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किसी फिल्म से कम नहीं है IAS अधिकारी किंजल सिंह की कहानी, UPSC में आई थी ये रैंक

IAS अधिकारी किंजल सिंह साल 2008 में अपने दूसरे प्रयास में 25वीं रैंक हासिल करके आईएएस अधिकारी बनीं। बता दें, उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी के लेडी श्री राम कॉलेज से ग्रेजुएशन की पढ़ाई की थी और पिता को

किसी फिल्म से कम नहीं है IAS अधिकारी किंजल सिंह की कहानी, UPSC में आई थी ये रैंक
Priyanka Sharmaलाइव हिन्दुस्तान,नई दिल्लीFri, 01 Dec 2023 05:27 PM
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UPSC Success story: कुछ लोगों को अपने लक्ष्य हासिल करने के लिए कई लड़ाइयां लड़नी पड़ती हैं और कई ठोकरे खानी पड़ती है, तब जाकर वह सफलता को हासिल कर पाते हैं। आज हम आपको एक ऐसी ही शख्सियत के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्होंने कई मुश्किलों का सामना करते हुए यूपीएससी की परीक्षा पास की और IAS अधिकारी बनीं। आइए जानते हैं इनके बारे में।

5 जनवरी, 1982 को उत्तर प्रदेश के बलिया में जन्मी किंजल सिंह की कहानी, किसी फिल्म की कहानी से कम नहीं है। बता दें, वह  केवल दो साल की थीं, जब उनके पिता का निधन हो गया था। उनके पिता केपी सिंह डिप्टी सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस के पद कार्यरत थे। आज से लगभग 35 साल पहले उनके पिता के सहयोगियों ने उत्तर प्रदेश के गोंडा में एक फर्जी मुठभेड़ में उनकी हत्या कर दी थी।

जब किंजल सिंह समझदार हुई और इस बारे पता चला, तब से उन्होंने अपने पिता को न्याय दिलाने का फैसला किया। इसके लिए उन्होंने अपनी मां के साथ दिल्ली सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

अपने पिता को दुखद रूप से खोने और दिल्ली में अदालती सुनवाई के लिए चक्कर लगाने के दौरान किंजल ने कड़ी मेहनत से पढ़ाई की और दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) के  लेडी श्री राम कॉलेज में दाखिला लिया। वह जानती थी, शिक्षा से ही वह अपने पिता को न्याय दिला सकती है। इसके लिए उन्होंने  करियर पर काफी ध्यान दिया।

जहां एक ओर किंजल सिंह अपने करियर पर ध्यान दे रही थी वहीं उन्हें नहीं मालूम था कि उनकी जिंदगी में एक और घटना होने वाली है। उस समय किंजल को पता चला कि उनकी मां को कैंसर है। इसके खबर से वह पूरी तरह से टूट गई थी। लंबे समय तक कैंसर से लड़ने के बाद साल 2004 में उनकी मृत्यु हो गई। उनके अंतिम क्षणों में, उनकी बेटियों ने उन्हें आश्वासन दिया कि वे IAS अधिकारी बनकर और अपने पिता की मृत्यु के लिए न्याय दिलवाकर उनका सपना पूरा करेंगी।

एक इंटरव्यू में अपने माता-पिता के बारे में बात करते हुए किंजल ने कहा, "मुझे अपने पिता पर गर्व है जो एक ईमानदार अधिकारी थे और मेरी मां ने मां होते हुए पिता की भी भूमिका बखूबी निभाई थी, मुझे गर्व है कि मेरे ऐसे माता- पिता हैं"

अपनी मां के निधन के बाद, किंजल कॉलेज में अपनी फाइनल परीक्षा देने के लिए लौट आईं और दिल्ली यूनिवर्सिटी में टॉप किया। इसके बाद उन्होंने अपनी छोटी बहन प्रांजल सिंह को भी दिल्ली बुला लिया। दोनों बहनों ने मिलकर IAS अधिकारी बनने के लिए यूपीएससी की तैयारी शुरू कर दी थी।

दोनों बहनों ने यूपीएससी की तैयारी को काफी गंभीर रूप से लिया और आखिरकार उनकी मेहनत रंग लाई। किंजल को साल 2008 में 25वीं रैंक हासिल करके दूसरे प्रयास में IAS पद के लिए चुना गया था और प्रांजल ने भी 252वीं रैंक के साथ UPSC की परीक्षा पास कर ली थी। बता दें, वर्तमान में वह एक IRS अधिकारी हैं।

IAS और IRS अधिकारी बनने के बाद दोनों बहनों ने अपने पिता को न्याय दिलाने और उनकी हत्या के पीछे के दोषियों को गिरफ्तार कराने का फैसला किया। उनके दृढ़ संकल्प ने पूरी न्याय प्रणाली को हिलाकर रख दिया और अंततः साल 2013 उनके पक्ष में फैसला आया। पिता की हत्या के  31 साल बाद, लखनऊ में सीबीआई की विशेष अदालत ने उनके पिता डीएसपी सिंह की हत्या के सभी 18 आरोपियों को सजा सुनाई थी।

इस जीत के बारे में बात करते हुए किंजल ने खुशी जताते हुए कहा, ''जब मेरे पिता की हत्या हुई थी तब मैं मुश्किल से ढाई महीने की थी। मेरे पास उसकी कोई यादें नहीं हैं, लेकिन मुझे याद है कि कैसे मेरी मां विभा ने सभी बाधाओं के बावजूद न्याय के लिए अपना संघर्ष जारी रखा, जब तक कि 2004 में कैंसर से उनकी मृत्यु नहीं हो गई। अगर वह आज जीवित होती, तो मुझे यकीन है कि वह इस पल को जी लेती"

बता दें, IAS अधिकारी किंजल सिंह  को इसी वर्ष उत्तर प्रदेश के चिकित्सा शिक्षा विभाग का डीजी नियुक्त किया गया है।

 

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