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दक्षिण दिल्ली निगम के 450 से अधिक शिक्षक हुए बेरोजगार, स्थायी समिति में छाया मुद्दा

प्रमुख संवाददाता,नई दिल्लीPublished By: Alakha Singh
Tue, 28 Sep 2021 07:43 PM
दक्षिण दिल्ली निगम के 450 से अधिक शिक्षक हुए बेरोजगार, स्थायी समिति में छाया मुद्दा

दक्षिण दिल्ली नगर निगम स्थायी समिति की बैठक में 450 से अधिक शिक्षकों को कोरोना काल से बेरोजगार करने का मुद्दा छाया रहा। सभी शिक्षक वर्ष 2001 से निगम के विभिन्न प्राइमारी स्कूलों में पढ़ा रहे थे , लेकिन कोरोना काल में सभी शिक्षकों का कांट्रेक्ट को नहीं बढ़ाया गया। हालत यह है कि शिक्षकों को अपने परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो रहा है। शिक्षकों के मामले को जोर-शोर से उठाते हुए विपक्ष पार्षदों ने कहा कि वह शिक्षकों की काली दीपावली नहीं मनने देंगे उन्होंने महापौर और समिति अध्यक्ष के आवास पर धरने का ऐलान भी किया है।

स्थायी समिति के अध्यक्ष कर्नल बीआर ओबराय की अध्यक्षता में बैठक शुरू होने पर कांग्रेस के पार्षद और स्थायी समिति सदस्य सुरेश कु मार ने कहा कि दक्षिण दिल्ली नगर निगम जब एकीकृत था तो वर्ष 2001 से निगम में शिक्षक कांट्रेक्ट पर रखे गए थे। वर्ष 2009 तथा वर्ष 2013 में कांट्रेक्ट पर फिर शिक्षक रखे गए। निगम के चारों जोन में करीब 450 से अधिक शिक्षक कांट्रेक्ट पर पढ़ा रहे थे। लेकिन अगस्त 2020 में अचानक उनके कांट्रेक्ट को नहीं बढ़ाया गया, कोरोना काल में कहा गया कि उनका कांट्रेक्ट जल्द ही बढ़ा दिया जाएगा। मगर एक साल से अधिक समय हो गया सभी शिक्षक बेरोजगार हैं। शिक्षक लगातार शिक्षा निदेशालय और निगमायुक्त कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन कोरे आश्वासन के सिवाय कुछ नहीं मिला।

कोरोना काल में शिक्षकों को राशन बांटने के कार्य में भी डयूटी पर लगाया गया। कोरोना में भी इन शिक्षकों ने पूरा काम किया तो दक्षिण निगम उनका कांट्रेक्ट क्यों नहीं बढ़ा रहा है। आप के पार्षद जितेंद्र सिंह ने कहा कि जहां एक तरफ शिक्षकों को बेरोजगार कर दिया गया है तो वहीं स्कूल के छात्रों को पुस्तकें नहीं दी जा रही हैं। अगर विद्यार्थियों को पुस्तकें नहीं दी गई तो अगर पुस्तकें दी जाए तो कम से कम वह घर पर तो पढ़ सकते हैं।

क्या कहते हैं बेरोजगार हुए शिक्षक
दक्षिण निगम के बेरोजगार हुए शिक्षक अनिल शौकीन का कहना है कि तनाव और बेरोजगारी के चलते दो शिक्षकों की मौत हो चुकी है। इनमें से एक उत्तरी निगम के थे। एक साल से वेतन ना मिलने से सभी शिक्षकों के सम्मुख परिवार के पालन पोषण के लिए दूसरों से सहयोग मांगना पड़ रहा है। 

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