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24 नवंबर, 2020|11:52|IST

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कक्षाएं चली ही नहीं तो 70 फीसदी उपस्थिति कैसे संभव होगी : HC

delhi high court

हाई कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि डीयू में जब पाठ्यक्रम के लिए निर्धारित अवधि में कक्षाओं को संचालन नहीं किया गया तो छात्रों से न्यूनतम 70 फीसदी उपस्थिति की उम्मीद करना अनुचित होगा। न्यायालय ने कक्षा में कम उपस्थिति की वजह से छात्र को परीक्षा में शामिल होने से रोकने के मामले में यह मौखिक टिप्पणी की है।
मुख्य न्यायाधीश डी.एन. पटेल और न्यायमूर्ति प्रतीक जालान की पीठ ने कहा कि डीयू छात्रों के परीक्षा में शामिल होने के लिए कक्षा में न्यूनतम 70 फीसदी उपस्थिति की उम्मीद नहीं कर सकता है, यदि उसने पाठ्यक्रम के लिए निर्धारित पूरी अवधि में कक्षाओं का संचालन नहीं किया है।

पीठ ने डीयू से कहा कि आप यह नहीं कह सकते कि छात्रों की 70 फीसदी न्यूनतम उपस्थिति अनिवार्य है जब आपने पाठ्यक्रम को पूरा करने के लिए तय अवधि में सिर्फ 40 फीसदी ही पढ़ाया हो। पीठ ने कानून की पढ़ाई कर रहे एक छात्र की अपील पर यह टिप्पणी की है। याचिकाकर्ता छात्र बीमारी की वजह से पिछले साल अपने पहले सेमेस्टर की परीक्षा में शामिल नहीं हो सका था। उच्च न्यायालय ने इस मामले में केंद्र सरकार, अखिल भारतीय विधिज्ञ परिषद (बीसीआई) और डीयू को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। हाई कोर्ट में छात्र ने नवंबर, 2019 में एकलपीठ के आदेश के खिलाफ अपील दाखिल की है। एकल पीठ ने छात्र की उस याचिका को खारिज कर दिया है जिसमें उसने कक्षा में उपस्थिति की कमी को माफ करने और परीक्षा में बैठने की अनुमति देने की मांग की थी।
एकल पीठ ने अपने फैसले में कहा था कि प्रोफेशनल पाठ्यक्रम में 70 फीसदी न्यूनतम उपस्थिति के नियमों का पालन किया जाना जरूरी है। याचिका में छात्र ने कहा है कि वह लगातार अपनी बीमारी की वजह से कक्षा में उपस्थित नहीं हो पाया। वहीं, मामले की सुनवाई के दौरान मंगलवार को पीठ ने कहा कि इस तरह के मामले के समुचित समाधान के लिए एक तंत्र होने चाहिए। साथ ही सभी पक्षों को मामले की अगली सुनवाई 1 सितंबर से पहले जवाब देने का निर्देश दिया।

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  • Web Title:How would 70 percent attendance be possible if classes did not go: HC