DA Image
14 सितम्बर, 2020|10:51|IST

अगली स्टोरी

NEP 2020: राष्ट्रीय शिक्षा नीति का शशि थरूर ने किया स्वागत, गिनाईं चुनौतियां

shashi tharoor reaction on new education policy 2020

National Education Policy 2020: कांग्रेस ने और पूर्व एचआरडी मंत्री शशि थरूर ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) का स्वागत किया है, लेकिन इसे इसे पहले संसद में न लाने के लिए सरकार से सवाल भी पूछे हैं। उन्होंने अपने कई ट्वीट के जरिए उन्होंने भाजपा नेतृत्ववाली सरकार पर कई सवाल खड़े किए।

उन्होंने ट्वी किया, एचआरडी मंत्री डॉ रमेश पोखरियाल निशंक द्वारा ऐलान की गई नई शिक्षा नीति 2020 ( #NewEducationPolicy2020 ) में हमने देखा, उसमें काफी कुछ स्वागत करने योग्य है। हममें से कुछ लोगों ने कई सुझाव दिए थे, ऐसा लगता है नई शिक्षानीति में उन सुझावों पर ध्यान दिया गया है। हालांकि लेकिन यह सवाल बना हुआ है कि इसे पहले संसद में क्यों नहीं लाया गया। 

इसके बाद शशि थरूर ने शिक्षानीति की विशेषताएं बताई जिसमें कुछ जरूरी चुनौतियां गिनाई गईं। उन्होंने कहा सरकार को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि जो योजनाएं बनती हैं उन्हें लागू भी किया जाना चाहिए।

कांग्रेस नेता थरूर ने कहा, 'मैं 1986 से चली आ रही शिक्षा नीति में संशोधन की वकालत अपने मानव संसाधन विकास मंत्री रहने के टाइम से कर रहा हूं। जिससे कि इसे 21वीं सदी के संदर्भ में तैयार किया जा सके। मुझे खुशी है कि मोदी सरकार ने अंतता मौके का लाभ लिया और नई शिक्षानीति लाई। हालांकि इसे भी आने में सरकार में 6 साल लगा दिए। अब चुनौती है कि जैसी नीति बनी वैसी वह लागू भी हो पाए।

 

 

मौजूदा सरकार द्वारा शिक्षा पर किए जा रहे खर्च पर बात करते हुए उन्होंने कहा, उच्च शिक्षा में नामांकन लक्ष्य 50 फीसदी और माध्यमिक में 100 फीसदी रखना प्रशंसनीय है लेकिन जब आप देखेंगे तो पाएंगे कि वर्तमान में 25.8 फीसदी छात्र ही उच्च शिक्षा में और 68 फीसदी छात्र कक्षा 9 में नामांकन कराते हैं। पेरिस सोलर एनर्जी को लेकर सरकार जो प्रतिबध्दता दिखाती है वैसा शिक्षा के मामले में नहीं, जो कि हैरान करने वाला है।

उन्होंने आगे कहा कि 1948 से सरकारों का यह लक्ष्य रहा है कि जीडीपी का 6 फीसदी हिस्सा शिक्षा में खर्च किया जाना चाहिए। हर सरकार यह लक्ष्य बनाती है और फिर अपने ही वित्तमंत्रालय के खिलाफ काम करती है।  मोदी सरकार के पिछले 6 सालों देखा जाए तो वास्वत में शिक्षा में किए जाने वाले खर्च में कटौती की गई है। अब सवाल है कि यह खर्च 6 फीसदी कैसे पहुंचेगा ?

उन्होंने  कहा नेशनल एजुकेशन पॉलिसी की रिसर्च के लिए और ज्यादा वास्तविक लक्ष्य निर्धारण की आवश्यकता है। भारत में शोध और नवोन्मेषण में 2008 में जीडीपी का कुल् 0.84% भाग था जो कि 2018 में घटकर 0.6% ही रह गया। आज भारत में प्रति एक लाख की जनसंख्या में कुल 15 शोधार्थी ही हैं। जो कि चीन में यह संख्या 111 है।

आपको बता दें कि केंद्रीय कैबिनेट ने 28 साल बाद नई शिक्षा नीति को मंजूरी दी है। इसमें प्राइमरी लेवल की शिक्षा स्थानीय भाषा में देने की अनुशंसा की गई है। साथ विदेशी विश्वविद्यालय के भारत आने को आसान किया गया है, उच्च शिक्षा के लिए एक नियामक संस्था बनाने का भी निर्णय लिया गया है। इसके अलावा बोर्ड परीक्षाओं को आसान बनाने के कदम उठाए गए हैं।

नई शिक्षा नीति में बदला शिक्षा पैटर्न:

नई शिक्षा नीति पर सरकार ने मुहर लगाते हुए मौजूदा शिक्षा पैटर्न में जो बदलाव किया है वह सबसे अहम है। नई नीति में 10+2 के स्थान पर 5+3+3+4 का पैटर्न बनाया गया है। पहले का शिक्षा पैटर्न कोठारी आयोग की रिपोर्ट के आधार पर बनाया गया था जिसमें प्राइमरी, माध्यमिक और उच्च शिक्षा के लिए 10+2+3 की नीति अपनाई गई थी। इसमें बदलाव करते हुए सरकार ने 10+2 (12 साल) को बदलाकर 5+3+3+4 (15 साल) कर दिया है। इसमें सरकार ने तीन साल नर्सरी के भी जोड़े हैं। यानी 12वीं पहुंचने के लिए पहले छात्र को 12 साल पढ़ना होता था लेकिन अब 15 साल पढ़ना होगा। नई शिक्षा नीति में कक्षा 2 तक की शिक्षा को रटाने की बजाए एक्टीविटी आधारित बनाने का फैसला किया गया है जो कि छोटे बच्चों को काफी राहत देने वाला है।

  • Hindi News से जुड़े ताजा अपडेट के लिए हमें पर लाइक और पर फॉलो करें।
  • Web Title:NEP 2020: Shashi Tharoor welcomes National Education Policy count challenges