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Expert की सुनें: परीक्षाओं में तनाव नहीं इन्हें दें खुशियों की सौगात

exam stress and board exams

स्कूल में परीक्षाओं का दौर शुरू होने वाला है। वो दौर, जब बच्चों पर पढ़ने का कुछ ज्यादा ही दबाव होगा और आपकी जिम्मेदारी होगी उनको संभालने की। पर बच्चों को संभालने के लिए आपका खुद भी तनावमुक्त रहना जरूरी होगा। कैसे अपने तनाव को बच्चे तक पहुंचने से रोकें, बता रही हैं चयनिका निगम


बच्चों पर परीक्षा का डर मंडराना शुरू हो चुका है। अगले कुछ दिन खूब पढ़ने और मेहनत करने में बीतेंगे। परीक्षा में कमाल कर दिखाने का उनका जज्बा रोज तनाव से टकराएगा। पर जीत आपके बच्चों के जज्बे की ही हो, इसके लिए जरूरी होगा कि आप खुद को शांत रखें, ताकि बच्चे को संभाल सकें। ऐसा इसलिए, क्योंकि आप पूरे घर की नींव हैं और नींव का मजबूत होना सफलता के लिए बेहद जरूरी होता है। आप तनाव से दूर रहेंगी तो तय मानिए कि बच्चा भी परीक्षा का दबाव आसानी से झेल पाएगा। पर आमतौर पर ऐसा नहीं हो पाता है, क्योंकि परीक्षा की जितनी चिंता बच्चों को होती है, उससे दोगुनी मांओं को होती है। बच्चे की परीक्षा की वजह से अगर आपका भी तनाव बढ़ रहा है तो समय आ गया है कि आप अपने तनाव को कम करने की दिशा में काम करना शुरू कर दें। कैसे? आइए जानें:

 
तनाव का कीजिए टेस्ट
परीक्षा से पहले सब कुछ याद कर पाने और तैयारी पूरी करने की कोशिश में बच्चे का तनाव में आना लाजमी है, लेकिन मां होते हुए क्या आप भी तनाव में हैं? समझ नहीं पा रहीं तो जरा खुद के दो छोटे टेस्ट लेकर देख लीजिए, क्योंकि आपका तनाव बच्चे पर भारी पड़ सकता है:


घर वाला टेस्ट: खुद से पूछिए कि क्या आपके घर का माहौल ऐसा है कि आपके बच्चे तनावमुक्त होकर रह सकते हैं? घर आकर उनका तनाव खत्म हो पाता है? क्या आपके घर में ऐसे मौके आते हैं, जब बच्चे पूरे परिवार के साथ बैठकर हंसते-बोलते हों? एक-दूसरे का साथ मस्ती-मजाक करते हों?


मां वाला टेस्ट: अपने बच्चों से पूछिए कि वो आपके बारे में क्या सोचते हैं? क्या वो आपको ऐसी मां मानते हैं, जो आमतौर पर खुश रहती हैं और शांति से उनकी बात सुनती हैं या फिर आपके घर आते ही बच्चे परीक्षा को लेकर तनाव महसूस करने लगते हैं? अगर बच्चे अपने जवाब में यह कहें कि वो आपको हमेशा तनाव में ही पाते हैं तो समझ लीजिए कि आपको अपने अंदर बहुत-कुछ बदलना होगा।

 

तनाव को पहचानिए
तनाव का तोड़ तभी तलाशा जा सकता है, जब आपको उसके लक्षणों को पहचानना आता हो। आपको पता होना चाहिए, तनाव किस रूप में आप पर असर करता है। अचानक से ब्लड प्रेशर या दिल की धड़कनों का बढ़ जाना, जरूरी न होने पर भी जोर-जोर से बोलना या चिल्लाना, अकसर चिड़चिड़ा रहना, धैर्य की कमी और अकसर गलत फैसले लेना आदि इस बात की निशानी है कि आप तनाव में हैं।

 
तनाव आता है घड़ी देख कर

यकीन मानिए तनाव भी समय देख कर आता है। ऐसा होना पक्की बात तो नहीं, लेकिन अकसर ऐसा जरूर होता है। ध्यान दीजिए, आपको दिनभर में सबसे ज्यादा तनाव कब होता है? उदाहरण के लिए सुबह का वक्त ले सकती हैं। जब सबको जल्दी होती है।

घर के कुछ सदस्यों को ऑफिस जाने की तो बच्चों को स्कूल जाने की। और आपको घर और किचन के काम समेट कर खुद ऑफिस जाने की। यह ऐसा वक्त होता है, जब रुटीन 5 मिनट भी गड़बड़ हुआ तो मानिए पूरा मामला ही बिगड़ जाएगा। ऐसे में इतना कुछ मैनेज करते हुए क्या आप तनाव में आ जाती हैं? छोटी-छोटी बात पर चिल्लाने लगती हैं, गुस्सा आने लगता है तो आप मान सकती हैं कि पूरे दिन में सबसे ज्यादा तनाव सुबह के वक्त महसूस करती हैं।

इसके अलावा रात के समय भी ऐसा हो सकता है। रात को ऑफिस से आकर डिनर बनाने और बच्चों की पढ़ाई देखते हुए तनाव आप पर हावी हो सकता है। आपको अपने तनाव के कारणों को पहचानना होगा और उसका हल भी तलाशना होगा।

मसलन, आपको सुबह में हड़बड़ी रहती है तो सुबह के कुछ काम रात में ही निपटा लें। बच्चों की स्कूल ड्रेस को रात में ही आयरन करके उनकी अलमारी में रख दें। अपने और घर के अन्य सदस्यों के कपड़ों के साथ भी ऐसा ही करें। अगली सुबह जो सब्जी बनाने वाली हैं, उसे रात में ही काटकर रख लें। ऐसे ही अगर रात में आपके तनाव का स्तर बढ़ जाता है तो डिनर की प्लानिंग सुबह ही कर लें।

 

बच्चों के तनाव पर आपकी नजर
बच्चा अच्छे से मन लगाकर पढ़ें और परीक्षा दें, इसके लिए आपका तनावमुक्त रहना जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी है कि बच्चा भी तनाव से दूर रहे। इसके लिए जरूरी यह होगा कि आप अपने बच्चे के तनाव को पहचानें। समय रहते समझ लें कि बच्चा तनाव क्यों झेल रहा है। वैसे तो आप बच्चे के स्वभाव से वाकिफ ही होंगी, जैसे कि वो कितनी छोटी-छोटी बातों पर घबरा जाता है या फिर हर दिक्कत आपको बता कर उसके हल के बारे में चर्चा करता है।

या फिर तनाव में वो कैसी हरकतें करता है, बहुत शांत हो जाता है, चिड़चिड़ाने लगता है या खाना-पीना कम कर देता है। बच्चे के ऐसे व्यवहार पर ध्यान दीजिए।

बच्चा परेशान होने या तनाव में होने का संकेत तो नहीं दे रहा? अगर ऐसा है तो उसके तनाव को दूर करने की कोशिश जरूर करें। उसे पढ़ाई के बीच थोड़ा-सा ब्रेक लेकर बाहर टहलने या फिर अपना मनपसंद खेल खेलने के लिए कहें। याद रखिए कि बच्चे का तनाव जितना ज्यादा बढ़ेगा, परीक्षा में उसका प्रदर्शन उतना ही खराब होगा।

 

ऐसे कीजिए बच्चे की मदद 

  • बच्चों को पढ़ने के लिए टाइमटेबल बनाने की सलाह दीजिए, ताकि वो समय के हिसाब से पढ़ें और उसे रिवाइज करने का पर्याप्त वक्त भी मिल जाए।
  • परीक्षा से पहले छोटे-छोटे, मजेदार टेस्ट लेकर रिवीजन में बच्चे की मदद करें।
  • पौष्टिक खाना खिलाकर बच्चों को पढ़ाई के लिए सक्रिय रहने में मदद करें।
  • बच्चा कितने घंटे की नींद ले रहा है, इस बात पर भी ध्यान दीजिए। ध्यान केंद्रित करके पढ़ाई करने के लिए सात-आठ घंटे की नींद बहुत जरूरी है।
  • भावनात्मक सपोर्ट भी बच्चों को परीक्षा के तनाव से बाहर निकलने में मदद करती है। बच्चे को यह विश्वास दिलवाएं कि परिणाम चाहे जो भी हो, आप उसके लिए हमेशा उपस्थित रहेंगी।
  • बच्चे पर परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन का दबाव नहीं डालें, पर उसे मेहनत करने के लिए प्रेरित जरूर करें। बच्चे को जीवन में परीक्षा के महत्व के बारे में समझाएं। पर साथ ही यह बताना भी नहीं भूलें कि एक परीक्षा के परिणाम पर हमारा जीवन निर्भर नहीं है।
  • बच्चों को हमेशा से शांत माहौल में पढ़ने की सलाह दी जाती है, इसलिए उन्हें अकेले कमरे में पढ़ने के लिए आप छोड़ देती हैं। पर लगातार कई घंटे पढ़ने के लिए बच्चे पर दबाव नहीं बनाएं। पढ़ाई से बीच-बीच में ब्रेक लेने के लिए भी बच्चे को प्रेरित करें।
  • समय-समय पर बच्चों से परीक्षा की वजह से होने वाले तनाव और उनके कारणों पर एक दोस्त की तरह उनसे बातें करें।
  • परीक्षा की तैयारी पर अपनी नजर रखने के साथ-साथ इस बात पर भी गौर करें कि उसके खानपान और आराम पर भी आपकी नजर रहे। संतुलन परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन के लिए जरूरी है।
  • इस बात पर भी गौर करने की जरूरत है कि पढ़ाई में बच्चे की रुचि है भी या नहीं। हो सकता है आपका बच्चा किसी और काम में अच्छा हो। अपने बच्चे की तुलना हमेशा दूसरे बच्चों से करना बंद करें। (क्लीनिकल साइकोलोजिस्ट डॉ. आराधना गुप्ता से बातचीत पर आधारित)
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