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2 जून, 2020|12:28|IST

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लॉकडाउन : वेतन अटकने से दिल्ली में वर्करों के लिए रोजमर्रा की जरुरतें पूरी करना हुआ मुश्किल

crisis for domestic helpers in lockdown

कोरोनावायरस को फैलने से रोकने के लिए चल रहे देशव्यापी लॉकडाउन से कई कामगारों के लिए मुसीबतें खड़ी हो रही हैं। घरेलू सहायिका के तौर पर काम करने वाली ममता ने बिहार स्थित अपने गांव नहीं जाने का फैसला किया था लेकिन अब उसे इस पर अफसोस है। पेशे से माली भीम सिंह भी परेशान हैं, वह पाबंदी के कारण अपना वेतन नहीं ले पा रहे और उनके लिए घर चलाना मुश्किल हो रहा है। ये दर्द है उन प्रवासी कामगारों का जो अपनी आजीविका के लिये राष्ट्रीय राजधानी में ही रुक गए थे।

देश भर में बंद लागू है और उनकी शिकायत है कि उन्हें उन हाई-प्रोफाइल सोसाइटी से दूर किया जा रहा है जहां वे काम करते थे। सरकार द्वारा 24 मार्च को घोषित किये गए बंद के बाद से ही बेहद कम खाना खाकर किसी तरह गुजारा कर रही ममता को लगा था कि वह जल्द ही फिर से नोएडा की सोसाइटी में घरेलू सहायिका के तौर पर काम करने लगेगी और यही सोचकर वह बिहार के दरभंगा जिले स्थित अपने पैतृक गांव नहीं गई।

ममता की उम्मीदों पर हालांकि जल्द ही पानी फिर गया क्योंकि वह जब-जब काम पर जाने के लिये घर से बाहर निकलती पुलिस उसे रोक देती और वापस  घर भेज देती। 
उन्होंने कहा, “मुझे डांटा गया और डंडा दिखाते हुए कहा गया कि मैं अपनी और दूसरों की जिंदगी जोखिम में डाल रही हूं।”

उन्होंने कहा, “मैं एक अप्रैल का इंतजार कर रही थी और सोच रही थी कि कम से कम अपनी तनख्वाह तो ले सकूंगी, लेकिन यह भी न हो सका। मुझे वापस भेज दिया गया।”

उन्होंने कहा, 'हम अपने नियोक्ताओं तक नहीं पहुंच पा रहे, न ही वे हमारा वेतन देने हमारे मुहल्ले तक आ पा रहे हैं। मेरा कोई बैंक खाता भी नहीं है।' पूछे जाने पर ड्यूटी पर तैनात एक पुलिसकर्मी ने कहा कि वे सिर्फ आदेशों का पालन कर रहे हैं और घरेलू सहायिकाएं 'आवश्यक सेवाओं की सूची में शामिल नहीं हैं। उसने कहा, “हम उन्हें कैसे जाने दें? अगर वो सड़क पर घूमती मिलीं तो हमारी फजीहत होगी।”    

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  • Web Title:Due to Lockdown salary got slack it becomes difficult to meet their daily needs for workers in Delhi