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करगिल युद्ध के बाद उठी थी चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ पद की मांग, जानें- मुख्य कार्य

लाइव हिन्दुस्तान टीम,नई दिल्लीPriyanka Sharma
Wed, 08 Dec 2021 11:38 PM
करगिल युद्ध के बाद उठी थी चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ पद की मांग, जानें- मुख्य कार्य

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देश के पहले चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (Chief Of Defence Staff (CDS) जनरल बिपिन रावत की बुधवार (8 दिसंबर 2021) को तमिलनाडु के कुन्नूर में हुए हेलिकॉप्टर हादसे में जान चली गई। बता दें, उनके साथ उनकी पत्नी और 11 अन्य सहयोगियों की भी मौत हो गई।

जनरल बिपिन रावत देश के पहले चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) नियुक्त किए गए थे। आपको बता दें, साल 2019 में 73वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) का पद  का ऐलान किया था।

जानें-  चीफ ऑफ डिफेंस स्टॉफ पद के बारे में

भारतीय सेना में थल सेना, नौसेना और वायु सेना होती है, जो देश की रक्षा के लिए सरहदों पर तैनात रहती है। इन तीनों सेनाओं का एक अध्यक्ष (Chief) होता है। थल सेना के लिए थल सेना अध्यक्ष, नौसेना के लिए नौसेना अध्यक्ष और एयरफोर्स के लिए वायु सेन अध्यक्ष। अब इन तीनों के ऊपर एक और शक्ति होती है, जिनके नियत्रंण में ये तीनों सेना होती है, वह होते हैं देश के राष्ट्रपति।

वहीं जिस पद का ऐलान साल 2019 में पीएम मोदी ने किया था, ये पद चीफ ऑफ डिफेंस स्टॉफ (CDS) है जो तीनों सेनाओं से ऊपर और राष्ट्रपति से नीचे है।

क्यों पड़ी चीफ ऑफ डिफेंस स्टॉफ (CDS) पद की जरूरत

1999 में करगिल युद्ध के समय सीडीएस पद की जरूरत महसूस हुई थी। जब भारत- पाकिस्तान का युद्ध हुआ, जिसमें पाकिस्तान की हार हुई, लेकिन इस युद्ध के दौरान भारत को काफी नुकसान भी झेलना पड़ा।

युद्ध खत्म होने के बाद साल 2001 में करगिल युद्ध की समीक्षा करने के लिए तत्कालीन डिप्टी पीएम लाल कृष्ण आडवाणी की अध्यक्षता में एक मंत्रियों की कमिटी का गठन किया गया जिसमें  चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ पद की सिफारिश की गई थी। इसमें कहा गया था कि करगिल युद्ध के दौरान तीनों सेनाओं के बीच तालमेल की कमी देखी गई थी, जिस कारण भारतीय सेना को इतना नुकसान झेलना पड़ा। कमिटी का कहना था ये ऐसा पद होगा जो तीनों सेनाओं के अध्यक्षों से बातचीत कर सकें और सेना और सरकार के बीच में एक  ब्रिज के रूप में कार्य कर सकें।

करगिल युद्ध के लंबे समय के बाद साल 2012 में भारत के पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की सरकार के दूसरे कार्यकाल के दौरान नरेश चंद्र टास्क फोर्स ने एक सुझाव दिया, जिसे मान लिया गया था और एक स्टाफ कमिटी बना दी गई। थल सेना, नौसेना और वायु सेना के अध्यक्ष इसमें शामिल होते हैं। इनमें से जो भी सीनियर होता है उन्हें चीफ ऑफ स्टाफ कमिटी का चैयरनमेन बना दिया जाता है।

आपको बता दें, साल 2019 में चीफ ऑफ स्टाफ कमेटी (COSC) की कमान जनरल बिपिन रावत के हाथों में सौंपी गई थी, इससे पहले बीएस धनोआ इस पद नियुक्त किए गए थे, लेकिन वरिष्ठ होने के नाते बिपिन रावत को ये पद दिया गया था।

 

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