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NEET 2018: CBSE अगर सुप्रीम कोर्ट गई तो ये होंगी उसकी दलीलें, केस को बना सकती हैं मजबूत

neet 2017

तमिल माध्यम से नीट देने वाले छात्र-छात्रों को 196 अंक अतिरिक्त देने के मद्रास हाईकोर्ट के फैसले से हड़कंप मचा हुआ है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने गुरुवार को नीट यूजी की काउंसिलिंग पर रोक लगा दी। साथ ही दूसरी काउंसिलिंग के नतीजे भी रोक दिए गए हैं। अब सुप्रीम कोर्ट से आदेश के बाद ही दोबारा काउंसिलिंग होगी। 

स्वास्थ्य मंत्रालय के एक अधिकारी ने ‘हिन्दुस्तान' से कहा कि अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल से कानूनी सलाह ली गई। उनका कहना था कि आदेश का अक्षरश: पालन करने पर ऑल इंडिया मेरिट सूची में परिर्वतन होगा और काउंसिलिंग में तमिलनाडु के 15 कॉलेज हैं। ऐसे में भले स्वास्थ्य मंत्रालय को आदेश न मिला हो, लेकिन काउंसिलिंग जारी रखना आदेश की अवमानना होगी। उन्होंने कहा कि अब हम सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई का इंतजार कर रहे हैं। उम्मीद है कि सुप्रीम कोर्ट हमें पक्ष रखने बुलाएगा। शीर्ष अदालत अगले सप्ताह आदेश दे सकता है।

NEET 2018: सरकार ने काउंसलिंग पर लगाई रोक, SC के आदेश के बाद होगी शुरू

उधर, सीबीएसई निदेशक संयम भारद्वाज ने कहा, हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ अगले सप्ताह सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई जाएगी। अगर सीबीएसई सुप्रीम कोर्ट जाता है तो उसके पास ये दलीलें होंगी- 

मद्रास हाईकोर्ट के एक फैसले से नीट के नतीजों पर पेच फंसा

सीबीएसई का केस मजबूत

1. सीबीएसई ने नीट की बुकलेट में स्पष्ट किया गया था कि हिन्दी समेत सभी क्षेत्रीय भाषाओं में अनुवाद में गड़बड़ी होने पर अंग्रेजी में प्रकाशित सवाल को सही माना जाएगा। 

2. आदेश में सभी परीक्षार्थियों को 196 अंक अतिरिक्त देने को कहा गया है। जबकि छात्रों ने 49 सवालों में से कुछ के उत्तर तो सही दिए ही होंगे। ऐसे में एक ही सवाल पर उन्हें दो बार नंबर मिल जाएंगे, जो गलत होगा।

3. कोर्ट का आदेश पहली काउंसलिंग के बाद आया। ऑल इंडिया काउंसलिंग में 70 फीसदी सीटों पर एडमिशन पहले ही हो चुके हैं। दोबारा प्रक्रिया शुरू करने से हजारों छात्रों को परेशानी होगी।

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  • Web Title:NEET 2018: CBSE May Move Supreme Court Against HC Order on Providing Grace Marks in neet