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NEET 2018: मद्रास हाईकोर्ट के 196 ग्रेस मार्क्स देने के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची CBSE

Supreme Court transfers Kathua rape and murder case to Punjab Pathankot court

NEET 2018: मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट पर मद्रास हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सीबीएसई सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई है। सीबीएसई ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर मद्रास हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी है जिसमें उसने तमिल मीडियम से नीट परीक्षा देने वाले स्टूडेंट्स को 198 ग्रेस मार्क्स देने का आदेश दिया था। इसके अलावा कोर्ट ने सीबीएसई से उम्मीदवारों की रैंकिंग को संशोधित कर उसे फिर से प्रकाशित करने के लिए कहा था। 

नीट पर मद्रास हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने गुरुवार को नीट यूजी की काउंसिलिंग पर रोक लगा दी थी। साथ ही दूसरी काउंसिलिंग के नतीजे भी रोक दिए गए थे। अब सुप्रीम कोर्ट से आदेश के बाद ही दोबारा काउंसिलिंग होगी। 

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मद्रास हाईकोर्ट ने सीबीएसई से कहा था कि परीक्षा में कुल 49 प्रश्नों में तमिल अनुवाद की त्रुटियां थी, जिनके लिए प्रति प्रश्न चार अंक दिया जाना चाहिए। पीठ ने तमिल माध्यम से नीट देने वाले सभी 24,720 प्रतिभागियों को 196 अंक अतिरिक्त देने का आदेश दिया था। मदुरै पीठ के जस्टिस सीटी सेल्वम और जस्टिस एएम बशीर अहमद ने माकपा नेता टीके रंगराजन की जनहित याचिका पर यह आदेश दिया था। 

सुप्रीम कोर्ट में ये दलीलें देकर अपना केस मजबूत बना सकती है सीबीएसई
1. सीबीएसई ने नीट की बुकलेट में स्पष्ट किया गया था कि हिन्दी समेत सभी क्षेत्रीय भाषाओं में अनुवाद में गड़बड़ी होने पर अंग्रेजी में प्रकाशित सवाल को सही माना जाएगा। 

2. आदेश में सभी परीक्षार्थियों को 196 अंक अतिरिक्त देने को कहा गया है। जबकि छात्रों ने 49 सवालों में से कुछ के उत्तर तो सही दिए ही होंगे। ऐसे में एक ही सवाल पर उन्हें दो बार नंबर मिल जाएंगे, जो गलत होगा।

3. कोर्ट का आदेश पहली काउंसलिंग के बाद आया। ऑल इंडिया काउंसलिंग में 70 फीसदी सीटों पर एडमिशन पहले ही हो चुके हैं। दोबारा प्रक्रिया शुरू करने से हजारों छात्रों को परेशानी होगी।

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  • Web Title:NEET 2018: CBSE Challenges Madras High Court NEET Judgement In Supreme Court