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24 जनवरी, 2021|3:06|IST

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RRB Group D भर्ती 2019: दिल्ली में छह दिन से भूख हड़ताल पर बैठे दिव्यांगों की तबीयत बिगड़ी

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आज यानी मंगलवार को अंतरराष्ट्रीय विकलांग दिवस ( International Day of Disabled Persons ) है लेकिन रेलवे की ग्रुप डी की भर्तियों ( RRB Group D Recruitment ) में कथित धांधली के खिलाफ सैकड़ों दिव्यांग मंडी हाउस चौराहे पर छह दिन से भूख हड़ताल कर रहे हैं। दिव्यांगों की हड़ताल सोमवार को भी जारी रही। ठंड के थपेड़ों के बीच भूखे पेट जमीन पर सोने की वजह से कई छात्र-छात्राओं की तबीयत खराब हो गई और उन्हें राम मनोहर लोहिया अस्पताल पहुंचाया गया है। प्रदर्शनकारियों में देश के अलग-अलग राज्य से आए हुए दिव्यांग अभ्यर्थियों का आरोप है कि भर्तियों में धांधली हुई है लेकिन रेलवे ने अभी तक जांच का आश्वासन तक नहीं दिया है। प्रस्तुत है दिव्यांगों की पीड़ा पर हेमवती नंदन राजौरा की रिपोर्ट। 

दर्द छलका
रो पड़े मंगल- आखिर जांच कराने में दिक्कत क्या है 

मंगल बिहार के आरा जिले से रेलवे की परीक्षा में कथित धांधली के खिलाफ प्रदर्शन में शामिल होने के लिए ट्रेन से 22 घंटे का सफर तय कर दिल्ली पहुंचे हैं। उनके पिता चाय की दुकान चलाते हैं। मंगल के चार भाई और तीन बहनें हैं । दिव्यांग मंगल पिछले सात दिनों से धरना स्थल पर खुले आसमान के नीचे बैठे हैं। रविवार शाम को अचानक उन्हें चक्कर आ गया और वह बेहोश होकर गिर गए। साथियों ने तुरंत राम मनोहर लोहिया अस्पताल पहुंचाया। उसके बाद उन्हें गंगाराम अस्पताल भेज दिया गया। डॉक्टरों का कहना है कि वे लगातार ठंड और ओंस के बीच बीच सोने की वजह से बीमार हो गए। मंगल ने लगभग रोते हुए कहा कि वे बस अपना हक मांग रहे हैं लेकिन वह भी नहीं मिल रहा। आखिर जांच कराने में क्या दिक्कत है। 

प्रमोद बोले, छह दिन से नहीं खाया तब भी कहां कोई सुन रहा 
गुजरात के सूरत से आए प्रमोद भगत छह दिन से भूखे हैं। जिद है कि भर्ती में कथित धांधली की जांच हो। रविवार देर रात वह बेहोश हो गए। उन्हें राम मनोहर लोहिया में भर्ती कराया गया। फिर अगले दिन उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई। प्रमोद भगत ने बताया कि वे बीकॉम करने के बाद पिछले चार साल से इस परीक्षा की तैयारी कर रहे थे। उनके पिताजी किसान हैं और घर में तीन भाई और दो बहनें हैं। पिताजी परिवार का खर्च काटकर उन्हें कोचिंग करा रहे थे। लेकिन भर्ती में धांधली की गई और परिणाम में उनका नाम नहीं आया। उन्होंने कहा कि छह दिन से भूखा हूं लेकिन तब भी कोई हमारी बात नहीं सुन रहा है। 

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भावना ने कहा, न्याय मिलने तक सबकुछ सहन करेंगे
मध्यप्रदेश के भोपाल से आईं भावना की आंखों में आंसू आ गए जब वह पिछले छह दिनों से ठंड में खुले आसमान के नीचे ठिठुरकर भूख हड़ताल करने की बात बता रही थीं। भावना ने कहा कि उनके पिता ड्राइवर हैं और बड़ी मुश्किल से पैसे बचाकर उन्हें छह महीने तक कोचिंग कराई लेकिन जब उन्हें पता चला कि रेलवे भर्ती में बड़े स्तर पर हेरफेर हुआ है तो वह परेशान हो गईं। भावना ने कहा कि इसके बाद वह पापा से न्याय के लिए लड़ने की बात कहकर दिल्ली आ गईं। उन्होंने बताया कि छह दिन से सड़क पर जमीन पर बैठ रही हैं। रात में ओंस से पूरी चादर गीली हो जाती है। वह कहती हैं, हम सबकुछ सहेंगे लेकिन न्याय मिलने तक नहीं हटेंगे। 

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प्रदर्शनकारी बोले- हमें विकलांग ही कहिए
छह दिनों से प्रदर्शन कर रहे दिव्यांग अभ्यर्थियों का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें दिव्यांग कहकर सम्मान देने के लिए कहा है लेकिन वे दिव्यांग नहीं कहलाना चाहते। उन्होंने कहा कि हमें विकलांग ही कहा जाए क्योंकि हमारा सम्मान तो दूर की बात, हमारी बात तक नहीं सुनी जा रही है। हम एक सप्ताह से भूखे-प्यासे बैठे हैं लेकिन किसी ने भी हमारी नहीं सुनी। हमें हमारा हक चाहिए, न कि झूठा सम्मान। 

संजय सिंह और गोपाल राय ने मुलाकात की 
आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह और दिल्ली सरकार के मंत्री गोपाल राय ने मंडी हाउस पर बैठे प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों से मुलाकात की। सांसद संजय ने उनकी मांगों को संसद में उठाने के साथ ही रेलमंत्री को इस मामले में पत्र लिखने की बात कही। वहीं गोपाल राय ने रेलवे के अधिकारियों और रेल मंत्री से बात कर छात्रों को न्याय दिलाने का भरोसा दिलाया। 

ये हैं आरोप 
1. 2018 में रेलवे भर्ती बोर्ड के ग्रुप डी की लिखित परीक्षा में कई अभ्यर्थी पास हुए लेकिन जब परिणाम आया तब कट ऑफ मार्क नहीं दिखाया गया था। उन्हें कहा गया था कि पहले डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन होगा। अभ्यर्थी डाक्यूमेंट बनवाने में जुट गए लेकिन कुछ दिन के बाद रेलवे ने भर्ती में सीट बढ़ा दी। फिर दोबारा नतीजा निकाला लेकिन इसमें कई सफल अभ्यर्थियों का नाम नहीं था।
2. विकलांगों के लिए चार प्रतिशत आरक्षण के हिसाब से भर्ती में सीट नहीं दी गई। सीट बढ़ाने के साथ कई नई कैटेगरी भी जोड़ी जाती है जिसमें मल्टीपल डिसेबल्ड एक कैटेगरी होती है। आवेदन के समय मल्टीपल डिसेबल्ड कैटेगरी के तहत बोथ लेग और बोथ हेड का विकल्प नहीं था तो रेलवे बोर्ड ने मल्टीपल डिसेबल्ड कैटेगरी में सीट बढ़ाकर उसका परिणाम कैसे दिखाया? 
3. नोटिफिकेशन के समय कई जोन में सीट ही खाली नहीं थीं जिसकी वजह से उम्मीदवारों ने वहां फॉर्म ही नहीं भरा था लेकिन जब सीट बढ़ाई गई तो कई जोन में सीट बढ़ा दी गई। सवाल है कि जिन जोन में फॉर्म ही नहीं भरा गया तो वहां सीट बढ़ाने के बाद नौकरी किसको दी जा रही है? जबकि बोर्ड परिवर्तन करने का विकल्प भी नहीं दिया गया था। 

नंबर गेम
- 06 दिनों से मंडी हाउस चौराहे पर भूख हड़ताल पर बैठे हैं सैकड़ों दिव्यांग अभ्यर्थी
- 2018 में हुई रेलवे भर्ती बोर्ड के ग्रुप डी की परीक्षा में धांधली का लगा रहे आरोप

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