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MBBS : यूपी के मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस में हिंदी की किताबों से पढ़ाया जाना शुरू

मेडिकल कॉलेजों की एमबीबीएस कक्षाओं में पढ़ाई हिंदी मीडियम में भी हुआ करेगी। सभी मेडिकल कॉलेजों के प्रिंसिपल और फैकल्टी सदस्यों से कहा गया है कि वह मेडिकल स्टूडेंट्स को हिंदी में भी पढ़ाएं।

MBBS : यूपी के मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस में हिंदी की किताबों से पढ़ाया जाना शुरू
Pankaj Vijayहिन्दुस्तान टीम,लखनऊSat, 04 Nov 2023 02:37 PM
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उत्तर प्रदेश के सभी सरकारी मेडिकल कॉलेजों की एमबीबीएस कक्षाओं में पढ़ाई हिंदी मीडियम में भी हुआ करेगी। एक बड़े बदलाव के तहत सभी मेडिकल कॉलेजों के प्रिंसिपल और फैकल्टी सदस्यों से कहा गया है कि वह मेडिकल स्टूडेंट्स को हिंदी में भी पढ़ाएं। इतना ही नहीं, उन्हें इस बाबत हर माह एक अपडेट रिपोर्ट मेडिकल शिक्षा महानिदेशक को भी भेजने के लिए कहा गया है।  

सभी राज्य-संचालित, स्वायत्त मेडिकल कॉलेजों और किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) और डॉ राम मनोहर लोहिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (आरएमएलआईएमएस) के अधिकारियों को एक पत्र में, महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा (डीजीएमई) किंजल सिंह ने कहा: “एक सरकार 31 अक्टूबर को जारी पत्र में कहा गया है कि चिकित्सा शिक्षा विभाग के तहत कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में हिंदी में पढ़ाई शुरू की जाए।

सभी राज्य-संचालित व स्वायत्त मेडिकल कॉलेजों और किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) और डॉ राम मनोहर लोहिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (आरएमएलआईएमएस) के अधिकारियों को भेजे एक पत्र में चिकित्सा शिक्षा महानिदेशक (डीजीएमई) किंजल सिंह ने कहा है, 'सरकार की ओर से 31 अक्टूबर को जारी पत्र में कहा गया है कि चिकित्सा शिक्षा विभाग के तहत कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में हिंदी में पढ़ाई शुरू की जाए।'

इस बदलाव से मेडिकल छात्र बेहतर ढंग से पढ़ाई कर सकेंगे खासतौर पर वे विद्यार्थी जिन्होंने स्कूल में हिंदी मीडियम में पढ़ाई की है। उदाहरण के तौर पर एक इस निर्देश पर गौर करें - ‘Before measuring blood pressure ensure the unique preparation or the prerequisite are done.' काफी संभव है कि यह वाक्य उन एमबीबीएस छात्रों के समझ में ना आए जिनकी अंग्रेजी की समझ ज्यादा अच्छी नहीं है। हालांकि, इसे हिंदी में बेहद आसानी से इस प्रकार समझाया जा सकता है, "ब्लड प्रेशर नपने से पहले सभी जरूरी तैयारियां पूरी कर लेनी चाहिए," इस तरह इसे वे लोग भी आसानी से समझ सकते हैं जो अंग्रेजी भाषा नहीं जानते हैं।

केजीएमयू की फिजियोलॉजी विभाग की प्रमुख प्रोफेसर एनएस वर्मा ने कहा, “लगभग सभी एमबीबीएस विषयों के लिए हिंदी किताबें उपलब्ध हैं। कुछ की समीक्षा भी चल रही है।,”  उन्होंने कहा, "रूस, चीन, जापान जैसे कई देश छात्रों को अपनी भाषा में पढ़ाते हैं।"

हालांकि, शिक्षकों ने बताया कि जब भी कक्षा में किसी भी पेचीदे विषय को विस्तार से समझाने की बात आती है तो हिंदी पहले से ही भाषा रही है। केजीएमयू के एटोनॉमी विभाग के प्रमुख प्रोफेसर नवनीत कुमार ने कहा, ''हम लगभग 60 फीसदी पढ़ाई की चीजें हिंदी में ही समझाते हैं । इससे छात्रों को यह समझने में मदद मिलती है कि हम वास्तव में पढ़ा क्या रहे हैं,।”

फोरेंसिक मेडिसिन और टॉक्सिकोलॉजी विभाग के प्रमुख प्रोफेसर अनूप वर्मा ने कहा, “इंटरमीडिएट छात्रों को पढ़ाने के लिए इस्तेमाल की जा रही हिंदी की कुछ किताबें अच्छी हैं। हम अपने छात्रों को तकनीकी शब्दों को हिंदी में सरल भाषा में समझाने के लिए उनका उपयोग करते हैं।"

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