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सुपर 30 ही नहीं यहां भी मिलती है Free में UPSC , JEE , NEET की कोचिंग

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आमतौर पर देश और दुनिया में ‘सुपर-30’ के नाम से ही लोग यह जानते हैं कि बिहार में विपन्न स्थिति में रह रहे गरीबों के बच्चों को मुफ्त में कोचिंग देकर उन्हें इंजीनियर बनाया जाता है लेकिन आमधारणा के विपरीत यहां कई ऐसे कोचिंग संस्थान हैं, जो गरीब बच्चों को मुफ्त में शिक्षा देकर उन्हें उनके सपनों तक पहुंचाने का काम कर रहे हैं। आनंद कुमार ने 2002 में बिहार के पूर्व डीजीपी अभ्यानंद के साथ मिलकर सुपर-30 की नींव रखी थी लेकिन अभ्यानंद कई साल पहले ही सुपर-30 को अलविदा कहकर ऐसे कई संस्थानों की नींव रख चुके हैं जिनमें गरीब बच्चों को उसी तरह की कोचिंग दी जाती है, जिस तरह से सुपर-30 में बच्चों को दी जाती है। यहीं नहीं, उनके संस्थान से कई बच्चे आईआईटी में सफल भी हो चुके हैं। हालांकि वे मीडिया के ग्लैमर से दूर रहते हैं। इसलिए इनके संस्थानों की चर्चा बहुत कम ही होती है। 

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कई संस्थानों से जुड़े हैं अभ्यानंद 
2007 में आनंद कुमार के साथ अपनी राह अलग करने के बाद अभ्यानंद ने शिक्षाविद मौलाना वली रहमान के साथ मिलकर रहमानी -30 से जुड़ गए। यहां पर भी गरीब मुस्लिम विद्यार्थियों को मुफ्त में कोचिंग देकर इनके आईआईटी के सपने को साकार किया जाता है। इसके अलावा अभ्यानंद रिटायरमेंट के बाद खुद को अभ्यानंद सुपर-30 खोले हुए हैं। इसके अलावा भारत सरकार के कई पीएसयू कंपनी द्वारा स्थापित इसी तरह के संस्थानों को वे निर्देशित भी करते हैं।  

‘अभ्यानंद सुपर-30’ में मेडिकल की भी तैयारी 
2014 में रिटायरमेंट के बाद बिहार के पूर्व डीजीपी अभ्यानंद ने 2015 में ‘अभ्यानंद सुपर-30’ की स्थापना की।  यहां से 32 विद्यार्थी आईआईटी में दाखिला ले चुके हैं। ‘अभ्यानंद सुपर-30’ इसी साल से अब मेडिकल की भी मुफ्त में तैयारी करा रहा है। यहां दाखिला के लिए दुर्गापूजा के बाद आवेदन लिया जाता है और दिसंबर के तीसरे रविवार को प्रवेश परीक्षा आयोजित होती है। अभ्यानंद सुपर -30 की अपनी वेबसाइट www.abhyanandsuper30.org है। यहां छात्रों के रहने और खाने का भी मुफ्त में ही प्रबंध होता है।

गरीब मुस्लिमों के लिए ‘रहमानी 30’ 
यहां गरीब मुस्लिमों को ‘रहमानी 30’ में मुफ्त में कोचिंग दी जाती है। मौलान वली रहमान ने इसकी स्थापना की थी। यह संस्थान इंजीनियरिंग के साथ-साथ मेडिकल की भी तैयारी कराता है। इस बार नीट में सौ फीसदी सफलता मिली है। 

आईएएस, आईपीएस की भी कोचिंग
शहर के मशहूर शिक्षाविद डॉ. एम. रहमान ने 20008 में अपनी बेटी अदम्या अदिति के नाम पर गुरुकुल की स्थापना की। इस गुरुकुल में भी उन्हीं को मौका दिया जाता है जिनके माता-पिता बेहद गरीबी में जीवन जी रहे हैं और उनके लिए किसी सरकारी नौकरी में जाना सपने की तरह है। डॉ रहमान सिर्फ 11 रुपये लेकर इस गुरुकुल में विद्यार्थियों का दाखिला लेते हैं। जिन छात्रों को हॉस्टल में रहने का सामर्थ्य नहीं होता, उन्हें वे खुद हॉस्टल खर्च देते हैं। इनके गुरुकुल से अब तक 8 आइएएस और 7 आईपीएस बन चुके हैं। इसके अलावा अन्य कई नौकरियों में अदम्या-अदिति गुरुकुल के विद्यार्थी जा चुके हैं।

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