Hindi Day 2019: in UP board 10 lakh students fail every year in Hindi - हिंदी दिवस 2019: यूपी बोर्ड में हर साल 10 लाख छात्र हिंदी में हो जाते हैं फेल DA Image
14 दिसंबर, 2019|1:50|IST

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हिंदी दिवस 2019: यूपी बोर्ड में हर साल 10 लाख छात्र हिंदी में हो जाते हैं फेल  

cbse board exam 2019

देश के सबसे बड़े हिंदी भाषी प्रदेश में ही हिंदी का बुरा हाल है। चाहे प्रारंभिक स्तर हो या फिर परास्नातक, हालत सब जगह खराब है। यूपी बोर्ड में औसतन हर साल 10 लाख छात्र हिंदी में फेल हो जाते हैं जबकि लविवि में बीए हिंदी में दाखिला लेने तक के लिए छात्र नहीं आते।

मिशनरी स्कूलों में तो बच्चों पर हिंदी में बात करने पर प्रतिबंध है। यहां बच्चे सिर्फ हिंदी के पीरियड में हिंदी पढ़ते हैं।

बोर्ड परीक्षा में भी बुरा हाल : हाईस्कूल और इंटर में हिन्दी विषय की बात करें तो साइंस और गणित से ज्यादा छात्रों के लिए हिंदी मुश्किल विषय रहा है। 2018 की यूपी बोर्ड परीक्षा में 11 लाख छात्र-छात्राएं सिर्फ हिन्दी में फेल हुए थे। 2018 में 10वीं की परीक्षा में 30,28,767 छात्र-छात्राएं शामिल हुए थे। इनमें 7,80,582 छात्र हिंदी में फेल हो गए थे जबकि 12वीं की परीक्षा में 26,04,093 छात्र शामिल हुए थे। इनमें 3,38,776 हिंदी में फेल हो गए थे। वहीं, 2019 की यूपी बोर्ड हाईस्कूल और इंटर की परीक्षा में 9,98,250 परीक्षार्थी हिंदी में फेल हो गए।

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हिन्दी में दाखिले नहीं होते : लविवि का सबसे पुराना हिन्दी विभाग अब छात्रों की बांट जोह रहा है। स्नातक व परास्नातक की सीटें भरने में लाले हैं। इस सत्र में हिंदी आनर्स की 60 सीटों पर सिर्फ 26 छात्रों ने दाखिला लिया है।

अंग्रेजी वक्त की जरूरत है: लखनऊ विश्वविद्यालय में अर्थशास्त्र की छात्रा अलीना बताती हैं कि अंग्रेजी वक्त की जरूरत है। आप कहीं जॉब करते हैं तो वहां भी सबसे पहले इंग्लिश स्किल पर बात की जाती है। छात्र आनंद बताते हैं कि कंपनी में इंटरव्यू से लेकर हर जगह अंग्रेजी अनिवार्य हो गई है।

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 हिंदी की उपेक्षा के दो मुख्य कारण हैं। पहला यह कि तकनीक, मेडिकल आदि की पुस्तकें हिंदी में मौजूद नहीं है। साथ ही उनकी परीक्षाएं भी अंग्रेजी में होती हैं। इसके अलावा जिन पर हिंदी भाषा के प्रचार प्रसार की जिम्मेदारी है उन अधिकारियों में इच्छा शक्ति का अभाव है। अधीनस्थ कर्मचारियों पर भी वह अंग्रेजी में काम करने का दबाव बनाते हैं। प्रो. पवन अग्रवाल, हिन्दी विभाग, लखनऊ विश्वविद्यालय
 

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