Delhi High Cour asked Jawaharlal Nehru University when classes were not held what was the purpose of conducting the exam - HC ने जेएनयू से पूछा, जब कक्षाएं ही आयोजित न हुईं तो, परीक्षा कराने का क्या उद्देश्य DA Image
17 फरवरी, 2020|12:19|IST

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HC ने जेएनयू से पूछा, जब कक्षाएं ही आयोजित न हुईं तो, परीक्षा कराने का क्या उद्देश्य

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दिल्ली हाई कोर्ट ने बुधवार को जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) को फटकार लगाई है। कोर्ट ने विश्वविद्यालय से पूछा कि ऑनलाइन ओपन बुक होने या घर से परीक्षा देने का उद्देश्य क्या है अगर कक्षाएं आयोजित नहीं की गई। जस्टिस राजीव शकधर ने कहा कि जब कक्षाएं आयोजित नहीं की गईं तो परीक्षा कराने का क्या उद्देश्य था। अगर छात्रों को निर्देश नहीं दिया गया था तो परीक्षा होने का क्या उद्देश्य? दरअसल ऑनलाइन ओपन बुक होने या मानसून सेमेस्टर के लिए होम परीक्षा देने के जेएनयू के फैसले को कुछ छात्रों ने चुनौती दी थी। 

जस्टिस राजीव शकधर ने यह भी कहा कि परीक्षा का मुख्य उद्देश्य तो विद्यार्थियों द्वारा जो कुछ सीखा गया है उसका मूल्यांकन करना होता है। लेकिन व्यवहारिक तौर पर देखा जाए तो जब कोई कक्षाएं ही आयोजित नहीं की गईं तो किस चीज का मूल्यांकन ? जस्टिस राजीव शकधर ने विश्वविद्यालय से पूछा कि क्या किताबों में जो लिखा गया है, क्या उनका मूल्यांकन किया जाए? 

याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने जेएनयू में विभिन्न स्कूलों और विशेष केंद्रों के बोर्ड ऑफ स्टडीज से पूछा है कि मानसून सेमेस्टर की शेष कक्षाओं को कैसे आयोजित किया जा सकता है और परीक्षा कैसे आयोजित कराईं जाएं। बोर्ड से कहा गया है कि वह इसको लेकर सुझाव जेएनयू एकेडमिक काउंसिल को दें और इसकी एक कॉपी कोर्ट में दें।  कोर्ट ने अब इस मामले की सुनवाई के लिए चार फरवरी की तारीख तय की है।

प्रोफेसरों और छात्रों का प्रतिनिधित्व वरिष्ठ अधिवक्ता रितिन राव कर रहे थे। प्रोफेसर और छात्रों ने 2019 मानसून सेमेस्टर के लिए अंतिम सेमेस्टर परीक्षाएं वैकल्पिक तरीके से कराने के विश्वविद्यालय के निर्णय को चुनौती दी है। विश्वविद्यालय ने निर्णय किया है कि वह मानसून सेमेस्टर के लिए परीक्षाएं प्रश्नपत्र विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर अपलोड करके या उसे ईमेल से छात्रों को भेजकर और उत्तर पुस्तिकाएं ईमेल और व्हाट्ऐप मेसेज के जरिये प्राप्त करके लेगा।

याचिकाएं अधिवक्ताओं समीक्षा गोडियाल और अभिक के माध्यम से दायर की गई हैं। इन याचिकाओं में विश्वविद्यालय के उस परिपत्र का भी विरोध किया गया है जिसमें प्रोफेसरों को 2020 शीतकालीन सेमेस्टर के लिए कोर्स वर्क शुरू करने का निर्देश देते हुए कहा गया है कि निर्देश कुलपति के दिशानिर्देश पर जारी किये गए हैं जो उन्होंने जेएनयू कानून और विश्वविद्यालय की संविधियों के तहत मिली अपनी असाधारण शक्तियाँ का इस्तेमाल करते हुए दिये हैं।

याचिकाकर्ताओं ने अपनी अर्जियों में दलील दी है कि जेएनयू के कुलपति को इस तरह की परीक्षाओं की इजाजत देने का अधिकार नहीं है जब विश्वविद्यालय के तहत आने वाले विभिन्न स्कूल और विशेष केंद्रों में पूर्ण पाठ्यक्रम पूरा नहीं किया गया है। 

अदालत याचिकाओं की दलीलों से सहमत प्रतीत हुआ। अदालत ने कहा, ''उन्होंने (कुलपति) जिस शक्ति का इस्तेमाल किया वह इस उद्देश्य के लिए नहीं हो सकती। उनके पास जो शक्ति है वह अन्य उद्देश्यों के लिए है। बोर्ड आहूत हो और उसमें निर्णय लिया जाए। 
    

अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) पिंकी आनंद ने अदालत से कहा कि विश्वविद्यालय अतिरिक्त कक्षाएं आयोजित करने को तैयार है। जेएनयू की ओर से पेश हुई एएसजी ने कहा कि यद्यपि परीक्षाएं आयोजित किये जाने की पूरी प्रक्रिया पर गौर करने से समय की बर्बादी होगी क्योंकि शीतकालीन सेमेस्टर शुरू हो चुका है।  
उन्होंने यह भी कहा कि 'आनलाइन ओपन बुक या 'होम इक्जाम्स छात्रों की जांचते हैं और ये सामान्य होते हैं। 

याचिकाकर्ताओं ने दलील दी कि परिपत्र फैकल्टी सदस्यों से मशविरा के बिना जारी किये गए। याचिकाकर्ताओं ने परिपत्रों को रद्द करने, 2019 मानसून सेमेस्टर को बढ़ाने और जेएनयू को कोर्स वर्क, परीक्षाएं और प्रत्येक सेमेस्टर के लिए पंजीकरण अनिवार्य प्रक्रियाओं के सख्त अनुपालन में करने का निर्देश देने का अनुरोध किया है।

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