया है बदलाव’   
सीबीएसई ने पाठ्यक्रम में कमी किए जाने के बाद 11वीं से धर्म निरपेक्षता, राष्ट्रवाद, नागरिकता आदि पाठ्यक्रम से हटाए जाने के बारे में स्पष्टीकरण दिया है। कहा है कि सत्र 2020-21 के लिए कक्षा 9वीं से 12वीं तक के लगभग 190 विषयों के पाठ्यक्रम में बदलाव केवल एक बार के लिए किया गया है।  

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि सीबीएसई ने नागरिकता, संघवाद जैसे विषयों को हटाने का निर्णय किया है। मानव संसाधन विकास मंत्रालय से किसी भी कीमत पर महत्वपूर्ण अध्यायों को नहीं हटाये जाने की अपील करतीं हूं। 

दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि सीबीएसई की तरफ से पाठ्यक्रम कटौती के फैसले का स्वागत है। इस बात के शुरुआत से ही पक्षधर हूं। लेकिन पाठ्यक्रम में बदलाव का तरीका नहीं बताया गया है।

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