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विदेशी भाषाओं के कोर्स: विदेशी भाषा में करियर के कई विकल्प

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आप अपने स्कूल में भी किसी विदेशी भाषा को एक विषय के रूप में पढ़ सकते हैं। उच्च स्तर की शिक्षा के लिए कुछ विशेष संस्थान भी हैं, जो 12वीं पास छात्रों को विदेशी भाषाओं के कोर्स करवाते हैं। ये कोर्स छह महीने से लेकर 18 महीने या इससे भी अधिक के हो सकते हैं। आप विभिन्न विश्वविद्यालयों से पार्ट टाइम या फुल टाइम सर्टिफिकेट कोर्स भी कर सकते हैं । फ्रेंच, जैपनीज, चाइनीज, स्पैनिश, कोरियन, इटेलियन, पर्सियन, रशियन, अरेबिक, जर्मन, डच आदि ऐसी भाषाएं हैं, जिनमें करियर की संभावनाएं अधिक हैं। जैसे -

टीचिंग

विदेशी भाषाओं के कोर्स की बढ़ती लोकप्रियता के कारण इन भाषाओं के अध्यापकों की मांग आजकल काफी बढ़ गई है।

ट्रांसलेटर

देश में अनेक विदेशी कंपनियां अपने कार्यालय स्थापित कर रही हैं। इन्हें अपने बिजनेस पार्टनर या क्लाइंट से बातचीत के लिए ट्रांसलेटर की जरूरत पड़ती है। ऐसे में आप इन कंपनियों में एक ट्रांसलेटर के तौर पर काम कर सकते हैं। ट्रांसलेटर से ही मिलता-जुलता काम होता है इंटरप्रेटर का। टेलीकॉन्फ्रेंसिंग अथवा वीडियोकॉन्फें्रसिंग जैसी टेक्नोलॉजी आने से अब आप दुनिया के किसी भी कोने में बैठ कर किसी भी व्यक्ति या ग्रुप के साथ उनकी भाषा में मीटिंग कर सकते हैं।

फॉरेन सर्विस

फ्रेंच, जर्मन और रशियन जैसी भाषाओं में मास्टर्स करने वाले युवा संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा में शामिल होकर आईएएस या आईएफएस में भी जा सकते हैं।

बीपीओ

बीपीओ इंडस्ट्री के फलने-फूलने के पीछे विदेशी भाषाओं ंमें निपुण पेशेवरों का बड़ा हाथ है। ये लोग डेटा प्रोसेसिंग से लेकर अन्य तमाम जॉब में भी बखूबी अपने कौशल का लोहा मनवा रहे हैं। यही वजह है कि विदेशी भाषा में प्रशिक्षित पेशेवरों को ये बीपीओ कंपनियां हाथोंहाथ जॉब देती हैं।

वेतन

शुरुआत में 30 से 35 हजार रुपये प्रति माह वेतन मिल सकता है। एक इंटरप्रेटर को 10 से 12 लाख रुपये या ज्यादा का सालाना पैकेज मिल सकता है।

योग्यताएं

आप अपने स्कूल में भी किसी विदेशी भाषा को एक विषय के रूप में पढ़ सकते हैं। उच्च स्तर की शिक्षा के लिए कुछ विशेष संस्थान भी हैं, जो 12वीं पास छात्रों को विदेशी भाषाओं के कोर्स करवाते हैं। ये कोर्स छह महीने से लेकर 18 महीने या इससे भी अधिक के हो सकते हैं। आप विभिन्न विश्वविद्यालयों से पार्ट टाइम या फुल टाइम सर्टिफिकेट कोर्स भी कर सकते हैं । फ्रेंच, जैपनीज, चाइनीज, स्पैनिश, कोरियन, इटेलियन, पर्सियन, रशियन, अरेबिक, जर्मन, डच आदि ऐसी भाषाएं हैं, जिनमें करियर की संभावनाएं अधिक हैं। जैसे -

संस्थाएं

' दिल्ली विश्वविद्यालय, 

' इंदिरा गांधी नेशनल ओपन यूनिवर्सिटी (इग्नू)

' स्कूल ऑफ लेंग्वेजेज, जेएनयू
' लैंग्मा स्कूल ऑफ लैंग्वेजिज, दिल्ली 

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