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Hindi News करियरसेना में सैनिक रहते 14 बार दी परीक्षाएं, कभी CDS तो कभी AFCAT, 15वें प्रयास में बने इंडियन आर्मी में अफस

सेना में सैनिक रहते 14 बार दी परीक्षाएं, कभी CDS तो कभी AFCAT, 15वें प्रयास में बने इंडियन आर्मी में अफस

आईएमए पासिंग आउट परेड में जम्मू के जामवाल का सेना में अफसर बनने का सपना भी पूरा हो गया। सेना में सैनिक रहते उन्होंने अफसर बनने के लिए सीडीएस समेत 14 परीक्षाएं दीं और वे लगातार असफल होते रहे।

सेना में सैनिक रहते 14 बार दी परीक्षाएं, कभी CDS तो कभी AFCAT, 15वें प्रयास में बने इंडियन आर्मी में अफस
Pankaj Vijayअंकित कुमार चौधरी,देहरादूनSun, 09 Jun 2024 12:15 PM
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सेना में अफसर बनने का जुनून ऐसा कि 14 असफल प्रयास भी जम्मू-कश्मीर के जामवाल के हौसले को डिगा नहीं पाए। सेना में सैनिक रहते उन्होंने अफसर बनने के लिए 14 परीक्षाएं दीं और वे लगातार असफल होते रहे। पर, हर असफलता के बाद उन्होंने खुद को टूटने नहीं दिया। दोगुनी मेहनत और हौसले से वे अफसर बनने की तैयारी में जुटे रहे। शनिवार को आईएमए से पासआउट होने के साथ जामवाल का सेना में अफसर बनने का सपना भी पूरा हो गया। उनकी इस सफलता से परिवार बेहद खुश है। सेना में लेफ्टिनेंट बने जम्मू-कश्मीर के बयालता निवासी जेएसएस जामवाल अपने परिवार की तीसरी पीढ़ी के सैनिक होने के बाद अब पहले सैन्य अफसर बन गए हैं। कुछ ही प्रयास में असफल होने के बाद राह से भटक जाने वाले युवाओं के लिए वे प्रेरणास्रोत हैं। आतंकवाद की समस्या को करीब से देखने और समझने वाले जामवाल को 15वें प्रयास में सेना में अफसर बनने में सफलता मिली।

उन्होंने सीडीएस और एएफ कैट में पांच-पांच बार प्रयास किया। इसके अलावा कोस्टगार्ड और एईसी की परीक्षा तक दी। आखिरकार 15वें प्रयास में वे सेना में अफसर बन गए। जामवाल ने बताया कि पिता की तरह वे भी सेना में बतौर सैनिक भर्ती हुए। हालांकि, मन में अफसर बनने की ललक थी। इसलिए, भर्ती होते ही इसके प्रयास में जुट गए।

बोले-सैनिक पिता ने दिया हौसला जामवाल लगातार प्रयास करते रहे। कई बार असफल होने पर वे निराश जरूर थे। लेकिन, सैनिक पिता उनको फिर आगे बढ़ते हुए दोगुनी मेहनत से तैयारी में जुटने के लिए प्रेरित करते। इसका परिणाम शनिवार को मिला। जामवाल की सफलता की कहानी युवा पीढ़ी के लिए भी सीख है।

दो बार असफल रहे शौर्य भट्ट ने भी हिम्मत नहीं हारी
पिथौरागढ़ के ग्राम भरकटिया निवासी शौर्य भट्ट की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। उनके पिता रामदत्त सीनियर अकाउंटेंट सीबीडीटी के पद पर कार्यरत हैं। वर्तमान में वे दिल्ली में तैनात हैं। मां सीमा दिल्ली के बिरला विद्या निकेतन स्कूल में अंग्रेजी की शिक्षिका हैं। शौर्य ने उसी स्कूल से 2019 में बारहवीं की। स्कूल के समय से ही वे सेना में जाने की तैयारी में जुट गए थे। एनडीए की परीक्षा दी, पर दो बार असफल रहे। लिखित परीक्षा उत्तीर्ण की, मगर एसएसबी में बाहर हो गए। लेकिन, हिम्मत नहीं हारी और नकारात्मकता से दूर रहकर खुद को आगे बढ़ते रहने के लिए प्रेरित किया। आखिरकार तीसरे प्रयास में वे सफल रहे।

सैनिक से अफसर बने कारगिल के अंगचुक
देहरादून। भारतीय सेना में ‘स्नो लैपर्ड’ से जाने जानी वाली ‘लद्दाख स्काउट’ के सैनिक कारगिल निवासी छेरिंग अंगचुक सेना में अफसर बन गए। उनके पिता खेती-किसानी से परिवार का भरण पोषण करते हैं। भारत-चीन सीमा पर हाड़ कंपा देने वाली ठंड वाले इलाके से आने वाले छेरिंग अंगचुक चार भाई-बहन हैं। उनके चाचा भी लद्दाख स्काउट का हिस्सा हैं। अंगचुक इसी रेजीमेंट का हिस्सा थे। बाद में एसीसी से सेना में अफसर बनने की ठानी।

खिलाड़ी ने अफसर बनकर मनवाया लोहा
देहरादून। तैराकी में राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी दिल्ली के मालवीयनगर निवासी ध्रुव अहलावत शनिवार को सेना में अफसर गए। उनके पिता दिल्ली पुलिस में एसआई हैं और माता मंजू देवी गृहिणी। ध्रुव की 12वीं तक की पढ़ाई दिल्ली पुलिस पब्लिक स्कूल से हुई। इसके बाद उन्होंने डीयू से बीएससी की। इस बीच उनका चयन सीडीएस के माध्यम से आईएमए के लिए हो गया। परिजनों ने बताया कि ध्रुव ने सेना में जाने के लिए मेहनत की और हम भी यही चाहते थे।
 

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