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RRC Group D Recruitment 2019: रेलवे ग्रुप डी 1 लाख भर्ती में इस पद्धति से मिलेंगे CBT में मार्क्स

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RRC Group D Recruitment 2019: आरआरसी ग्रुप डी की 1 लाख पदों पर भर्ती परीक्षा (सीबीटी) में आरआरबी ग्रुप डी भर्ती 2018 परीक्षा की तरह मार्क्स नॉर्मलाइजेशन की पद्धति ही अपनाई जाएगी। परीक्षार्थियों को नंबर देते समय मार्क्स नॉर्मलाइजेशन मेथड अपनाया जाएगा। सीबीटी के बाद अगला चरण पीईटी (शारीरिक दक्षता परीक्षा) होगा। सीबीटी में प्रदर्शन के आधार पर मार्क्स नॉर्मलाइजेशन पद्धति के जरिए मेरिट बनाई जाएगी। इसी मेरिट के आधार पर पीईटी में उम्मीदवार चयनित होंगे। रेलवे ने यह भी कहा है कि जरूरत पड़ने पर वह फॉर्मूले में बदलाव भी कर सकता है। इसके अलावा सीबीटी परीक्षा में नेगेटिव मार्किंग भी होगी। प्रत्येक गलत उत्तर के लिए एक तिहाई अंक काट लिया जाएगा। 

क्या होता है ‘नॉर्मलाइजेशन' पद्धति में
हर शिफ्ट में अलग-अलग सेट का प्रश्न पत्र होता है, कोई आसान तो कोई मुश्किल। कुछ उम्मीदवारों का पेपर काफी मुश्किल होता है, जबकि कुछ का बेहद आसान। ऐसी स्थिति को मार्क्स नॉर्मलाइजेशन की तरीका अपनाकर बैलेंस किया जाता है। नतीजतन यह होता है कि कठिन पेपर वालों के नंबर बढ़ते हैं और बेहद आसान पेपर वालों के नंबर कम होते हैं। इस तरह से स्थिति को बैलेंस किया जाता है।

RRB Recruitment 2019: रेलवे NTPC 35277 भर्ती में किए गए ये 7 बदलाव

ये होगा मार्क्स नॉर्मलाइजेशन का फॉर्मूला

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2018 में निकली RRB Group D की 63000 भर्तियों में भी थी यही पद्धति
RRB Group D की 63000 भर्तियों में मार्क्स नार्मलाइजेशन की पद्धति ही अपनाई गई। इस पद्धति से मार्किंग करने के बाद कई उम्मीदवारों के मार्क्स कुल मार्क्स 100 से भी ज्यादा पहुंच गए थे। आरआरबी ग्रुप डी रिजल्ट में कुछ उम्मीदवारों के कुल अंक (100) से अधिक मार्क्स आने पर काफी हंगामा मचा था। उम्मीदवार कह रहे हैं कि किसी के प्राप्तांक कुल अंक (100) से ज्यादा कैसे हो सकते हैं। इस पर रेलवे भर्ती बोर्ड (आरआरबी) ने स्पष्टीकरण देते हुए है कि ऐसा मुमकिन है। मार्क्स नॉर्मलाइजेशन के बाद कई बार उम्मीदवार के प्राप्तांक कुल अंक से भी ऊपर चले जाते हैं। ग्रुप डी के नोटिफिकेशन में पहले ही कह दिया गया था कि इस परीक्षा में मार्क्स नॉर्मलाइज किए जाएंगे।

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आरआरबी पिछले वर्ष 2000 से यानी 19 सालों से विभिन्न परीक्षाओं में इस Marks Normalization की पद्धति अपनाता आ रहा है। ऐसा कई बार हो चुका है कि कई उम्मीदवारों के अंक कुल अंकों से भी ऊपर चले गए। उम्मीदवार द्वारा प्राप्त किए रॉ मार्क्स उसके नार्मलाइज्ड मार्क्स तय करने में बेहद महत्वपूर्ण होते हैं।  

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