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Parakram Diwas 2022 : नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 125वीं जयंती पर देखिए Speech आइडिया

Subhash Chandra Bose Jayanti Speech, Parakram Diwas 2022 : महान स्वतंत्रता सेनानी नेताजी सुभाष चंद्र बोस की याद में कृतज्ञ राष्ट्र उनकी जयंती हर साल 23 जनवरी को पराक्रम दिवस के रूप में...

Parakram Diwas 2022 : नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 125वीं जयंती पर देखिए Speech आइडिया
Alakha Singhलाइव हिन्दुस्तान टीम,नई दिल्लीSun, 23 Jan 2022 07:19 AM

Subhash Chandra Bose Jayanti Speech, Parakram Diwas 2022 : महान स्वतंत्रता सेनानी नेताजी सुभाष चंद्र बोस की याद में कृतज्ञ राष्ट्र उनकी जयंती हर साल 23 जनवरी को पराक्रम दिवस के रूप में मनाता है। इस वर्ष 2022 में सुभाष चंद्र बोस की 125वीं जयंती मनाई जा रही है। नेताजी सुभाष चंद्र बोस का जन्म 23 जनवरी 1897 को ओडिशा, बंगाल डिविजन के कटक में हुआ था। बोस के पिता का नाम जानकीनाथ बोस और मां का नाम प्रभावती था। सुभाष चंद्र बोस के पिता जानकीनाथ बोस पेशे से वकील थे और उनकी माता प्रभावती देवी धार्मिक व घरेलू महिला थी। नेताजी की प्रारंभिक पढ़ाई कटक के रेवेंशॉव कॉलेजिएट स्कूल में हुई। इसके बाद उनकी शिक्षा कोलकाता के प्रेजीडेंसी कॉलेज और स्कॉटिश चर्च कॉलेज से हुई। इसके बाद भारतीय प्रशासनिक सेवा (इंडियन सिविल सर्विस) की तैयारी के लिए उनके माता-पिता ने बोस को इंग्लैंड के केंब्रिज विश्वविद्यालय भेज दिया था। उन्होंने 1920 में इंग्लैंड में सिविल सर्विस परीक्षा पास की लेकिन भारतीय स्वतंत्रता संघर्ष में हिस्सा लेने के लिए उन्होंने जॉब छोड़ दी थी। सुभाष चंद्र बोस बचपन से ही भारतीय स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े आंदोलनों में हिस्सा लेते रहे थे। नेताजी सुभाष चंद्र बोस बचपन से ही स्वामी विवेकानंद और रामकृष्ण की शिक्षाओं से प्रभावित थे। 

नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती के मौके पर स्कूल-कॉलेज में नेताजी सुभाष चंद्र बोस पर भाषण प्रतियोगिता, निबंध प्रतियोगिता का आयोजन किया जाता है। ऐसे में यदि आपको भी नेताजी सुभाष चंद्र बोस पर अपने स्कूल/कॉलेज में  भाषण देना है तो हम आपकी मदद के लिए यहां पर उनके जीवन तथ्यों से जुड़ा भाषण दे रहे हैं जिसके मदद से आप अपने स्कूल/कॉलेज में भाषण देकर एक अच्छा प्रभाव छोड़ सकते हैं।

सुभाष चंद्र बोस जयंती पर भाषण ( Subhash Chandra Bose Jayanti Speech 2022):
भारत माता की आजादी  के लिए 'तुम मुझे खून दो, मैं तुम्‍हें आजादी दूंगा....!', जय हिन्द! जैसे नारों से देश के लाखों क्रांतिकारियों के दिलों की धड़कन बने नेताजी सुभाष चंद्र बोस बचपन से ही राष्ट्रवादी गतिविधियों में भाग लेते थे। अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ में चल रही गतिविधियों में शामिल होने के कारण एक बार उन्हें कॉलेज से निष्कासित कर दिया गया था। लेकिन वह इससे भी अपना रास्ता नहीं बदला।

कॉलेज के बाद उनके माता-पिता ने उन्हें इंडियन सिविल सर्विसेज की तैयारी के लिए इंग्लैंड के कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय भेजा। 1920 में उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा पास की, लेकिन अप्रैल 1921 में उन्होंने भारत में चल रहे आंदोलनों में शामिल होने के कारण अपने पद से इस्तीफा दे दिया और आजादी के आंदोलन में शामिल हो गए।

नेताजी सुभाष चंद्र बोस महात्मा गांधी के असहयोग आंदोलन में शामिल हो गए। नेताजी को महात्मा गांधी ने बंगाल में एक राजनीतिज्ञ रंजन दास के अधीन काम करने की सलाह दी। नेताजी ने वहां एक युवा शिक्षक, पत्रकार और बंगाल कांग्रेस के स्वयंसेवकों के रूप में अपनी सेवाएं दी। लेकिन शासन के खिलाफ गतिविधियों में शामिल होने के कारण अंग्रेज सरकार ने उन्हें गिरफ्तार कर जेल में  डाल दिया। इसके बाद 1924 में जेल से लौटने के बाद सुभाष चंद्र बोस एक बार फिर कांग्रेस से जुड़ गए। 

1930 में जब महात्मा गांधी ने सविनय अवज्ञा आंदोलन शुरू किया सुभाष चंद्र बोस को एक बार फिर हिरास में ले लिया गया। कुछ समय बाद वह रिहा हुए तो अंग्रेजों के खिलाफ हिंसक गतिविधियों में संदिग्ध होने के कारण उन्हें कई बार गिरफ्तार किया गया, लेकिन खराब स्वास्थ्य के चलते उन्हें रिहा कर दिया गया।

इसके बाद 1938 में उन्हें भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का अध्यक्ष चुना गया। इसी प्रकार से स्वतंत्रता आंदोलन को गर्म दल के लोगों को लेकर उन्हें फॉरवर्ड ब्लॉक का गठन किया जिसे लेकर उन्हें एक बार फिर जेल में डाल दिया गया। लेकिन आमरण अनशन के चलते उन्हें रिहा कर दिया गया।

इसी मौके का फायदा उठाते हुए नेताजी सुभाष चंद्र बोस 26 जनवरी 1941 को वह काबुल के रास्ते मॉस्को और बाद में जर्मनी पहुंच गए। यहां उन्होंने जनवरी 1942 में आज़ाद हिंद रेडियो से कई भाषाओं में नियमित प्रसारण शुरू किया।

इसके कुछ समय बाद वह जापान पहुंच गए और यहां पर 1 सितंबर 1942 को आजाद हिन्द फौज (Indian National Army) का गठन किया। इसके बाद अक्टूबर 1942 में उन्होंने अंतिरिम स्वतंत्र भारत सरकार के गठन की घोषणा की।

आजाद हिंद फौज जापानी सैनिकों के साथ रंगून के लिए रवाना हुई और वहां से भारत में पहुंच गई। इसी बीच जापान के आत्मसमर्पण की घोषणा के बाद सुभाष चंद्र बोस दक्षिण पूर्व एशिया जा रहे थे, तभी कथित विमान दुर्घटना 18 अगस्त 1945 में उनका निधन हो गया।

धन्यवाद, जय हिन्द
 

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