PCS 2018 main exam starts tough idioms asked in Hindi paper - पीसीएस 2018 मुख्य परीक्षा शुरू, हिन्दी के पेपर में पूछे गए ऐसे कठिन मुहावरे DA Image
20 नबम्बर, 2019|10:29|IST

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पीसीएस 2018 मुख्य परीक्षा शुरू, हिन्दी के पेपर में पूछे गए ऐसे कठिन मुहावरे

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उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की पीसीएस 2018 मुख्य परीक्षा शुक्रवार से शुरू हो गई। पहली बार यह परीक्षा बदले पैटर्न और पाठ्यक्रम पर हो रही है। पहले दिन सामान्य हिन्दी और निबंध का पेपर हुआ, जिसमें बदलाव नहीं किया गया है। उम्मीद थी कि पैटर्न और पाठ्यक्रम में बदलाव का असर इन दोनों पेपर पर भी दिखेगा लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

दोनों पेपर कमोवेश पिछली परीक्षाओं जैसे ही थे। पहली पाली में हुई सामान्य हिन्दी की परीक्षा के दौरान अभ्यर्थी मुख्य सचिव की भूमिका में नजर आए क्योंकि एक प्रश्न में इन्हें अधिसूचना को परिभाषित करते हुए मुख्य सचिव की ओर से शिक्षकों की सेवानिवृत्ति वय बढ़ाने के संदर्भ में अधिसूचना का प्रारूप तैयार करने को कहा गया था। एक अन्य प्रश्न में अभ्यर्थियों ने उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग लखनऊ की ओर से केंद्र के स्वास्थ्य मंत्रालय के सचिव के लिए कुपोषण से जूझते बच्चों के इलाज को पूर्व में मांगी गई सहायता यथाशीघ्र स्वीकृत करने के लिए अर्धसरकारी पत्र का प्रारूप तैयार किया।

फूहड़ चाले, नौ घर हाले
सामान्य हिन्दी के पेपर में परीक्षार्थियों को मुहावरों/लोकोक्तियों ने सबसे ज्यादा उलझाया। 30 नंबर के इस प्रश्न में दस मुहावरे/लोकोक्तियां दी गई थीं, जिसका अर्थ स्पष्ट करते हुए इनका वाक्यों में प्रयोग करना था। फूहड़ चाले, नौ घर हाले, गुरु कीजे जान के, पीने पीजे छान के, कर खेती परदेस को जाए, वाको जनम अकारण जाए जैसे मुहावरों/लोकोक्तियों ने परीक्षार्थियों को काफी परेशान किया। इस पेपर में दो गद्यांश दिए गए थे, जिन्हें पढ़कर उत्तर देना था। अधिसूचना और अर्धसरकारी पत्र के अलावा उपसर्ग/प्रत्यय, विलोम शब्द, वाक्यों को शुद्ध करने के साथ ही दिए गए वाक्यांश के लिए एक शब्द भी लिखना था। 

बदले पैटर्न पर आज से जीएस का पेपर
बदले हुए पैटर्न पर सामान्य अध्ययन (जीएस) प्रथम और द्वितीय प्रश्न पत्र की परीक्षा शनिवार और तृतीय और चतुर्थ प्रश्न पत्र की परीक्षा रविवार को होगी। पूर्व में जीएस के दो पेपर होते थे, जिसमें बहुविकल्पीय प्रश्न पूछे जाते थे लेकिन अब इसके पेपर की संख्या चार हो गई है और सभी में दीर्घ उत्तरीय प्रश्न पूछे जाएंगे। इसके लिए शब्द सीमा भी तय रहेगी। तय शब्द से ज्यादा नहीं लिखना होगा। प्रयागराज में 24 और लखनऊ में 17 केंद्रों पर हुई परीक्षा में मुख्य परीक्षा के लिए सफल किए गए 19258 परीक्षार्थियों में से 91 प्रतिशत शामिल हुए। सचिव जगदीश ने बताया कि परीक्षा शांतिपूर्वक हुई।

सभी प्रमुख क्षेत्रों से जुड़े थे निबंध
दूसरी पाली में हुआ 150 अंकों का निबंध का पेपर तीन खंडों में विभाजित था, हर खंड में तीन-तीन निबंध दिए गए थे। इनमें से किसी एक निबंध को हिन्दी, अंग्रेजी या उर्दू में 700 शब्दों में लिखना था। निबंध विज्ञान, आतंकवाद, सीमा सुरक्षा, विदेश नीति, साहित्य, सामाजिक दायित्व जैसे लगभग हर क्षेत्र से पूछे गए थे। पहले खंड में साहित्य का सामाजिक दायित्व, हिन्दी भाषा राष्ट्रीय एकता का प्रतीक है और शिक्षा और नैतिक शिक्षा में से किसी एक विषय पर निबंध लिखना था तो दूसरे खंड में अंतरिक्ष की दुनिया में भारत की प्रगति, महात्मा गांधी आज भी प्रासंगिक हैं और हरित क्रांति जीवन के लिए आवश्यक है में से किसी एक पर निबंध लिखना था। तीसरे खंड में वैश्विक आतंकवाद की समस्या: कारण और निदान, भारत की विदेश नीति शांति और समानता के सिद्धांत पर आधारित है तथा सीमा सुरक्षा बल हमारी राष्ट्रीय संप्रभुता के मुख्य कारक हैं, में से किसी एक विषय पर निबंध लिखना था।

सीसीटीवी कैमरे की निगरानी में परीक्षा
परीक्षा केंद्रों पर हर कमरे में सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैँ। परीक्षा अवधि के दौरान सभी कमरों की रिकार्डिंग की गई। सुरक्षा के लिहाज से सभी केंद्रों पर पुलिस बल के साथ ही आयोग की ओर से पर्यवेक्षक तैनात रहे। 

बोले परीक्षार्थी-
दोनों पेपर पिछली परीक्षाओं की तुलना में आसान थे, प्रश्न तार्किक रहे। निबंध के लिए निर्धारित विषय में भी तर्कशक्ति को अहमियत दी गई है।- रश्मि, प्रयागराज

हिन्दी के दो मुहावरे काफी कठिन थे, बाकी दोनों पालियों का पेपर सरल था।-रूबी, दिल्ली

पेपर की अच्छी बात यह थी कि ज्यादातर निबंध समसामयिक मुद्दों पर आधारित थे।- छवि, हरिद्वार

पिछली परीक्षाओं की तुलना में पेपर आसान था, निबंध भी अच्छे पूछे गए थे।  विवेक सिंह, प्रतापगढ़

निबंध का पेपर काफी अच्छा था। राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ ही आतंकवाद और अंतरिक्ष विज्ञान पर निबंध लिखने को आया था।- गौरव कुमार, प्रयागराज
 

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