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Rani Lakshmibai punyatithi : आज झांसी की रानी लक्ष्मीबाई की पुण्यतिथि, जानें उनके बारे में

लाइव हिन्दुस्तान टीम,नई दिल्लीPublished By: Pankaj Vijay
Fri, 18 Jun 2021 12:08 PM
Rani Lakshmibai punyatithi : आज झांसी की रानी लक्ष्मीबाई की पुण्यतिथि, जानें उनके बारे में

खूब लड़ी मर्दानी वह तो झांसी वाली रानी थी... रानी लक्ष्मीबाई के शौर्य और वीरता पर लिखी प्रसिद्ध कवयित्री सुभद्रा कुमारी चौहान की ये यादगार कविता आज भी युवाओं को देशभक्ति के जज़्बे से भर देने का काम करती है। आज (18 जून) नारी शक्ति की मिसाल देने वाली उसी रानी लक्ष्मीबाई की पुण्यतिथि है। झांसी की रानी लक्ष्मीबाई भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की ऐसी नायिका रहीं जिनके पराक्रम और साहस का जिक्र आज भी समय समय पर किया जाता है। रानी लक्ष्मीबाई ने अंग्रेजी हुकूमत के आगे कभी झुकना स्वीकार नहीं किया और आखिरी दम तक झांसी की रक्षा के लिए अंग्रेजों से लड़ती रहीं। 18 जून के दिन ही उन्होंने अपनी मातृभूमि की रक्षा के लिए हंसते-हंसते अपने प्राणों को न्योछावर कर दिया था। 

रानी लक्ष्मीबाई का पराक्रम और साहस आज की नारियों के लिए प्रेरणादायी है। रानी लक्ष्मीबाई का जन्म 19 नवंबर, 1828 को बनारस के एक मराठी ब्राह्मण परिवार में हुआ था।
 वह
 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में अंग्रेजी हुकूमत के विरुद्ध बिगुल बजाने वाले वीरों में से एक थीं। बचपन में उनका नाम मणिकर्णिका था और प्यार से उन्हें मनु कहकर बुलाया जाता था। बचपन से ही मनु शस्त्र-शास्त्र की शिक्षा लेने लगी थी। नाना साहेब और तात्या टोपे से उन्होंने घुड़सवारी और तलवारबाजी के गुर सीखे थे। साल 1842 में मनु का विवाह झांसी के नरेश गंगाधर राव नवलकर से हुआ। तब वह सिर्फ 12 साल की थीं। विवाह के बाद उन्हें लक्ष्मीबाई नाम मिला। विवाह के बाद उन्होंने राजकुंवर दामोदर राव को जन्म दिया लेकिन कुछ माह बाद ही उनके बच्चे का निधन हो गया। गंगाधर राव ने तब अपने छोटे भाई के पुत्र को गोद लिया और उसे दामोदर राव नाम दिया। 

कुछ समय बाद खराब स्वास्थ्य के चलते गंगाधर राव का निधन हो गया। अंग्रेज किसी भी तरह से झांसी को ब्रिटिश कंपनी का हिस्‍सा बनाने की साजिश में लगे थे। उन्‍होंने दामोदर राव को झांसी का वारिस मानने से इनकार कर दिया था। 

इसके बाद झांसी की बांगडोर लक्ष्मीबाई के हाथों में आ गई। तब अंग्रेज एक के बाद एक भारतीय रियासतों को अपने कब्जे में ले रहे थे। लेकिन रानी लक्ष्मीबाई ने साफ कह दिया था - 'मैं अपनी झांसी नहीं दूंगी'। 

महज 29 साल की उम्र में रानी लक्ष्मीबाई कई दिनों तक अपनी छोटी सी सेना के साथ अंग्रेजों से युद्ध लड़ती रहीं। इस दौरान उन्होंने अंग्रेजों के दांत खट्टे कर दिए। उनकी वीरता आज भी करोड़ों लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

रानी लक्ष्मीबाई की पुण्यतिथि पर उन्हें देश में हर जगह याद किया जा रहा है। 

 

रानी लक्ष्मी बाई से जुड़े खास कोट्स (Rani Lakshmi Bai Quotes)-
मुर्दों में भी जान डाल दे,
उनकी ऐसी कहानी है
वो कोई और नहीं,
झांसी की रानी हैं

अपने हौसले की एक कहानी बनाना,
हो सके तो खुद को झांसी की रानी बनाना।

दूर फिरंगी को करने की सबने मन में ठानी थी,
चमक उठी सन सत्तावन में वह तलवार पुरानी थी
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वो तो झाँसी वाली रानी थी।

मातृभूमि के लिए झांसी की रानी ने जान गवाई थी,
अरि दल कांप गया रण में, जब लक्ष्मीबाई आई थी।

हर औरत के अंदर है झाँसी की रानी,
कुछ विचित्र थी उनकी कहानी
मातृभूमि के लिए प्राणाहुति देने को ठानी,
अंतिम सांस तक लड़ी थी वो मर्दानी।

रानी लक्ष्मी बाई लड़ी तो,
उम्र तेईस में स्वर्ग सिधारी
तन मन धन सब कुछ दे डाला,
अंतरमन से कभी ना हारी।

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