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NEET UG : मेरा नीट में कुछ नहीं हो सकता, बांधी किताबें; 600 से अधिक अंक वाले भी डिप्रेशन में डूबे

नीट परीक्षा के विवादों में घिरने के बाद देशभर में नीट अभ्यर्थियों में ऊहापोह की स्थिति है। छात्र अवसाद में चले गए हैं। सामान्य काउंसलिंग छात्रों को अवसाद से बाहर नहीं निकाल पा रहा है।

NEET UG : मेरा नीट में कुछ नहीं हो सकता, बांधी किताबें; 600 से अधिक अंक वाले भी डिप्रेशन में डूबे
Pankaj Vijayहिन्दुस्तान ब्यूरो,नई दिल्लीThu, 20 Jun 2024 08:32 AM
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नीट में कथित फर्जीवाड़ा किशोरों को अवसाद दे रहा है। दो-तीन साल से नीट की तैयारी में जुटे छात्रों का पढ़ाई से मन उचट रहा है। कई बच्चों ने पढ़ाई बंद कर दी है। सीबीएसई के काउंसलिंग सेल पर ज्यादातर मामलों में किशोरों का आत्मविश्वास बुरी तरह खत्म होना सामने आ रहा है। कुछ छात्रों की स्थिति इतनी गंभीर है कि सेल के एक्सपर्ट द्वारा लगातार काउंसलिंग किए जाने के बाद उन्हें क्लिनिकल काउंसलिंग के लिए भी भेजना पड़ रहा है। काउंसलिंग सेल में राजस्थान, दिल्ली, यूपी, बिहार, एमपी, उत्तराखंड, झारखंड आदि से लगातार कॉल आ रही हैं। कई बच्चे बता रहे हैं कि वे अब तैयारी ही नहीं करना चाहते। रोज औसतन सौ कॉल नीट से संबंधित ही आ रही हैं। छात्र पूछते हैं कि अब आगे करियर के लिए क्या करें?

बिहार के समस्तीपुर की एक छात्रा के साथ उसकी मां भी अवसाद में है। छात्रा कोटा में रहकर तैयारी कर रही थी। पिता ने काउंसलर को बताया कि उसने किताबें बांधकर रख दी हैं। कह रही कि किसी और कोर्स में नामांकन करा दीजिए। मेरा नीट में कुछ नहीं हो सकता। डॉ. कुमार ने बताया कि उसके अवसाद की स्थिति इतनी गंभीर थी कि उसे क्लिनिकल काउंसलिंग को भेजना पड़ा। स्थित यह है कि नीट में 600 अंक लाने वाले भी हताशा के शिकार हो रहे हैं।

छात्र परेशन
1. डीएवी बीएसईबी का छात्र पियुष कुमार (बदला हुआ नाम) नीट प्रवेश परीक्षा में शामिल हुआ था। उसे अपेक्षा के अनुसार कम मार्क्स मिले हैं। नीट विवाद के बाद पीयूष मानसिक तनाव में है। वह उदास रहता है। उसने कई बार सीबीएसई टेली काउंसिलिंग के पास फोन भी किया है।

2. लोयोला हाई स्कूल का छात्र राहुल सिंह (बदला हुआ नाम) आश्वस्त थे कि नीट में अच्छे अंक आएंगे। पर रिजल्ट के बाद उन्हें कम अंक मिले। इस वजह से वह मानसिक तनाव में है। उन्होंने सीबीएसई टेली काउंसिलिंग में फोन कर जानना चाहा कि अब आगे उनके साथ क्या होगा।

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अभिभावकों की चिंताएं
मुझे अपने बच्चे को मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी कराने में काफी रकम खर्च करनी पड़ी। अगर नीट की परीक्षा में धांधली ही करनी थी तो हजारों बच्चों को गुमराह क्यूं किया जा रहा है। अभिषेक आनंद, बोरिंग रोड, पटना

विदेश में पढ़ाई के विकल्प की तलाश कर रहे
देहरादून। नीट के विवादों में आने बाद छात्र और अभिभावक विदेश से मेडिकल की पढ़ाई के विकल्प भी तलाश रहे हैं। सीबीएसई काउंसलर डॉ. सोना कौशल गुप्ता के मुताबिक सीबीएसई की काउंसलिंग सेल तो बंद हो चुकी है, पर उन्हें व्यक्तिगत तौर पर नीट विवाद के बाद 50 से ज्यादा कॉल आ चुकी हैं।

पढ़ाई की जगह परिवार की स्थिति पर कर रहे बात : कुमुद श्रीवास्तव
सीबीएसई की लखनऊ ब्रांच की काउंसलर कुमुद श्रीवास्तव बताती हैं कि किशोरों की मानसिक स्थिति यह हो गई है कि वे अब पढ़ाई की जगह अपने परिवार की दयनीय स्थिति और संघर्ष को लेकर बात करना चाहते हैं। कई बच्चे इतने अवसाद में हैं कि उनके अभिभावकों के साथ उनका तीन घंटे का सत्र करना पड़ रहा है।

डॉ. प्रमोद कुमार और कुमुद के अनुसार उनका फोकस बच्चों को इस स्थिति से बाहर निकालना है। उन्हें बताया जा रहा है कि मेधा का महत्व है। साथ ही उन्हें विभिन्न कोर्स की जानकारी दी जा रही है। नीट में ज्यादातर ऐसे छात्र जिन्हें 600 से अधिक अंक मिले हैं, वह अवसाद में हैं। कोई केंद्रीय व्यवस्था न होने के कारण ऐसे कोई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है, जहां छात्र स्थानीय स्तर पर मनोवैज्ञानिकों को फोन कर रहे हों। वे कोचिंग शिक्षकों के संपर्क में हैं।

जिस तरह से माहौल बनाया जा रहा है उससे चिंता है कि कहीं परीक्षा दोबारा ना हो। इससे मनोबल टूट जाएगा। - हयात सिंह, नीट पास छात्र के पिता

काउंसलिंग रोकना सही बात नहीं है। जहां गड़बड़ी हुई है, उन सेंटर पर दोबारा परीक्षा करवाना सही है।- वरीशा, नीट पास अभ्यर्थी, देहरादून

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परीक्षा में बैठने के लिए अंतिम अवसर मिलने वाले हताश
प्रयागराज के कॉल्विन अस्पताल स्थित मानसिक कक्ष में तीन छात्र संपर्क कर चुके हैं। मनोचिकित्सक डॉ. राकेश पासवान ने बताया कि फोन करने वाले छात्रों और उनके परिजनों की अस्पताल में काउंसिलिंग की जा रही है। एक छात्र ने बताया कि इस बार नीट-यूजी में उनका अंतिम अवसर था। मुझे पूरी आशा थी कि चयन हो जाएगा। छात्र फोन करते-करते रोने लगा। कह रहा था कि अब जीवन में कुछ नहीं कर पाऊंगा। मेरा कॅरियर बर्बाद हो गया। छात्र की अवसादपूर्ण स्थिति को देखते हुए उसे और मम्मी को अस्पताल बुलाकर तीन बार काउंसिलिंग की जा चुकी है।

30 फीसदी कोचिंग संस्थान छोड़कर घर लौटै
सीबीएसई की ओर से बिहार-झारखंड के लिए नियुक्त काउसंलर डॉ. प्रमोद कुमार बताते हैं कि कॉल करने वाले विद्यार्थियों में लगभग 30 फीसदी कोचिंग संस्थान छोड़कर घर लौट गए हैं। रांची के अभ्यर्थी विनायक कुमार ने कहा कि अब उम्मीद पर पानी फिर गया है।

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