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MBBS admission 2019: एमबीबीएस में प्रवेश के आखिरी दिन कम रैंक वाले छात्रों पर बरसी कृपा

स्कन्द विवेक धर,नई दिल्ली। Published By: Anuradha
Thu, 03 Oct 2019 09:01 AM
MBBS admission 2019: एमबीबीएस में प्रवेश के आखिरी दिन कम रैंक वाले छात्रों पर बरसी कृपा

इस साल उत्तर प्रदेश के आधा दर्जन से अधिक निजी मेडिकल कॉलेजों ने एमबीबीएस में प्रवेश के आखिरी दिन नीट में सबसे खराब रैंक लाने वाले परीक्षार्थियों पर भी जमकर कृपा बरसाई है। आलम ये है कि नीट में अखिल भारतीय स्तर पर आठ लाख से भी नीचे की रैंक लाने वाले दो परीक्षार्थियों को अलग-अलग मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश मिला है। वहीं, छह से आठ लाख के बीच रैंक लाने वाले छात्र-छात्राओं का भी आखिरी दिन कई मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश हुआ। यूपी के चिकित्सा शिक्षा निदेशालय से मिले आंकड़ों से यह खुलासा हुआ है। 

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में स्थित प्रसाद मेडिकल कॉलेज में प्रवेश के आखिरी दिन यानी 31 अगस्त को तीन एडमिशन हुए। इसमें दो में परीक्षार्थियों की रैंक क्रमश: 821780 और 785620 है। इसी तरह मेरठ के सुभारती मेडिकल कॉलेज में 31 अगस्त को 15 एडमिशन हुए। इसमें आखिरी तीन परीक्षार्थियों की रैंक क्रमश: 818777, 723854 और 717184 है। इसके अलावा, चार परीक्षार्थियों की रैंक छह लाख से नीचे है। खास बात ये है कि सुभारती मेडिकल कॉलेज ने आखिरी चरण में होने वाली काउंसलिंग के लिए एक सीट शेष घोषित की थी। जबकि इसमें 28 अगस्त और 31 अगस्त को मिलाकर कुल 17 परीक्षार्थियों को एडमिशन दिया। इसके अलावा, लखनऊ के करियर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज ने आखिरी दिन 737486 रैंक के परीक्षार्थी को, बाराबंकी के मायो इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस ने 726281 रैंक के परीक्षार्थी को प्रवेश दिया है।  

एक तरफ अच्छी खासी रैंक वाले हजारों छात्र-छात्राओं को एमबीबीएस में प्रवेश न मिलने और दूसरी तरफ इतनी नीची रैंक के परीक्षार्थियों का एडमिशन हो जाने के सवाल पर यूपी में एमबीबीएस की काउंसलिंग कराने वाली संस्था चिकित्सा शिक्षा निदेशालय के महानिदेशक डॉ. केके गुप्ता ने दबे स्वर में स्वीकार किया कि कुछ गड़बड़ी हुई है। हालांकि, कोई कार्रवाई करने के सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि आप हमें लिखित में शिकायत करें तो हम जांच कराएंगे। 

ऐसे होता है मेडिकल में प्रवेश का खेल
मेडिकल एजुकेशन एक्टिविस्ट विवेक पांडेय के मुताबिक, निजी मेडिकल कॉलेजों में आखिरी दिन होने वाले एडमिशनों में सबसे अधिक गड़बड़ी होती है। कॉलेज प्रबंधन और दलाल मिल कर दूसरे राज्यों के ऊंची रैंक वाले छात्रों से मेडिकल कॉलेजों में सीट ब्लॉक करवा लेते हैं। इन छात्रों से आखिरी तारीख को अंतिम समय पर सीट खाली करवाई जाती है और उस समय पहले से तय सौदेबाजी कर चुके छात्रों को एडमिशन दे दिया जाता है। यही कारण है कि आखिरी दिन सबसे कम रैंकिंग वाले परीक्षार्थी भी प्रवेश पाने में कामयाब हो जाते हैं।      
 

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