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11वीं में फेल विद्यार्थी असमंजस में, भविष्य खराब होने का है डर

रांची विश्वविद्यालय के अंगीभूत कॉलेजों में इंटर में नामांकन नहीं लिए जाने से असमंजस की स्थिति बन गई है। इस सत्र में 11वीं में फेल होनेवाले विद्यार्थियों को भी भविष्य की चिंता सता रही है।

11वीं में फेल विद्यार्थी असमंजस में, भविष्य खराब होने का है डर
Pankaj Vijayवरीय संवाददाता,रांचीFri, 24 May 2024 07:39 AM
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रांची विश्वविद्यालय के अंगीभूत कॉलेजों में इंटर में नामांकन नहीं लिए जाने से असमंजस की स्थिति बन गई है। एक तरफ प्लस टू स्कूलों और अल्पसंख्यक कॉलेजों में नामांकन लेने की चुनौती है, तो वहीं दूसरी ओर अंगीभूत कॉलेजों में इस सत्र में 11वीं में फेल होनेवाले विद्यार्थियों को भी भविष्य की चिंता सता रही है। सत्र 2023-25 में नामांकित विद्यार्थियों में बड़ी संख्या ऐसे छात्रों की है जो 11वीं में इसबार फेल हो गए हैं। उनके अंदर डर है कि 2026 में जब कोई बैच ही नहीं होगा तो उनकी फाइनल परीक्षा कैसे होगी। उनके मन में सवाल है कि क्या उनकी परीक्षा नहीं ली जाएगी। उनकी कक्षाएं इस सत्र में चलेंगी की नहीं, इसको लेकर भी ऊहापोह है।

आरयू के अंगीभूत कॉलेजों में इंटर में नामांकन नहीं लिए जाने से पढ़ाई प्रभावित है। 12वीं की कक्षाएं छिटपुट चल रही हैं, लेकिन नया बैच नहीं आने से 11वीं में फेल विद्यार्थियों की पढ़ाई नहीं हो पाएगी। जो शिक्षक और कर्मचारी इंटर कॉलेजों में पढ़ा रहे हैं, इस साल फाइनल परीक्षा का फॉर्म भराने के बाद उनकी भी सेवा समाप्त हो जाएगी। ऐसे में 11वीं में फेल विद्यार्थियों के सामने सबसे बड़ी समस्या खड़ी हो गई है। इसके लिए अभी तक कोई फैसला नहीं लिया गया है।

स्कूलों में बढ़ रही आवेदन की संख्या
इधर, अल्पसंख्यक कॉलेजों और प्लस टू स्कूलों में आवेदन की संख्या बढ़ने से परेशानी हो रही है। प्लस टू स्कूलों में नामांकन के लिए सीट संख्या तय नहीं है, लेकिन स्कूलों की समस्या है कि उनके पास आधारभूत संरचना नहीं है। वहीं, जिन इंटर कॉलेजों में सुविधाएं हैं, वहां सीटे घटने से परेशानी हो रही है।

उर्सुलाइन इंटर कॉलेज की प्रचार्या सिस्टर मेरी ग्रेस ने बताया कि पिछले साल तीनों संकायों में मिलाकर 3072 सीटें थी, जिसे इस सत्र में घटाकर 1152 कर दी गई है।

इसके लिए 4500 से अधिक आवेदन आए हैं। बड़ी संख्या में छात्राएं और अभिभावक नामांकन के लिए आकर निराश लौट रहे हैं। मारवाड़ी प्लस टू हाई स्कूल के प्राचार्य आशीष कुमार ने कहा कि हमारे पास छात्रों को बैठाने की क्षमता कम है, इसलिए नामांकन भी अधिक नहीं ले सकते हैं।

हमारे स्कूल में आधारभूत संरचना होने के बाद भी हम नामांकन कम ले पा रहे हैं। जैक द्वारा सीटें घटाने पर हमें परेशानी झेलनी पड़ रही है। छात्राओं को लौटाना पड़ रहा है। -सिस्टर मेरी ग्रेस, प्राचार्या, उर्सुालइन इंटर कॉलेज

इंटर शिक्षा के फंड को लेकर उठ रहे सवाल
कॉलेजों में नामांकन बंद होने के बाद से इंटर के फंड को लेकर प्रश्न उठने लगे हैं। झारखंड अंगीभूत महाविद्यालय इंटरमीडिएट अनुबंध शिक्षक/शिक्षकेत्तर कर्मचारी मोर्चा का कहना है कि इंटर के लिए करोड़ों रुपये का फंड आता है। उस फंड का क्या होगा। मोर्चा का कहना है कि कई कॉलेजों में डेवलपमेंट के नाम पर फंड का घालमेल भी किया गया। मांडर कॉलेज, कार्तिक उरांव कॉलेज गुमला में फंड के दुरुपयोग का मामला उठ भी चुका है।

हजारों की संख्या में विद्यार्थी हुए हैं असफल
रांची विश्वविद्यालय के अंगीभूत कॉलेजों में 11वीं में हजारों विद्यार्थी सभी संकायों में मिलाकर फेल हुए हैं। शिक्षकों से मिली जानकारी के अनुसार, रांची वीमेंस कॉलेज में कुल 16 छात्राएं असफल रही हैं। जेएन कॉलेज धुर्वा में 96, बेड़ो कॉलेज में 78, डोरंडा कॉलेज में 364 विद्यार्थी असफल रहे हैं। इसके अलावा मारवाड़ी कॉलेज, एसएस मेमोरियल कॉलेज, खूंटी कॉलेज आदि में भी असफल विद्यार्थियों की संख्या अधिक है।

11वीं की परीक्षा में इस बार सफलता नहीं मिली तो लगातार पढ़ाई के लिए कॉलेज जाना चाहती थी, लेकिन जानकारी मिली है कि इस साल कक्षाएं नहीं होंगी। ऐसे में 12वीं में कैसे पास होंगे, यह समझ नहीं आ रहा है। - सुमन टोप्पो, छात्रा, वीमेंस कॉलेज

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